Auto Sector Growth: FY26 में ऑटो सेक्टर की शानदार ग्रोथ, SUV और ट्रैक्टर की मांग से उछाल, FY27 में धीमी पड़ सकती है रफ्तार

Shivam
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

भारत का ऑटोमोबाइल सेक्टर वित्त वर्ष 2025-26 में शानदार प्रदर्शन करते हुए मजबूती के साथ उभरा है. यह प्रदर्शन ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर आर्थिक अनिश्चितता बनी हुई है, लेकिन घरेलू मांग, त्योहारी सीजन की मजबूती, सरकारी नीतिगत समर्थन और नए उत्पादों की लॉन्चिंग ने इस सेक्टर को मजबूती प्रदान की है.

शुक्रवार को जारी एक रिपोर्ट में बताया गया है कि पैसेंजर व्हीकल (पीवी) इंडस्ट्री ने इस अवधि में 7 से 9 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि दर्ज की है. इस वृद्धि के पीछे कई कारक एक साथ काम कर रहे हैं, जिनमें त्योहारी मांग, उपभोक्ताओं की बढ़ती क्रय क्षमता, जीएसटी दरों में राहत और ऑटो कंपनियों द्वारा लगातार नए मॉडल लॉन्च करना शामिल है.

मजबूत मांग और नीतिगत सपोर्ट से आई तेजी

ICRA की रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 ऑटो सेक्टर के लिए काफी सकारात्मक रहा है. त्योहारी सीजन के दौरान ग्राहकों की खरीदारी में तेजी देखने को मिली, जिससे डीलरशिप पर फुटफॉल बढ़ा और बिक्री में उछाल आया. इसके अलावा जीएसटी दरों में कमी ने भी वाहनों की कीमतों को अपेक्षाकृत आकर्षक बनाया, जिससे मांग को अतिरिक्त समर्थन मिला. नई टेक्नोलॉजी, बेहतर फीचर्स और आधुनिक डिजाइन के साथ लॉन्च किए गए नए मॉडल्स ने ग्राहकों को आकर्षित किया, जिससे बाजार में प्रतिस्पर्धा और बिक्री दोनों बढ़ीं.

FY27 में ग्रोथ क्यों हो सकती है धीमी

हालांकि, रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि वित्त वर्ष 2026-27 में ग्रोथ की रफ्तार धीमी होकर 4 से 6 प्रतिशत के बीच रह सकती है. इसका प्रमुख कारण उच्च आधार (High Base Effect) है, क्योंकि FY26 में पहले ही मजबूत ग्रोथ दर्ज की जा चुकी है. इसके अलावा वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां, ब्याज दरों का प्रभाव और उपभोक्ता खर्च में संभावित बदलाव भी ग्रोथ को प्रभावित कर सकते हैं. इसका मतलब यह नहीं है कि बाजार कमजोर होगा, बल्कि यह संकेत है कि तेजी के बाद बाजार स्थिरता की ओर बढ़ सकता है.

SUV का बढ़ता दबदबा, बदलता ऑटो ट्रेंड

ऑटो सेक्टर में एक बड़ा संरचनात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है. यूटिलिटी व्हीकल यानी SUV की हिस्सेदारी कुल बिक्री में करीब 67 प्रतिशत तक पहुंच गई है. यह दर्शाता है कि भारतीय ग्राहक अब ज्यादा प्रीमियम, सुरक्षित और फीचर-रिच वाहनों की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं.

इसके साथ ही CNG और इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती हिस्सेदारी भी इस सेक्टर को नया आकार दे रही है. ईंधन की लागत और पर्यावरणीय चिंताओं के चलते ग्राहक वैकल्पिक ईंधन विकल्पों की ओर बढ़ रहे हैं.

ट्रैक्टर सेक्टर में रिकॉर्ड तेजी

ऑटो सेक्टर के साथ-साथ ट्रैक्टर इंडस्ट्री ने भी शानदार प्रदर्शन किया है. चालू वित्त वर्ष के पहले 11 महीनों में ट्रैक्टर की थोक बिक्री में 22.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है. इसके पीछे कई अहम कारण हैं, जैसे बेहतर मानसून, कृषि उत्पादन में वृद्धि, किसानों की आय में सुधार और ट्रैक्टर पर जीएसटी में कमी. इन सभी कारकों ने ग्रामीण मांग को मजबूत किया, जिसका सीधा असर ट्रैक्टर बिक्री पर पड़ा.

रिकॉर्ड बिक्री, लेकिन आगे सामान्य हो सकती है मांग

रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में ट्रैक्टर उद्योग की बिक्री रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच सकती है. हालांकि, वित्त वर्ष 2026-27 में इसकी ग्रोथ घटकर 1 से 4 प्रतिशत के बीच रह सकती है, क्योंकि मांग धीरे-धीरे सामान्य स्तर पर लौटेगी. यह संकेत देता है कि मौजूदा उछाल के बाद बाजार स्थिरता की ओर बढ़ सकता है.

मजबूत बैलेंस शीट, कम कर्ज

ऑटो और ट्रैक्टर कंपनियों की वित्तीय स्थिति भी काफी मजबूत बनी हुई है. कम कर्ज, बेहतर नकदी प्रवाह और संचालन में सुधार के चलते कंपनियों की बैलेंस शीट मजबूत हुई है. इससे कंपनियां भविष्य में निवेश और विस्तार के लिए बेहतर स्थिति में हैं.

EV और नए प्रोडक्ट पर बढ़ता फोकस

पैसेंजर व्हीकल कंपनियां आने वाले समय में इलेक्ट्रिक वाहनों और नए प्लेटफॉर्म पर निवेश बढ़ाने की योजना बना रही हैं. EV सेगमेंट में बढ़ती प्रतिस्पर्धा और सरकारी प्रोत्साहन के चलते यह सेक्टर तेजी से विकसित हो रहा है. वहीं, ट्रैक्टर कंपनियां लागत नियंत्रण और संचालन दक्षता पर ध्यान देकर अपनी लाभप्रदता बनाए रखने की कोशिश कर रही हैं.

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