भारत में FY28 तक दोगुनी होगी डेटा सेंटर क्षमता: Report

Shivam
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
भारत में डिजिटल इकोनॉमी के विस्तार के साथ, देश का थर्ड पार्टी डेटा सेंटर (DC) इंफ्रास्ट्रक्चर भी बड़े पैमाने पर विस्तार की ओर अग्रसर है. गुरुवार को जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025 में डेटा सेंटर की कुल क्षमता जहां लगभग 1,250 मेगावाट है, वहीं यह 2028 तक दोगुनी बढ़कर 2,400 से 2,500 मेगावाट तक पहुंच सकती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि अगले तीन वर्षों में लगभग 90,000 करोड़ रुपए के मजबूत निवेश के साथ यह वृद्धि देखी जा सकती है.
क्रेडिट रेटिंग एजेंसी आईसीआरए ने अपनी रिपोर्ट में कहा, इंडस्ट्री प्लेयर्स अगले 7-10 वर्षों के लिए कुल 3.0-3.5 गीगावाट क्षमता वाली विकास योजनाओं की घोषणा कर चुके हैं, जो 2.3-2.5 लाख करोड़ रुपए का एक बड़ा निवेश है. यह भारत के वर्तमान डिजिटल परिवर्तन में इस क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका को दर्शाता है.
रिपोर्ट के अनुसार, मुंबई भारतीय डेटा सेंटर (DC) उद्योग का प्रमुख केंद्र बना हुआ है, जो देश की कुल परिचालन क्षमता में 50% से अधिक का योगदान देता है. डेटा सेंटर क्षमता के लिहाज से मुंबई दुनिया के शीर्ष शहरों में 21वें स्थान पर है. शहर की रणनीतिक स्थिति, मजबूत और विश्वसनीय पावर इंफ्रास्ट्रक्चर, साथ ही केबल लैंडिंग स्टेशनों की निकटता, इसे डेटा सेंटर ऑपरेटरों के लिए सबसे पसंदीदा गंतव्य बनाती है. वर्तमान में भारत वैश्विक थर्ड पार्टी डेटा सेंटर क्षमता (42 गीगावाट) का लगभग 3% हिस्सा रखता है, जबकि अमेरिका इस सूची में सबसे आगे है, जिसका योगदान करीब 50% है.
आईसीआरए की कॉर्पोरेट रेटिंग की वाइस प्रेसिडेंट और को-ग्रुप हेड अनुपमा रेड्डी ने कहा, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय का 20-वर्षीय कर छूट नीति का हालिया ड्राफ्ट प्रस्ताव लागू होता है, तो भारत में डेटा सेंटर की वृद्धि के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है. कंस्ट्रक्शन और इलेक्ट्रिकल सिस्टम जैसे पूंजीगत निवेश पर इनपुट टैक्स क्रेडिट प्रदान कर, इस नीति का उद्देश्य प्रारंभिक लागत कम करना और परियोजना की व्यवहार्यता में सुधार करना है.
एज डेटा सेंटर भी तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं. इसकी वजह खासकर बैंकिंग, हेल्थकेयर, कृषि और रक्षा जैसे क्षेत्रों में लो लैटेन्सी और हाई-स्पीड की आवश्यकता है. भारतीय डेटा सेंटर ऑपरेटर रिन्यूएबल एनर्जी पर भी ध्यान दे रहे हैं और वर्तमान में उनकी कुल बिजली की आवश्यकता का 15-20% ग्रीन पावर से पूरा हो रहा है. रिपोर्ट के अनुसार, ईएसजी नियमों और बिजली के स्रोतों में विविधता लाने की आवश्यकता के कारण यह हिस्सा वित्त वर्ष 28 तक 30-35% तक बढ़ने की उम्मीद है.
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