निजी क्षेत्र के नेतृत्व वाले नवाचार को बढ़ावा देने के लिए 1 लाख करोड़ रूपये की RDI योजना को कैबिनेट ने दी मंजूरी

Shivam
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
भारत के शोध और नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के उद्देश्य से केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मंगलवार को शोध विकास और नवाचार (RDI) योजना को मंजूरी दे दी, जिसका कुल परिव्यय ₹1 लाख करोड़ है. यह योजना शोध और नवाचार में निजी क्षेत्र की अधिक भागीदारी को प्रोत्साहित करने के लिए बनाई गई है, खासकर रणनीतिक और उभरते क्षेत्रों में. आरडीआई योजना निजी कंपनियों को कम या शून्य ब्याज दरों पर दीर्घकालिक वित्तपोषण या पुनर्वित्त प्रदान करने का प्रयास करती है.

बढ़ेगी वैश्विक प्रतिस्पर्धा

अधिकारियों ने कहा कि यह योजना अनुसंधान परियोजनाओं को शुरू करने में निजी क्षेत्र द्वारा सामना की जाने वाली लगातार वित्तपोषण बाधाओं को दूर करती है और इसका उद्देश्य महत्वपूर्ण और उभरती प्रौद्योगिकियों के लिए विकास और जोखिम पूंजी प्रदान करना है. सरकार को उम्मीद है कि इससे तकनीकी अपनाने को बढ़ावा मिलेगा, वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और आर्थिक सुरक्षा और आत्मनिर्भरता में योगदान मिलेगा. इस योजना के तहत, प्रौद्योगिकी तत्परता स्तर (टीआरएल) के उच्च स्तर पर परियोजनाओं को वित्त पोषण प्राप्त होगा और महत्वपूर्ण या रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों के अधिग्रहण के लिए भी सहायता प्रदान की जाएगी.
यह योजना प्रौद्योगिकी-केंद्रित उपक्रमों का समर्थन करने के लिए डीप-टेक फंड ऑफ फंड्स के निर्माण की सुविधा भी प्रदान करेगी. अनुसंधान विकास और नवाचार योजना दो-स्तरीय वित्तपोषण संरचना के माध्यम से संचालित होगी. पहले स्तर पर, अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन (ANRF) के भीतर एक विशेष प्रयोजन निधि (SPF) स्थापित की जाएगी, जो कोष के संरक्षक के रूप में कार्य करेगी.
फिर एसपीएफ से प्राप्त निधि को विभिन्न दूसरे स्तर के फंड मैनेजरों को आवंटित किया जाएगा, जो विशेष रूप से स्टार्टअप के लिए दीर्घकालिक रियायती ऋण या कुछ मामलों में इक्विटी फंडिंग प्रदान करेंगे. योजना की व्यापक रणनीतिक दिशा प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में एएनआरएफ के गवर्निंग बोर्ड द्वारा प्रदान की जाएगी. एएनआरएफ की कार्यकारी परिषद दिशा-निर्देशों को मंजूरी देने और उभरते क्षेत्रों में दूसरे स्तर के फंड मैनेजरों और परियोजनाओं की पहचान करने के लिए जिम्मेदार होगी.
कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता में सचिवों का एक अधिकार प्राप्त समूह योजना के कार्यान्वयन की देखरेख करेगा, इसके प्रदर्शन की समीक्षा करेगा और क्षेत्रों, परियोजना प्रकारों और फंड मैनेजरों पर निर्णय लेगा. विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग योजना को क्रियान्वित करने के लिए नोडल विभाग के रूप में काम करेगा.
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