Coal India CSR: कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) ने कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) के तहत निर्धारित राशि से कहीं अधिक खर्च कर सामुदायिक विकास के कार्यों में योगदान दिया है. वित्त वर्ष 2014-15 से वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान कंपनी ने सीएसआर पर 5,795 करोड़ रुपये की सांविधिक आवश्यकता के मुकाबले कुल 7,276 करोड़ रुपये व्यय किए. इस तरह कंपनी ने निर्धारित राशि से 1,481 करोड़ रुपये अधिक खर्च किए हैं. सरकार ने मंगलवार को यह जानकारी दी.
कोयला मंत्रालय के अनुसार, सीआईएल का सीएसआर व्यय अब बढ़कर करीब 1,000 करोड़ रुपये वार्षिक हो गया है. कंपनी का संचालन देश के कुछ सबसे कम संसाधनों वाले और आदिवासी-बहुल जिलों तक फैला हुआ है. ऐसे क्षेत्रों में समुदायों के कल्याण और विकास में योगदान देने की परंपरा कंपनी के लिए नई नहीं है.
सीएसआर अनिवार्य होने से पहले भी सामुदायिक विकास के काम
कोयला मंत्रालय ने बताया कि कंपनी अधिनियम, 2013 के तहत कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व को वैधानिक रूप से अनिवार्य बनाए जाने से पहले ही सीआईएल और उसकी सहायक कंपनियां सामुदायिक विकास नीति, 2005 के तहत खनन क्षेत्रों और उनके आसपास कल्याणकारी गतिविधियों में शामिल थीं. इस नीति के अंतर्गत सहायक कंपनियां खनन संचालन वाली जगहों के आसपास 8 किलोमीटर के दायरे में आने वाले गांवों में पेयजल सुविधाएं, स्वास्थ्य शिविर और छोटे अवसंरचनात्मक कार्यों के माध्यम से सहायता प्रदान करती थीं. मंत्रालय के मुताबिक, इन पहलों से आसपास के समुदायों के साथ तालमेल बनाने में मदद मिली.
कंपनी अधिनियम लागू होने से पहले के तीन वर्षों यानी वित्त वर्ष 2011-12 से 2013-14 के दौरान सीआईएल का सामुदायिक विकास पर कुल व्यय वित्त वर्ष 2011-12 में 82 करोड़ रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 2013-14 में 409 करोड़ रुपये तक पहुंच गया था. मंत्रालय ने कहा कि उस दौरान जमीनी स्तर पर किए जा रहे कार्य सार्थक थे और उनकी सराहना भी की गई. हालांकि, इन गतिविधियों को हर साल निरंतरता के साथ जारी रखने और उनका दायरा बढ़ाने के लिए एक सुसंगत संस्थागत ढांचे की आवश्यकता थी.
कंपनी अधिनियम 2013 से सीएसआर व्यवस्था में आया बदलाव
कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 135 ने सीएसआर के लिए एक औपचारिक व्यवस्था स्थापित की. इसके तहत कंपनियों के लिए अपने औसत शुद्ध लाभ का निर्धारित हिस्सा सीएसआर गतिविधियों पर खर्च करना आवश्यक हुआ. साथ ही, उन्हें अधिनियम की अनुसूची 7 में शामिल विषयों के अनुसार कार्य करना और बोर्ड स्तर पर गठित सीएसआर समिति के माध्यम से खर्च की निगरानी करना होता है. मंत्रालय के अनुसार, सीआईएल ने अपनी नीति के जरिए स्थानीय क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया है. कंपनी के वार्षिक सीएसआर व्यय का कम से कम 80 प्रतिशत हिस्सा खदानों और प्रतिष्ठानों के 25 किलोमीटर के दायरे में उपयोग किया जाता है. इसमें परियोजनाओं से प्रभावित क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जाती है. शेष राशि राज्य और राष्ट्रीय स्तर की पहलों के लिए रखी जाती है.
90 प्रतिशत से अधिक सीएसआर खर्च कोयला उत्पादक राज्यों में
सीआईएल की स्थानीय क्षेत्रों पर केंद्रित नीति के परिणामस्वरूप कंपनी का 90 प्रतिशत से अधिक सीएसआर व्यय कोयला उत्पादक राज्यों में किया जाता है. इससे उन क्षेत्रों और समुदायों तक लाभ पहुंचाने पर ध्यान दिया जाता है, जहां खनन गतिविधियों का प्रभाव सबसे अधिक महसूस किया जाता है. कोयला मंत्रालय ने कहा कि सीआईएल ने अपने वैधानिक दायित्वों को पूरा करने के साथ-साथ निर्धारित आवश्यकता से अधिक राशि सीएसआर पर खर्च की है. वित्त वर्ष 2014-15 से 2025-26 के दौरान कंपनी ने 5,795 करोड़ रुपये की सांविधिक आवश्यकता के मुकाबले कुल 7,276 करोड़ रुपये व्यय किए.
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