UPI MDR Charges: नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) ने मंगलवार को कुछ मीडिया रिपोर्टों में किए गए उन दावों को खारिज किया, जिनमें कहा गया था कि यूपीआई पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) और उस पर लगने वाला जीएसटी छोटे व्यापारियों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ डालेगा और डिजिटल भुगतान को महंगा बना देगा. एनपीसीआई ने स्पष्ट किया कि ये दावे सही नहीं हैं. संस्था के मुताबिक, एमडीआर केवल 2,000 रुपये से अधिक के व्यक्ति-से-व्यापारी (पी2एम) यूपीआई ट्रांजैक्शन पर लागू होगा. वहीं, 2,000 रुपये तक के सभी यूपीआई मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर पहले की तरह शून्य एमडीआर रहेगा. ऐसे ट्रांजैक्शन पर जीएसटी का भी कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा.
96% से अधिक यूपीआई मर्चेंट ट्रांजैक्शन एमडीआर से मुक्त
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2,000 रुपये तक के ट्रांजैक्शन यूपीआई मर्चेंट ट्रांजैक्शन वॉल्यूम का 96 प्रतिशत से अधिक हिस्सा हैं. इसका मतलब है कि अधिकांश यूपीआई भुगतान एमडीआर और उससे जुड़े किसी भी जीएसटी दायित्व से मुक्त रहेंगे. एनपीसीआई ने यह भी कहा कि जिन व्यापारियों की मासिक यूपीआई प्राप्तियां 1 लाख रुपये तक हैं, उन्हें एमडीआर का भुगतान नहीं करना होगा. ऐसे छोटे व्यापारियों के लिए एमडीआर पर जीएसटी लगने का सवाल ही नहीं उठता. संस्था के अनुसार, छोटे व्यापारियों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ने की आशंकाएं तथ्यात्मक रूप से सही नहीं हैं, क्योंकि अधिकांश ट्रांजैक्शन और छोटे कारोबारी इस व्यवस्था से प्रभावित नहीं होंगे.
एनपीसीआई ने स्पष्ट किया कि यदि किसी व्यापारी को एमडीआर पर जीएसटी का भुगतान करना पड़ता है, तो वह इस राशि को अन्य इनपुट टैक्स की तरह अपनी जीएसटी देनदारी के विरुद्ध समायोजित कर सकता है. इसलिए संस्था के मुताबिक, जीएसटी की यह राशि अंततः व्यापारी पर अतिरिक्त लागत के रूप में नहीं पड़ती.
एमडीआर सरकार या एनपीसीआई द्वारा वसूला जाने वाला कर नहीं
इससे पहले वित्त मंत्रालय भी स्पष्ट कर चुका है कि एमडीआर कोई कर नहीं है और न ही इसे सरकार या एनपीसीआई वसूलती है. यह राशि भुगतान व्यवस्था से जुड़े विभिन्न भागीदारों, जैसे बैंक, भुगतान सेवा प्रदाता और यूपीआई ऐप प्रदाताओं के बीच वितरित की जाती है. इसका उद्देश्य यूपीआई नेटवर्क के संचालन और विस्तार को जारी रखने के लिए भुगतान व्यवस्था से जुड़े भागीदारों को संसाधन उपलब्ध कराना है.
2,000 रुपये से अधिक के पी2एम ट्रांजैक्शन पर 0.4% एमडीआर
नई व्यवस्था के तहत 2,000 रुपये से अधिक के व्यक्ति-से-व्यापारी (पी2एम) ट्रांजैक्शन पर 0.4% एमडीआर लागू होगा. हालांकि, 75,000 रुपये या उससे अधिक के ट्रांजैक्शन के लिए एमडीआर की अधिकतम सीमा 300 रुपये प्रति ट्रांजैक्शन तय की गई है. वहीं, रेलवे, दूरसंचार, बीमा, ईंधन और कृषि इनपुट जैसे आवश्यक एवं कम मार्जिन वाले क्षेत्रों के लिए अलग व्यवस्था रखी गई है. इन क्षेत्रों में 2,000 रुपये से अधिक के ट्रांजैक्शन पर केवल 5 रुपये प्रति ट्रांजैक्शन का फ्लैट एमडीआर लागू होगा. इस व्यवस्था का उद्देश्य इन क्षेत्रों के लिए भुगतान लागत को पूर्वानुमेय और सीमित रखना है.
व्यक्ति-से-व्यक्ति यूपीआई ट्रांजैक्शन रहेंगे पूरी तरह मुफ्त
एनपीसीआई और वित्त मंत्रालय ने यह भी दोहराया कि व्यक्ति-से-व्यक्ति (पी2पी) यूपीआई ट्रांजैक्शन पूरी तरह मुफ्त रहेंगे. यह छूट ट्रांजैक्शन की राशि से प्रभावित नहीं होगी. एनपीसीआई के अनुसार, एमडीआर को लेकर जताई जा रही आशंकाओं का प्रभाव बहुत सीमित दायरे में है. 96 प्रतिशत से अधिक यूपीआई मर्चेंट ट्रांजैक्शन और अधिकांश छोटे व्यापारी इस बदलाव से प्रभावित नहीं होंगे.
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