कॉपर, एल्युमिनियम और निकेल जैसी धातुओं की कीमतों में तेजी के कारण एसी, बाथ फिटिंग और किचन में इस्तेमाल होने वाले बड़े सामानों की कीमतों में बढ़ोतरी होने की संभावना है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में एल्युमिनियम का भाव 3,000 डॉलर प्रति टन के पार पहुंच गया है, जो पिछले तीन वर्षों में सबसे ऊंचा स्तर है. वहीं, कॉपर का दाम 12,000 डॉलर प्रति टन के ऑल-टाइम हाई तक पहुँच गया है. रिपोर्ट्स के अनुसार, इन धातुओं, खासकर कॉपर की कीमतों में उम्मीद से अधिक बढ़ोतरी के कारण कई मैन्युफैक्चरर्स की इनपुट लागत बढ़ गई है और वे अतिरिक्त भार वहन करने में असमर्थ हैं. नतीजतन, एसी, किचन उपकरण, बाथ फिटिंग और कुकवेयर की कीमतों में इजाफा होने की संभावना है.
कॉपर और एल्युमिनियम की कीमतों में तेजी
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर हाल ही में कॉपर का दाम 1,300 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गया है. मार्जिन को बनाए रखने के लिए कई मैन्युफैक्चरर्स कीमतों में 5-8 प्रतिशत तक की वृद्धि करने की योजना बना रहे हैं. बाथवेयर कंपनियां भी दबाव में हैं, क्योंकि तांबे आधारित धातु पीतल की कीमतों में वित्त वर्ष की शुरुआत से ही दोहरे अंकों में बढ़ोतरी हुई है. एल्युमिनियम की कीमतों में बढ़ोतरी चीन में स्मेल्टिंग क्षमता पर लगी रोक और लगातार अधिक बिजली लागत के कारण यूरोप में कम उत्पादन जैसी संरचनात्मक आपूर्ती की दिक्कतों को दिखाती है, जबकि कंस्ट्रक्शन, रिन्यूएबल एनर्जी और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स से लंबी अवधि की मांग मजबूत बनी हुई है.
2025 में सोने-चांदी ने रिटर्न में रिकॉर्ड बढ़त दर्ज की
बार-बार आपूर्ति में रुकावटों के बीच कॉपर ने 2009 के बाद से सबसे बड़ी सालाना बढ़ोतरी दर्ज की. इंडोनेशिया, चिली और डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो में माइनिंग दुर्घटनाओं और चिली की एक बड़ी खदान में मजदूरों की हड़ताल ने उपलब्धता को कम कर दिया है, जबकि ट्रेड की अनिश्चितताओं के कारण अमेरिका को शिपमेंट में तेजी आई है. रिपोर्ट्स के अनुसार, दुनिया के सबसे बड़े प्रोड्यूसर इंडोनेशिया द्वारा उत्पादन में कटौती के संकेत और पीटी वेल इंडोनेशिया की एक खदान में अस्थायी रोक के कारण निकेल की कीमतों में भी बढ़ोतरी हुई है. केवल कॉपर, एल्युमिनियम और निकेल ही नहीं, बल्कि सोने और चांदी जैसी कीमती धातुओं में भी तेजी देखने को मिली है. 2025 में सोने ने लगभग 65 प्रतिशत और चांदी ने करीब 145 प्रतिशत का रिटर्न दिया.
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