Cost Inflation Index 2026-27: प्रॉपर्टी बेचने वालों के लिए बड़ी राहत! सरकार ने बढ़ाया CII, जानिए किसे मिलेगा टैक्स में फायदा

Shivam
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

Cost Inflation Index 2026-27: अगर आप जमीन, मकान या दूसरी अचल संपत्ति बेचने की योजना बना रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए महत्वपूर्ण हो सकती है. केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए कॉस्ट इन्फ्लेशन इंडेक्स (Cost Inflation Index-CII) को बढ़ाने की घोषणा की है. सरकार ने CII को 376 से बढ़ाकर 384 कर दिया है, यानी पिछले वित्त वर्ष की तुलना में इसमें करीब 2.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है. सीबीडीटी की ओर से जारी अधिसूचना 15 जुलाई 2026 से प्रभावी हो गई है और इसका असर 1 अप्रैल 2026 से होने वाली टैक्स गणनाओं पर लागू होगा. हालांकि, वित्त अधिनियम 2024 में हुए बदलावों के बाद इंडेक्सेशन का लाभ सभी करदाताओं को नहीं मिलेगा. ऐसे में यह समझना जरूरी है कि नया CII किन लोगों के लिए फायदेमंद साबित होगा.

क्या होता है Cost Inflation Index (CII)?

कॉस्ट इन्फ्लेशन इंडेक्स (CII) का उपयोग किसी संपत्ति की खरीद कीमत को महंगाई के अनुसार समायोजित (इंडेक्सेशन) करने के लिए किया जाता है. इसका सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि लंबी अवधि के पूंजीगत लाभ (Long-Term Capital Gains) पर टैक्स की गणना वास्तविक लागत के आधार पर हो सके. उदाहरण के तौर पर यदि किसी व्यक्ति ने कई वर्ष पहले कम कीमत पर जमीन या मकान खरीदा था, तो इंडेक्सेशन के जरिए उसकी खरीद कीमत को महंगाई के हिसाब से बढ़ाया जाता है. इससे टैक्स योग्य लाभ कम हो जाता है और करदाता पर टैक्स का बोझ भी घटता है.

सरकार ने CII को 376 से बढ़ाकर 384 किया

सीबीडीटी द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 के लिए कॉस्ट इन्फ्लेशन इंडेक्स को 376 से बढ़ाकर 384 कर दिया गया है. यह बदलाव 15 जुलाई 2026 से प्रभावी है और 1 अप्रैल 2026 से होने वाली आयकर गणनाओं पर लागू होगा. सरकार का मानना है कि इंडेक्सेशन के जरिए संपत्ति की वास्तविक लागत को महंगाई के अनुरूप मान्यता मिलती है, क्योंकि कई मामलों में वर्षों पहले खरीदी गई संपत्तियों की मूल कीमत काफी कम होती है. ऐसे में केवल खरीद और बिक्री मूल्य के अंतर पर टैक्स लगाना करदाताओं के लिए उचित नहीं माना जाता.

वित्त अधिनियम 2024 के बाद क्या बदला?

हालांकि, वित्त अधिनियम 2024 के तहत किए गए बदलावों के बाद 23 जुलाई 2024 या उसके बाद बेची जाने वाली अधिकांश दीर्घकालिक पूंजीगत संपत्तियों पर इंडेक्सेशन का लाभ समाप्त कर दिया गया है. अब ऐसे मामलों में इंडेक्सेशन के बिना 12.5 प्रतिशत की फ्लैट टैक्स दर लागू होती है. यानी नई व्यवस्था में अधिकांश संपत्तियों पर टैक्स की गणना पहले की तुलना में अलग तरीके से की जाएगी.

किन लोगों को अब भी मिलेगा इंडेक्सेशन का लाभ?

बदलाव के बावजूद कुछ मामलों में कॉस्ट इन्फ्लेशन इंडेक्स अब भी महत्वपूर्ण बना हुआ है. यदि कोई भारतीय निवासी व्यक्ति या हिंदू अविभाजित परिवार ऐसी जमीन या भवन बेचता है, जिसे 23 जुलाई 2024 से पहले खरीदा गया था, तो उसके पास दो विकल्प होंगे. पहला, वह 12.5% टैक्स बिना इंडेक्सेशन के चुका सकता है. दूसरा, 20% टैक्स इंडेक्सेशन के लाभ के साथ देने का विकल्प चुन सकता है. करदाता अपने लिए जिस विकल्प में कम टैक्स बनता हो, उसे चुन सकेगा.

डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन में भी दिखी मजबूत बढ़त

इसी बीच सीबीडीटी ने प्रत्यक्ष कर संग्रह के ताजा आंकड़े भी जारी किए हैं. बोर्ड के अनुसार, चालू वित्त वर्ष में 13 जुलाई 2026 तक देश का शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह सालाना आधार पर 16.4% बढ़कर 6.51 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया है. यह आंकड़ा दर्शाता है कि प्रत्यक्ष कर संग्रह में लगातार मजबूती देखने को मिल रही है.

कॉरपोरेट टैक्स और STT कलेक्शन में भी तेजी

सीबीडीटी के आंकड़ों के मुताबिक, शुद्ध कॉरपोरेट टैक्स संग्रह में 22 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है और यह करीब 2.40 लाख करोड़ रुपये रहा. वहीं गैर-कॉरपोरेट टैक्स संग्रह भी लगभग 12 प्रतिशत बढ़कर 3.85 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया है. इसके अलावा सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) संग्रह में सबसे तेज बढ़ोतरी देखने को मिली. एसटीटी कलेक्शन 44 प्रतिशत से अधिक बढ़कर 26,000 करोड़ रुपये के पार पहुंच गया. इससे संकेत मिलता है कि पूंजी बाजार में लेनदेन और निवेश गतिविधियां लगातार मजबूत बनी हुई हैं.

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