Crude Oil Price: कच्चा तेल 110 डॉलर के पार, क्या फिर बढ़ेंगे पेट्रोल-डीजल के दाम?

Shivam
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

Crude Oil Price Hike: मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नई चेतावनी के बाद अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिल रहा है. बढ़ते तनाव ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है और आशंका जताई जा रही है कि अगर हालात और बिगड़ते हैं तो तेल आपूर्ति पर बड़ा असर पड़ सकता है. इसी डर के कारण कच्चे तेल की कीमतें पिछले दो हफ्तों के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई हैं.

कच्चे तेल की कीमतों में आया तेज उबाल

सोमवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी दर्ज की गई. ब्रेंट कच्चा तेल करीब 1.3% बढ़कर 110.70 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया. वहीं अमेरिकी कच्चा तेल भी 1.7% की बढ़त के साथ 107.26 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखाई दिया. बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अगर पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ता है तो तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है, जिससे आने वाले दिनों में कीमतों में और बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है.

भारत की अर्थव्यवस्था पर क्या होगा असर?

सरकार ने हाल ही में देशभर में ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी की थी, जिसका असर आम लोगों की जेब पर भी दिखाई देने लगा है. अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का भारत की अर्थव्यवस्था पर कितना असर पड़ेगा. हालांकि फिलहाल इसका सटीक अनुमान लगाना आसान नहीं है, क्योंकि इसके पीछे कई कारण जुड़े हुए हैं. इसमें यह बात भी अहम है कि पश्चिम एशिया में तनाव कितने समय तक बना रहता है, कच्चे तेल की कीमतें कहां तक पहुंचती हैं और सरकार इस अतिरिक्त बोझ का कितना हिस्सा आम लोगों तक पहुंचाती है.

क्या फिर बढ़ेंगे पेट्रोल-डीजल के दाम?

बीते 15 मई को तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की थी. इसके बाद अब फिर कीमतें बढ़ने की आशंका जताई जा रही है. Kotak Institutional Equities के एक विश्लेषण के अनुसार, तेल कंपनियों के नुकसान की पूरी भरपाई करने के लिए कीमतों में 15 से 20 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की जरूरत पड़ सकती है. हालांकि, कंपनियां इस बढ़ोतरी को एक साथ लागू करने के बजाय चरणबद्ध तरीके से लागू कर सकती हैं.

सरकारी कंपनियों को हो रहा नुकसान

पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी (Hardeep Singh Puri) के मुताबिक, ईंधन की कीमतें लंबे समय तक स्थिर रखने की वजह से सरकारी तेल कंपनियों को हर दिन करीब 1000 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा था. हाल ही में प्रति लीटर 3 रुपये की बढ़ोतरी से इस नुकसान को कुछ हद तक कम करने में मदद मिली है, लेकिन इसे पूरी तरह पर्याप्त नहीं माना जा रहा है. रिपोर्ट के अनुसार अगर कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक 100 से 120 डॉलर प्रति बैरल के बीच बनी रहती हैं, तो नुकसान की भरपाई के लिए खुदरा बाजार में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 15 से 20 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी की जा सकती है.

बढ़ती कीमतों का असर सिर्फ तेल तक सीमित नहीं

कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर केवल पेट्रोल और डीजल तक सीमित नहीं रहता. इससे परिवहन लागत बढ़ती है, जिसका असर खाने-पीने की चीजों से लेकर रोजमर्रा के सामान तक पर पड़ सकता है. ऐसे में आने वाले दिनों में आम लोगों की चिंता और बढ़ सकती है.

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