Delhi Electric Vehicle Policy: दिल्ली में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए तैयार की गई नई नीति (2024-2030) ने बाजार में हलचल बढ़ा दी है. इस नीति के लागू होने के बाद इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री में तेज बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है, हालांकि फिलहाल कई लोग खरीद का निर्णय कुछ समय के लिए टाल सकते हैं. बुधवार को जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, करीब 40,000 करोड़ रुपए के सरकारी खर्च के साथ तैयार इस नीति में इलेक्ट्रिक वाहनों को तेजी से अपनाने के लिए स्पष्ट योजना बनाई गई है. इसमें शुरुआती प्रोत्साहन, सख्त नियम और पुराने वाहनों को हटाने से जुड़े लाभ शामिल किए गए हैं.
नीति के प्रमुख प्रावधान
नीति के मसौदे के अनुसार, जनवरी 2027 से दिल्ली में केवल इलेक्ट्रिक तिपहिया वाहनों का ही पंजीकरण किया जाएगा. इसके बाद अप्रैल 2028 से दोपहिया वाहनों के लिए भी यही नियम लागू होगा, यानी केवल इलेक्ट्रिक दोपहिया ही पंजीकृत किए जाएंगे. यह कदम राजधानी में प्रदूषण कम करने और स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा देने की दिशा में अहम माना जा रहा है.
अभी खरीद टाल सकते हैं ग्राहक
रिपोर्ट में कहा गया है कि जब तक नीति पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो जाती, तब तक लोग इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने में जल्दबाजी नहीं करेंगे. इस कारण निकट भविष्य में बिक्री पर थोड़ा असर पड़ सकता है. हालांकि, जैसे ही नीति लागू होगी, पहले से रुकी हुई मांग बाजार में आएगी और प्रोत्साहनों के कारण बिक्री में तेजी से उछाल देखने को मिल सकता है.
किसे होगा फायदा
रिपोर्ट के अनुसार, इस नीति का सबसे अधिक लाभ उन निर्माताओं को मिलेगा जिन्होंने पहले से इलेक्ट्रिक वाहनों के क्षेत्र में निवेश किया है और जिनके उत्पाद बाजार में मजबूत स्थिति में हैं. दोपहिया वाहन क्षेत्र में स्थापित कंपनियां अपनी हिस्सेदारी और बढ़ा सकती हैं, जबकि नई कंपनियां भी तेजी से इस क्षेत्र में प्रवेश कर रही हैं. यात्री वाहन क्षेत्र में शुरुआती कंपनियों को बढ़त मिल सकती है, जबकि अन्य कंपनियां नए मॉडल लाकर प्रतिस्पर्धा बढ़ाएंगी. तिपहिया वाहन क्षेत्र में बाजार अभी भी कुछ बड़े निर्माताओं के हाथ में केंद्रित है, जिन्हें सरकारी नियमों का सीधा लाभ मिल सकता है.
प्रोत्साहन और राहत
नीति के तहत इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों को शुरुआती वर्षों में विशेष प्रोत्साहन दिया जाएगा. पहले वर्ष में प्रति किलोवाट 10,000 रुपए तक की सहायता मिलेगी, जिसकी अधिकतम सीमा 30,000 रुपए होगी. दूसरे वर्ष में यह सहायता घटकर 6,600 रुपए और तीसरे वर्ष में 3,300 रुपए रह जाएगी. यानी शुरुआत में अधिक लाभ मिलेगा, जो धीरे-धीरे कम होता जाएगा. यात्री वाहनों पर सीधे दी जाने वाली सहायता को समाप्त कर दिया गया है. अब सरकार पुराने वाहनों को हटाने पर मिलने वाले लाभ और कर में छूट के जरिए लागत कम करने पर ध्यान दे रही है.
हाइब्रिड वाहनों को भी राहत
नई नीति में मजबूत हाइब्रिड वाहनों को भी शामिल किया गया है. 30 लाख रुपए तक की कीमत वाले ऐसे वाहनों पर 50% तक सड़क कर में छूट दी जाएगी. इससे यह स्पष्ट है कि सरकार संक्रमण काल में इस तकनीक को भी महत्व दे रही है.
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