भारत में बढ़ा एफडीआई का प्रवाह, 1000 बिलियन अमेरिकी डॉलर के पार हुआ आंकड़ा

Shivam
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल 2000 से सितंबर 2024 के बीच भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) का प्रवाह बढ़कर 1,033.40 बिलियन डॉलर हो गया है, जो देश की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था में बढ़ते निवेश के अवसरों को दर्शाता है. FDI से लाभान्वित होने वाले अर्थव्यवस्था के मुख्य क्षेत्रों में ऑटोमोबाइल, कंप्यूटर सॉफ्टवेयर, IT हार्डवेयर, दूरसंचार, फार्मास्यूटिकल्स, रसायन और सेवाएं शामिल हैं.

आंकड़ों से यह भी मालूम चलता है कि उभरते गैर-पारंपरिक ऊर्जा क्षेत्र में FDI प्रवाह में बड़ी उछाल दर्ज की गई है. एफडीआई प्रवाह से अर्थव्यवस्था में अधिक निवेश और रोजगार सृजन होता है और अत्याधुनिक तकनीक आती है जो उत्पादकता के स्तर को बढ़ाती है और आर्थिक विकास को बढ़ावा देती है.

व्यापार को सरकार ने बनाया सुगम

वहीं, एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, सरकार ने व्यापार करने में आसानी को सुगम बनाया है और PLI योजना जैसे विभिन्न प्रोत्साहन लागू किए गए हैं, जिससे देश में FDI के प्रवाह में तेजी लाने में मदद मिली है. DPIIT के आंकड़ों से पता चलता है कि चालू वित्त वर्ष में FDI में उछाल जारी रहा है और अप्रैल-सितंबर में यह 45% बढ़कर 29,790 मिलियन अमेरिकी डॉलर हो गया, जबकि 2023-24 के दौरान इसी अवधि में यह 20,488 मिलियन अमरीकी डॉलर था.

FDI प्रवाह 43 प्रतिशत बढ़ा

चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही के दौरान सेवाओं में FDI बढ़कर 5.69 बिलियन अमेरीकी डॉलर हो गया, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 3.85 बिलियन अमेरिकी डॉलर था. चालू वित्त वर्ष के दौरान जुलाई-सितंबर तिमाही के लिए FDI प्रवाह 43% बढ़कर 13.6 अरब डॉलर हो गया, जबकि 2023-24 समान अवधि में यह 9.52 अरब डॉलर था.

राज्यवार आंकड़े

राज्यवार आंकड़े बताते हैं कि अप्रैल-सितंबर 2024-25 के दौरान महाराष्ट्र में सबसे अधिक 13.55 बिलियन डॉलर का प्रवाह हुआ. कर्नाटक में 3.54 बिलियन डॉलर, गुजरात में 3.94 बिलियन डॉलर, दिल्ली में 3.20 बिलियन डॉलर, तमिलनाडु में 1.62 बिलियन डॉलर, हरियाणा में 1.31 बिलियन डॉलर, तेलंगाना में 1.54 बिलियन डॉलर का प्रवाह रहा.

चालू वित्त वर्ष के अप्रैल-सितंबर के दौरान मॉरीशस से 5.34 बिलियन डॉलर, सिंगापुर से 7.53 बिलियन डॉलर, अमेरिका से 2.57 बिलियन डॉलर, नीदरलैंड से 3.58 बिलियन डॉलर, जापान से 1.19 बिलियन डॉलर, यूके से 188 मिलियन डॉलर, यूएई से 3.47 बिलियन डॉलर, केमैन आइलैंड्स 235 मिलियन डॉलर, साइप्रस से 808 मिलियन डॉलर और जर्मनी से 249 मिलियन डॉलर एफडीआई इक्विटी प्रवाह हुआ.

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