वैश्विक रेटिंग एजेंसी फिच ने FY26-27 के लिए भारत की आर्थिक विकास दर का अनुमान बढ़ाकर 6.9% कर दिया है. इससे पहले एजेंसी ने विकास दर 6.4% रहने का अनुमान जताया था. फिच के मुताबिक, मध्य पूर्व में युद्ध के कारण पैदा हुए वैश्विक ऊर्जा झटकों के बीच भी भारतीय अर्थव्यवस्था ने मजबूत प्रदर्शन किया है, जिसके चलते विकास दर के अनुमान में बढ़ोतरी की गई है. फिच रेटिंग्स की रिपोर्ट के अनुसार, भारत की आर्थिक वृद्धि उसके जून में जारी ग्लोबल इकोनॉमिक आउटलुक में लगाए गए अनुमान से काफी बेहतर रही है. इसी वजह से एजेंसी ने पूरे वित्त वर्ष के विकास दर अनुमान में 50 आधार अंक यानी 0.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी की है.
वित्त वर्ष 26 की विकास दर का अनुमान भी बढ़ा
रिपोर्ट के मुताबिक, अप्रैल-जून तिमाही में भारत की अर्थव्यवस्था सालाना आधार पर 7.8 प्रतिशत की दर से बढ़ी. इससे पहले की तिमाही में विकास दर बढ़कर 8.6 प्रतिशत हो गई थी. बेहतर प्रदर्शन को देखते हुए फिच ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए विकास दर का अनुमान भी अपने पहले के 7.4 प्रतिशत से बढ़ाकर 7.8 प्रतिशत कर दिया है. हालांकि, एजेंसी को उम्मीद है कि चालू वित्त वर्ष के बाकी समय में आर्थिक विस्तार की रफ्तार धीमी पड़ सकती है. पीएमआई सर्वेक्षण के अनुसार, मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर में विस्तार की गति कम हुई है. इसके अलावा, सामान्य से कम मानसूनी बारिश का असर कृषि उत्पादन और ग्रामीण मांग पर पड़ने की आशंका है.
महंगाई से घरेलू खर्च पर दबाव की आशंका
फिच की रिपोर्ट में कहा गया है कि बढ़ती महंगाई से परिवारों की वास्तविक आय और उपभोक्ता खर्च प्रभावित हो सकते हैं. एजेंसी का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2026-27 में उपभोक्ता खर्च की वृद्धि दर धीमी होकर 5.7 प्रतिशत रह सकती है, जबकि पिछले वित्त वर्ष में यह 7.2 प्रतिशत थी. रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2027-28 में भारत की जीडीपी विकास दर घटकर 6.5 प्रतिशत रहने का अनुमान है. यह एजेंसी के पिछले अनुमान से थोड़ा कम है. फिच को उम्मीद है कि इस दौरान उपभोक्ता खर्च और निवेश गतिविधियां जारी रहेंगी. वहीं, वित्त वर्ष 2028-29 में विकास दर 6.5 प्रतिशत पर बरकरार रहने का अनुमान जताया गया है.
दिसंबर तक 5.5% तक पहुंच सकती है महंगाई
महंगाई को लेकर फिच ने अनुमान जताया है कि दिसंबर 2026 तक यह बढ़कर 5.5 प्रतिशत तक पहुंच सकती है. इसी आधार पर एजेंसी का मानना है कि केंद्रीय बैंक अक्टूबर की बैठक में नीतिगत दर को 25 आधार अंक बढ़ाकर 5.5 प्रतिशत कर सकता है. रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि इसके बाद 2027 की शुरुआत में नीतिगत दर में 25 आधार अंक की एक और बढ़ोतरी की जा सकती है.
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