Fuel Excise Duty: सरकार ने पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात से जुड़े नियमों में एक बार फिर बदलाव किया है. 1 जुलाई 2026 से पेट्रोल, डीजल और विमान ईंधन (ATF) के एक्सपोर्ट पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी की नई दरें लागू हो गई हैं. इस बार पेट्रोल के निर्यात पर शुल्क बढ़ाया गया है, जबकि डीजल और एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) के निर्यात पर लगने वाली ड्यूटी में कटौती की गई है. हालांकि इस फैसले को लेकर आम उपभोक्ताओं को घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि यह बदलाव केवल उन पेट्रोलियम उत्पादों पर लागू होगा जो भारत से दूसरे देशों में निर्यात किए जाते हैं. देश के भीतर पेट्रोल पंपों पर बिकने वाले ईंधन की कीमतों पर इसका कोई सीधा असर नहीं पड़ेगा.
पेट्रोल, डीजल और ATF पर नई एक्साइज ड्यूटी
सरकार की ओर से जारी नए आदेश के अनुसार पेट्रोल के निर्यात पर एक्साइज ड्यूटी बढ़ाकर ₹4 प्रति लीटर कर दी गई है. इससे पहले यह ₹1.50 प्रति लीटर थी. वहीं डीजल के निर्यात पर ड्यूटी ₹14 प्रति लीटर से घटाकर ₹8.50 प्रति लीटर कर दी गई है. इसके अलावा विमान ईंधन यानी Aviation Turbine Fuel (ATF) के निर्यात पर लगने वाली ड्यूटी भी ₹12.50 प्रति लीटर से घटाकर ₹7.50 प्रति लीटर कर दी गई है.
क्या इस फैसले से पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ेंगे?
इस फैसले का देश में बिकने वाले पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों से कोई सीधा संबंध नहीं है. सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह एक्साइज ड्यूटी केवल निर्यात किए जाने वाले पेट्रोल, डीजल और ATF पर लागू होती है. यानी भारतीय उपभोक्ता पेट्रोल पंप पर जिस कीमत पर ईंधन खरीदते हैं, उस पर इस बदलाव का तत्काल कोई असर नहीं पड़ेगा.
यह ड्यूटी लगाई क्यों गई थी
वेस्ट एशिया में तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बनी अनिश्चितता के बीच सरकार ने 27 मार्च 2026 से पेट्रोल डीजल और ATF के निर्यात पर यह खास ड्यूटी लगाई थी. मकसद यह था कि कंपनियां तेल बाहर भेजने के बजाय देश में ही उपलब्ध रखें ताकि घरेलू बाजार में किल्लत न हो. ये दरें हर 15 दिन में अंतरराष्ट्रीय बाजार के भाव के हिसाब से घटाई और बढ़ाई जाती हैं. पेट्रोल पर ड्यूटी बढ़ना और डीजल तथा विमान ईंधन पर घटना इन्हीं भावों में हुए बदलाव को दिखाता है.
मालदीव और मॉरीशस को भी मिली छूट
सरकार ने इस संशोधन के साथ एक और महत्वपूर्ण बदलाव किया है. पेट्रोल, डीजल और ATF के निर्यात पर लगने वाली इस विशेष ड्यूटी से सरकारी तेल कंपनियों को कुछ पड़ोसी देशों के लिए पहले से छूट दी गई थी. इस सूची में नेपाल, भूटान, बांग्लादेश और श्रीलंका शामिल थे. अब सरकार ने इस सूची का विस्तार करते हुए मालदीव और मॉरीशस को भी इसमें शामिल कर लिया है. यह बदलाव 30 जून 2026 को जारी अधिसूचनाओं के माध्यम से किया गया है और नई व्यवस्था 1 जुलाई 2026 से प्रभावी हो गई है.