Gen Z Job Trends: भारत के प्रोफेशनल सर्विसेज सेक्टर में Gen Z की हिस्सेदारी तेजी से बढ़ी है, लेकिन इसके साथ कर्मचारियों को बनाए रखने की चुनौती भी बढ़ती जा रही है. मंगलवार को जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस क्षेत्र में करीब हर दो में से एक कर्मचारी सक्रिय रूप से नई नौकरी की तलाश कर रहा है, जबकि चार में से तीन कर्मचारी अगले 12 महीनों में अपनी मौजूदा कंपनी छोड़ने की योजना बना रहे हैं.
2023 के मुकाबले दोगुनी हुई Gen Z की हिस्सेदारी
ग्रेट प्लेस टू वर्क की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रोफेशनल सर्विसेज सेक्टर के कुल कार्यबल में अब Gen Z की हिस्सेदारी 34% हो गई है. 2023 में यह आंकड़ा सिर्फ 17% था. यानी महज कुछ वर्षों में इस पीढ़ी की कार्यबल में हिस्सेदारी दोगुनी हो गई है. रिपोर्ट के अनुसार, Gen Z कर्मचारियों में वेतन, पहचान और प्रमोशन के मानदंडों को लेकर अस्पष्टता को स्वीकार करने की क्षमता कम है. जब उनकी उम्मीदें पूरी नहीं होतीं, तो वे नौकरी छोड़ने का फैसला तेजी से लेते हैं.
हर दो में से एक कर्मचारी नई नौकरी की तलाश में
ग्रेट प्लेस टू वर्क की रिपोर्ट में पाया गया कि करीब हर दो में से एक कर्मचारी सक्रिय रूप से नई नौकरी तलाश रहा है. वहीं, चार में से तीन कर्मचारी अगले 12 महीनों के भीतर अपनी मौजूदा कंपनी छोड़ने की योजना बना रहे हैं. रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि कर्मचारी अपनी औपचारिक रूप से तय जिम्मेदारियों से आगे बढ़कर काम करने के लिए पहले की तुलना में कम इच्छुक हो रहे हैं. हालांकि, कार्यस्थल की बुनियादी स्थितियों में सुधार देखने को मिला है. कंपनी ने 1.1 लाख से अधिक कर्मचारियों वाले 130 से ज्यादा संगठनों के अध्ययन के बाद कहा कि कर्मचारी कार्यस्थल की भौतिक या बुनियादी सुविधाओं में मामूली सुधार को तो स्वीकार कर रहे हैं, लेकिन लंबे समय तक कंपनी के प्रति वफादारी और अतिरिक्त प्रयास के लिए जरूरी व्यापक प्रणालीगत और सांस्कृतिक बदलाव उन्हें अभी तक महसूस नहीं हुए हैं.
फ्रंटलाइन मैनेजर सबसे ज्यादा दबाव में
आंकड़ों के मुताबिक, 86 प्रतिशत फ्रंटलाइन मैनेजर और सुपरवाइजर सक्रिय रूप से नई नौकरी की तलाश कर रहे हैं. वहीं, व्यक्तिगत योगदान देने वाले कर्मचारियों में यह आंकड़ा 53 प्रतिशत है. रिपोर्ट में कहा गया कि फ्रंटलाइन मैनेजर पूरे उद्योग के लिए शॉक एब्जॉर्बर की तरह काम कर रहे हैं. वे प्रोजेक्ट पूरा करने के दबाव, ग्राहकों की मांगों और टीम की देखभाल का संयुक्त बोझ उठा रहे हैं. इसके साथ ही उनसे संगठन में होने वाले हर बदलाव को बिना किसी व्यवधान के कर्मचारियों तक पहुंचाने की भी उम्मीद की जाती है.
कंपनियों को कर्मचारियों को बनाए रखने की रणनीति बदलनी होगी
ग्रेट प्लेस टू वर्क इंडिया के प्रबंध निदेशक अक्षत शाह ने कहा, “प्रोफेशनल सर्विसेज क्षेत्र के लीडर्स को अपने कर्मचारियों की भागीदारी और उन्हें बनाए रखने के तरीकों को नए सिरे से परिभाषित करना होगा और विविध कार्यबल की व्यक्तिगत अपेक्षाओं के अनुरूप बनाना होगा.” इस रिपोर्ट से संकेत मिलता है कि प्रोफेशनल सर्विसेज सेक्टर में सिर्फ सुविधाओं में सुधार करना कर्मचारियों को लंबे समय तक कंपनी से जोड़े रखने के लिए पर्याप्त नहीं है. कर्मचारियों की अपेक्षाओं, कार्यस्थल की संस्कृति और करियर से जुड़े अवसरों पर भी ध्यान देने की जरूरत सामने आई है.
10 में से 6 कंपनियां रोजमर्रा के काम में AI का इस्तेमाल कर रहीं
रिपोर्ट में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI को लेकर भी अहम आंकड़े सामने आए हैं. करीब 10 में से 6 संगठन अपने रोजमर्रा के कामकाज में AI का इस्तेमाल कर रहे हैं. हालांकि, AI के बढ़ते इस्तेमाल के बावजूद केवल 10 में से 2 कर्मचारियों ने पूरी तरह सहमति जताई कि उन्हें इन AI टूल्स से जुड़े जोखिमों और फायदों के बारे में पर्याप्त जानकारी दी गई है. इससे पता चलता है कि कंपनियों में AI का इस्तेमाल बढ़ रहा है, लेकिन कर्मचारियों को इसके प्रभाव, जोखिम और फायदे समझाने की प्रक्रिया अभी उतनी मजबूत नहीं हुई है.
यह भी पढ़े: घटती जन्मदर से चिंतित हुआ ये देश, बच्चा पैदा करने पर 52 लाख रुपए देने का किया ऐलान