इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (आईईए) ने मंगलवार को जारी अपनी ताजा रिपोर्ट में वैश्विक तेल बाजार को लेकर गंभीर चिंता जताई है. एजेंसी के अनुसार, वर्ष 2026 की दूसरी तिमाही में कच्चे तेल की मांग में बड़ी गिरावट आने की संभावना है. रिपोर्ट में कहा गया है कि यह गिरावट कोविड महामारी के बाद ईंधन की मांग में आई भारी कमी के बाद अब तक की सबसे बड़ी गिरावट हो सकती है, जो वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए एक बड़ा संकेत है.
दूसरी तिमाही में 15 लाख बैरल प्रतिदिन तक गिर सकती है मांग
आईईए के मुताबिक, वर्ष 2026 की दूसरी तिमाही में तेल की मांग में करीब 15 लाख बैरल प्रति दिन की गिरावट का अनुमान लगाया गया है. यह गिरावट वैश्विक स्तर पर आर्थिक गतिविधियों में धीमापन, ईंधन खपत में कमी और भू-राजनीतिक तनावों के कारण देखने को मिल सकती है.
ईरान से जुड़े तनाव का वैश्विक असर
रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरान युद्ध के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार का आउटलुक बदल गया है. इसके चलते इस वर्ष तेल की कुल मांग में प्रतिदिन 80,000 बैरल की कमी आने की आशंका जताई गई है. इस प्रकार के भू-राजनीतिक तनावों का सीधा असर न केवल तेल की कीमतों पर पड़ता है, बल्कि वैश्विक आपूर्ति और मांग के संतुलन पर भी प्रभाव डालता है.
मध्य पूर्व और एशिया-प्रशांत में सबसे ज्यादा असर
आईईए के अनुसार, तेल की मांग में गिरावट मुख्य रूप से मध्य पूर्व और एशिया-प्रशांत क्षेत्रों में देखने को मिलेगी. यह कमी खास तौर पर नेफ्था, एलपीजी और जेट ईंधन की मांग में आएगी, जो उद्योग, परिवहन और विमानन क्षेत्र में व्यापक रूप से उपयोग किए जाते हैं.
आपूर्ति में व्यवधान से उत्पादन घटा
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि कच्चे तेल की आपूर्ति में व्यवधान और बुनियादी ढांचे को हुए नुकसान के कारण वैश्विक उत्पादन में गिरावट दर्ज की जा रही है. इससे बाजार में असंतुलन पैदा हो रहा है, जहां एक ओर मांग में गिरावट है, वहीं दूसरी ओर आपूर्ति भी स्थिर नहीं है, जिससे स्थिति और जटिल बन रही है.
इतिहास की सबसे बड़ी मासिक कीमत वृद्धि
तेल बाजार में आपूर्ति संकट के बाद मार्च महीने में कच्चे तेल की कीमतों में अब तक की सबसे बड़ी मासिक वृद्धि दर्ज की गई. आईईए के अनुसार, इस दौरान कच्चे तेल की कीमत 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था और विशेष रूप से आयातक देशों के लिए गंभीर चिंता का विषय है.
आयातक देशों पर बढ़ा दबाव, बाजार में असंतुलन
तेल की कीमतों में तेज उछाल के चलते आयात करने वाले देशों पर आपूर्ति सुनिश्चित करने का दबाव काफी बढ़ गया है. रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि फिजिकल मार्केट और फ्यूचर्स मार्केट के बीच कीमतों में असंतुलन देखा गया, जिससे बाजार में अनिश्चितता और बढ़ गई है.
होर्मुज जलडमरूमध्य की भूमिका बेहद अहम
आईईए ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए तेल आपूर्ति का सामान्य होना इस समय सबसे महत्वपूर्ण कारक बना हुआ है. यह मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा संभालता है, और यहां किसी भी प्रकार की रुकावट का सीधा असर पूरी दुनिया की ऊर्जा व्यवस्था पर पड़ता है.
रिजर्व का उपयोग, घट रही ऑयल इन्वेंट्री
रिपोर्ट के अनुसार, रिफाइनिंग कंपनियां और कई देश इस संकट से निपटने के लिए अपने रणनीतिक भंडार का उपयोग कर रहे हैं. इसके कारण वैश्विक स्तर पर ऑयल इन्वेंट्री में गिरावट दर्ज की जा रही है, जो आने वाले समय में और दबाव बढ़ा सकती है.
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