Goldman Sachs India GDP Growth: अंतरराष्ट्रीय बाजार से भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आई है. कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में आई गिरावट ने न केवल पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर बनी चिंता कम कर दी है, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था के लिए भी सकारात्मक संकेत दिए हैं. इसी बीच वैश्विक निवेश बैंक Goldman Sachs ने भारत की आर्थिक विकास दर के अनुमान में बढ़ोतरी कर दी है. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या आने वाले समय में आम लोगों को महंगाई और ईंधन की कीमतों से राहत मिल सकती है?
क्यों मिली राहत?
हाल के दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है. इसके साथ ही तेल की वैश्विक सप्लाई को लेकर बनी चिंता भी काफी हद तक कम हुई है. भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है. ऐसे में जब वैश्विक बाजार में क्रूड ऑयल सस्ता होता है, तो सरकार और तेल कंपनियों पर पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ाने का दबाव भी कम हो जाता है.
Goldman Sachs ने बढ़ाया भारत की GDP का अनुमान
वैश्विक निवेश बैंक Goldman Sachs ने भारत की कैलेंडर वर्ष 2026 की GDP Growth का अनुमान 6.5% से बढ़ाकर 6.8% कर दिया है. वहीं FY26-27 (FY27) के लिए भी आर्थिक विकास दर का अनुमान बढ़ाकर 6.5% कर दिया गया है. ब्रोकरेज का कहना है कि कच्चे तेल की कीमतों में कमी आने से महंगाई का दबाव घटेगा, लोगों की जेब पर बोझ कम होगा और भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी.
महंगाई पर भी पड़ेगा असर
क्रूड ऑयल की कीमतों में गिरावट का असर सिर्फ पेट्रोल और डीजल तक सीमित नहीं रहता. परिवहन लागत कम होने से खाने-पीने की वस्तुओं, रोजमर्रा के सामान और अन्य उत्पादों की लागत पर भी असर पड़ सकता है. इसी को ध्यान में रखते हुए Goldman Sachs ने भारत के लिए महंगाई का अनुमान भी पहले के मुकाबले कम किया है. इसके साथ ही करंट अकाउंट डेफिसिट का अनुमान भी घटाया गया है.
भारत को कैसे होगा फायदा?
कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से देश को कई स्तरों पर राहत मिलने की उम्मीद है.
- पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर दबाव कम होगा.
- महंगाई को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी.
- सरकार का कच्चे तेल का आयात बिल घट सकता है.
- रुपये पर दबाव कम होने की संभावना रहेगी.
क्या सस्ते होंगे पेट्रोल-डीजल?
फिलहाल तेल कंपनियों की ओर से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में किसी कटौती का ऐलान नहीं किया गया है. हालांकि एक्सपर्ट्स का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक मौजूदा स्तर पर बनी रहती हैं, तो आने वाले समय में उपभोक्ताओं को पेट्रोल-डीजल की कीमतों में राहत मिल सकती है.
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