Govt Survey on Shopping: देश में लोग हर महीने राशन, कपड़े, मोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, दवाइयों और दूसरी जरूरी चीजों पर कितना खर्च करते हैं, अब सरकार इसकी विस्तृत तस्वीर तैयार करने की तैयारी में है. इसके लिए पहली बार देशव्यापी रिटेल कंजम्पशन सर्वे कराने की योजना बनाई जा रही है. इस सर्वे का उद्देश्य लोगों की निजी जानकारी जुटाना नहीं, बल्कि यह समझना है कि देशभर में खरीदारी का पैटर्न कैसे बदल रहा है, किन वस्तुओं की मांग बढ़ रही है और किनकी बिक्री घट रही है. सरकार का मानना है कि मौजूदा आंकड़ों से रिटेल बाजार की पूरी तस्वीर सामने नहीं आ पाती, इसलिए इस सर्वे के जरिए उपभोक्ताओं के खर्च और बाजार के रुझानों को बेहतर तरीके से समझा जा सकेगा.
क्यों जरूरी है यह सर्वे?
अभी तक घरेलू खर्च से जुड़े जो आधिकारिक आंकड़े उपलब्ध हैं, उनसे यह स्पष्ट जानकारी नहीं मिल पाती कि अलग-अलग तरह की दुकानों पर कौन-कौन से उत्पाद कितनी मात्रा में बिक रहे हैं. सरकार का मानना है कि रिटेल बाजार से जुड़े विस्तृत आंकड़ों की कमी के कारण उपभोक्ताओं की बदलती पसंद और खरीदारी के रुझानों का सटीक आकलन करना आसान नहीं होता. यही वजह है कि पहली बार इस तरह का सर्वे कराने की तैयारी की जा रही है.
सर्वे में क्या-क्या जानकारी जुटाई जाएगी?
प्रस्तावित सर्वे के तहत देशभर के किराना स्टोर, कपड़ों की दुकान, मेडिकल स्टोर, इलेक्ट्रॉनिक्स शोरूम, बर्तन की दुकान और अन्य रिटेल आउटलेट्स से बिक्री से जुड़ी जानकारी जुटाई जाएगी. इसके आधार पर यह समझने की कोशिश होगी कि लोग रोजमर्रा की जरूरतों, कपड़ों, गैजेट्स, दवाइयों और अन्य उपभोक्ता वस्तुओं पर कितना खर्च कर रहे हैं. साथ ही यह भी पता लगाया जाएगा कि किन उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ रही है और किनकी बिक्री में गिरावट आ रही है.
क्या सरकार आपकी खरीदारी का हिसाब मांगेगी?
सरकार ने साफ किया है कि इस सर्वे का मकसद किसी व्यक्ति की निजी खरीदारी, बैंक डिटेल, टैक्स रिकॉर्ड या व्यक्तिगत वित्तीय जानकारी लेना नहीं है. इसका पूरा फोकस केवल रिटेल बाजार और उपभोक्ताओं के खर्च के रुझानों को समझने पर रहेगा. यानी यह देखा जाएगा कि देश में किस तरह के सामान की मांग बढ़ रही है, किन उत्पादों की खपत कम हो रही है और उपभोक्ताओं की खरीदारी की आदतों में किस तरह का बदलाव आ रहा है.
इस सर्वे से क्या होगा फायदा?
इस सर्वे के जरिए सरकार को देश की अर्थव्यवस्था और उपभोक्ता व्यवहार को बेहतर तरीके से समझने में मदद मिलेगी. यदि यह स्पष्ट हो जाता है कि लोग किन वस्तुओं पर ज्यादा या कम खर्च कर रहे हैं, तो उसी के आधार पर आर्थिक नीतियां बनाना, महंगाई का आकलन करना और रिटेल सेक्टर से जुड़े फैसले लेना आसान होगा. इसके साथ ही कारोबारियों और कंपनियों को भी बाजार की मांग समझने में मदद मिलेगी, जिससे वे उपभोक्ताओं की जरूरत के अनुसार अपने उत्पाद और व्यावसायिक रणनीति तैयार कर सकेंगे.
कब शुरू होगा सर्वे?
फिलहाल सरकार इस सर्वे का रोडमैप और प्रक्रिया तैयार कर रही है. अभी तक इसकी शुरुआत की कोई आधिकारिक तारीख घोषित नहीं की गई है. सरकार की ओर से औपचारिक घोषणा के बाद ही सर्वे शुरू किए जाने की संभावना है.

