IDBI बैंक की हिस्सेदारी बिक्री पर ब्रेक, शेयरों में करीब 16% की गिरावट

Shivam
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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सरकार द्वारा आईडीबीआई बैंक की हिस्सेदारी बिक्री (डिसइन्वेस्टमेंट) प्रक्रिया रोकने के फैसले का असर सोमवार को शेयर बाजार में साफ दिखाई दिया. हफ्ते के पहले कारोबारी दिन बैंक के शेयरों में भारी गिरावट दर्ज की गई और निवेशकों की चिंता बढ़ गई.

एनएसई पर 15 प्रतिशत से ज्यादा टूटा शेयर

सोमवार के कारोबार के दौरान खबर लिखे जाने तक दोपहर करीब 1.52 बजे आईडीबीआई बैंक का शेयर एनएसई पर 15.17 प्रतिशत गिरकर 78.20 रुपये पर पहुंच गया. वहीं शुरुआती कारोबार में यह 77.56 रुपये तक गिर गया था, जो पिछले बंद भाव 92.18 रुपये की तुलना में करीब 15.86 प्रतिशत कम था. कारोबार के दौरान शेयर 77 रुपये के इंट्राडे लो तक भी पहुंच गया.

कम बोलियां मिलने से रद्द हुई हिस्सेदारी बिक्री

रिपोर्ट्स के अनुसार सरकार ने आईडीबीआई बैंक में हिस्सेदारी बिक्री की प्रक्रिया इसलिए रद्द कर दी क्योंकि प्राप्त हुई बोलियां सरकार की उम्मीदों के अनुरूप नहीं थीं. जानकारी के मुताबिक फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स और एमिरेट्स एनबीडी की ओर से दी गई दोनों वित्तीय बोलियां तय रिजर्व प्राइस से कम थीं.

मार्च तक विजेता बोलीदाता की उम्मीद थी

सरकार ने पहले बैंक में हिस्सेदारी बेचने के लिए वित्तीय बोलियां आमंत्रित की थीं और उम्मीद जताई जा रही थी कि मार्च के अंत तक विजेता बोलीदाता की घोषणा कर दी जाएगी. हालांकि यह भी माना जा रहा था कि पूरी डील को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया चालू वित्त वर्ष के बाद तक जा सकती है.

सरकार और एलआईसी की बड़ी हिस्सेदारी बिक्री की योजना

प्रस्तावित योजना के तहत सरकार आईडीबीआई बैंक में अपनी 30.48 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने की तैयारी में थी, जिसकी मौजूदा बाजार मूल्य के आधार पर करीब 36,000 करोड़ रुपये कीमत आंकी गई थी. इसके अलावा भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) भी अपनी 30.24 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने की योजना बना रहा था. इस तरह कुल मिलाकर 60.72 प्रतिशत हिस्सेदारी बिक्री के लिए पेश की जानी थी, जिसकी संभावित कीमत करीब 72,000 करोड़ रुपये बताई गई थी.

वैश्विक हालात का भी पड़ा असर

इससे पहले कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया था कि ईरान-इजरायल तनाव के कारण वैश्विक बाजार में अनिश्चितता बढ़ी है, जिससे बड़े स्तर के डिसइन्वेस्टमेंट सौदों पर असर पड़ सकता है. इसी वजह से इस डील में देरी की संभावना भी जताई जा रही थी. मामले से जुड़े सूत्रों के मुताबिक सरकार भविष्य में परिस्थितियां अनुकूल होने पर आईडीबीआई बैंक की हिस्सेदारी बिक्री की प्रक्रिया फिर से शुरू कर सकती है.

2023 में शुरू हुई थी डिसइन्वेस्टमेंट प्रक्रिया

आईडीबीआई बैंक के डिसइन्वेस्टमेंट की प्रक्रिया 7 जनवरी 2023 को शुरू की गई थी. उस समय डिपार्टमेंट ऑफ इन्वेस्टमेंट एंड पब्लिक एसेट मैनेजमेंट (DIPAM) को संभावित निवेशकों से कई एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (EOI) प्राप्त हुए थे. 16 मार्च तक आईडीबीआई बैंक में सरकार और एलआईसी की संयुक्त हिस्सेदारी 94.71 प्रतिशत है. इसमें सरकार के पास 45.48 प्रतिशत और एलआईसी के पास 49.24 प्रतिशत हिस्सेदारी मौजूद है.

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