भारत के ऑटोमोबाइल सेक्टर में एक बार फिर तेजी देखने को मिल रही है. मजबूत घरेलू मांग के चलते यात्री वाहनों (Passenger Vehicles) की थोक बिक्री सालाना आधार पर 16 प्रतिशत बढ़कर 4.4 लाख यूनिट्स तक पहुंच गई है. तिमाही आधार पर भी इसमें 6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जो बाजार में लगातार बनी हुई मांग को दर्शाता है.
ICRA रिपोर्ट में क्या कहा गया
ICRA की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में ऑटोमोबाइल सेक्टर की ग्रोथ आगे भी जारी रहने की उम्मीद है. रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि FY27 में यात्री वाहनों की थोक बिक्री 4 से 6% तक बढ़ सकती है. इस ग्रोथ के पीछे दो बड़े कारण बताए गए हैं— पहला, GST दरों में संभावित कटौती और दूसरा, बाजार में लगातार नए मॉडलों का लॉन्च होना.
खुदरा बिक्री में जबरदस्त उछाल
रिपोर्ट के अनुसार, मार्च महीने में खुदरा बिक्री में सालाना आधार पर 21% की मजबूत वृद्धि दर्ज की गई. नए मॉडलों की बढ़ती मांग और जीएसटी दरों में बदलाव का सकारात्मक असर बाजार पर साफ नजर आ रहा है. पूरे वित्त वर्ष 2026 में खुदरा बिक्री 11% बढ़कर अब तक के उच्चतम स्तर 46 लाख यूनिट तक पहुंच गई.
पहली छमाही में गिरावट, दूसरी में जोरदार रिकवरी
जीएसटी दरों में बदलाव के बाद वित्त वर्ष 2026 की पहली छमाही में थोक बिक्री में मामूली 0.2% की गिरावट दर्ज की गई थी. हालांकि दूसरी छमाही में बाजार ने जोरदार वापसी की और 17 प्रतिशत की मजबूत ग्रोथ देखने को मिली. यह आंकड़े दिखाते हैं कि शुरुआती दबाव के बाद ऑटो सेक्टर तेजी से रिकवर हुआ है.
इन्वेंट्री में बड़ी कमी
FADA के आंकड़ों के मुताबिक, मजबूत खुदरा बिक्री के चलते डीलरों के पास वाहनों का स्टॉक काफी घट गया है. मार्च 2026 तक इन्वेंट्री का स्तर घटकर लगभग 28 दिन रह गया, जबकि मार्च 2025 में यह 52-53 दिन और सितंबर 2025 में करीब 60 दिन था. यह संकेत है कि बाजार में डिमांड सप्लाई से आगे निकल रही है.
SUV का दबदबा कायम
FY26 में यात्री वाहनों की कुल बिक्री में यूटिलिटी व्हीकल (UV) यानी SUV सेगमेंट का दबदबा बना रहा, जिसकी हिस्सेदारी 68 प्रतिशत रही. हालांकि, जीएसटी दरों में कटौती के बाद मिनी, कॉम्पैक्ट और सुपर-कॉम्पैक्ट कारों की बिक्री में भी कुछ सुधार देखने को मिला है. इसके बावजूद SUV सेगमेंट आगे भी बाजार का मुख्य ग्रोथ ड्राइवर बना रहेगा.
निर्यात में भी बढ़ोतरी
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि FY26 में यात्री वाहनों के निर्यात में 18% की वृद्धि दर्ज की गई. हालांकि यह वृद्धि थोड़ी धीमी रही, लेकिन यह संकेत देती है कि भारतीय वाहन निर्माता वैश्विक बाजारों में अपनी आपूर्ति बढ़ा रहे हैं.