वर्ष 2025 में देश के प्रमुख घरेलू संस्थागत निवेशकों ने अलग-अलग क्षेत्रों में अपनी संपत्तियों में 12 से 20% तक की बढ़त दर्ज की. इससे यह साफ होता है कि विदेशी निवेशकों की गतिविधियां कमजोर रहने के बावजूद भारतीय इक्विटी और डेट बाजारों को घरेलू निवेशकों का लगातार मजबूत सहारा मिलता रहा. आंकड़ों के मुताबिक, इस बढ़त में म्यूचुअल फंड्स की भूमिका सबसे अहम रही. शेयरों में म्यूचुअल फंड की निवेशित संपत्ति 20.6 प्रतिशत बढ़कर 52.25 लाख करोड़ रुपये पहुंच गई, जो एक साल पहले 43.34 लाख करोड़ रुपये थी. वहीं, इक्विटी और डेट दोनों को मिलाकर म्यूचुअल फंड की कुल संपत्ति 23.34 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 73.21 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गई.
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2025 में म्यूचुअल फंड्स ने खरीदे 4.88 लाख करोड़ के शेयर
आंकड़ों के अनुसार, म्यूचुअल फंड्स ने वर्ष 2025 में लगभग 4.88 लाख करोड़ रुपए के भारतीय शेयर खरीदे, जबकि पिछले साल यह आंकड़ा 4.3 लाख करोड़ रुपए था. बीमा कंपनियों और घरेलू पेंशन फंडों की इक्विटी संपत्तियों में भी वृद्धि हुई, जिसमें बीमा कंपनियों की इक्विटी संपत्ति 12.6% बढ़कर 26.81 लाख करोड़ रुपए हो गई. जबकि पेंशन फंड की इक्विटी संपत्तियों में 66% की बड़ी बढ़त देखी गई और यह 4.38 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गई. इन दोनों ने मिलकर साल भर में 1.4 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा के भारतीय शेयर खरीदे. इक्विटी और डेट को मिलाकर बीमा और पेंशन फंड्स की कुल संपत्ति में क्रमशः 12 प्रतिशत और 20 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई.
AIF और बैंकों की इक्विटी संपत्ति में तेज उछाल
यह बढ़ोतरी लगातार निवेश और नियमों में दी गई राहत का नतीजा रही. पेंशन नियामक ने दूसरे और तीसरे स्तर की परिसंपत्तियों के लिए इक्विटी निवेश की सीमा बढ़ाने की अनुमति दी, जबकि बीमा नियामक ने भी सीमित दायरे में इक्विटी निवेश को मंजूरी दी. इसके अलावा, वैकल्पिक निवेश फंडों और बैंकों की इक्विटी परिसंपत्तियों में भी तेज इजाफा देखने को मिला. वैकल्पिक निवेश फंड की इक्विटी संपत्ति में 37% और बैंकों की इक्विटी संपत्ति में 33% की बढ़त दर्ज की गई. वहीं, इक्विटी और डेट दोनों को मिलाकर इनकी कुल संपत्ति में क्रमशः 23% और 25% की वृद्धि हुई. एक्सपर्ट्स का कहना है कि वैकल्पिक निवेश फंड में बढ़ोतरी यह दिखाती है कि हाई-नेट-वर्थ वाले निवेशक और परिवार आधारित निवेश समूह बेहतर मुनाफे के लिए सोच-समझकर निवेश कर रहे हैं.
2025 में विदेशी निवेशक रहे कमजोर
इसके उलट, विदेशी निवेशकों की स्थिति कमजोर रही. विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की इक्विटी संपत्ति में केवल 4.3% की बढ़त हुई और यह 74.26 लाख करोड़ रुपए तक पहुंची. इक्विटी और डेट निवेश को मिलाकर उनकी कुल संपत्ति में सिर्फ 4.8% की बढ़ोतरी हुई और यह 81.4 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई. वर्ष 2025 के दौरान विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने करीब 1.66 लाख करोड़ रुपये के शेयरों की बिकवाली की. इसके पीछे शेयरों का ऊंचा मूल्यांकन, बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और भारतीय उत्पादों पर लगाए गए टैरिफ में बढ़ोतरी जैसे कारण रहे.
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