India Economy: भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर एक बड़ी रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें आने वाले दशक में देश की आर्थिक ताकत में जबरदस्त बढ़ोतरी का अनुमान जताया गया है. वैश्विक निवेश फर्म केकेआर की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की अर्थव्यवस्था अगले 10 वर्षों में दोगुनी होकर 8 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा की हो सकती है. रिपोर्ट में इसके पीछे लगातार किए जा रहे संरचनात्मक सुधार, बुनियादी ढांचे में निवेश और अर्थव्यवस्था के तेजी से औपचारिककरण को प्रमुख वजह बताया गया है.
रिपोर्ट के अनुसार, भारत 4 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था का आंकड़ा पार कर चुका है और मौजूदा आर्थिक रफ्तार को देखते हुए अगले एक दशक में अपनी अर्थव्यवस्था का आकार फिर से दोगुना करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है. केकेआर का मानना है कि भारत की विकास क्षमता अभी पूरी तरह इस्तेमाल नहीं हुई है और आने वाले वर्षों में देश के सामने विकास के बड़े अवसर मौजूद हैं.
एक दशक में सुधारों का दिख सकता है बड़ा असर
केकेआर ने भारत को उन चुनिंदा देशों में शामिल किया है, जहां लंबे समय तक लगातार लागू किए गए आर्थिक सुधारों का असर अब साफ दिखाई दे रहा है. रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत यह दिखाता है कि धैर्य के साथ किए गए संरचनात्मक सुधारों का असर केवल किसी एक तिमाही में नहीं, बल्कि पूरे दशक के दौरान अर्थव्यवस्था के आकार और उसकी क्षमता में बड़ा बदलाव ला सकता है.
रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2014 के बाद भारत में कई अहम आर्थिक सुधार किए गए हैं. इनमें वस्तु एवं सेवा कर यानी GST, दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता यानी IBC, श्रम बाजार का औपचारिककरण, डिजिटलीकरण और बुनियादी ढांचे के विकास में बड़े स्तर पर किया गया निवेश शामिल है. इन सुधारों ने अर्थव्यवस्था को ज्यादा व्यवस्थित और औपचारिक बनाने में भूमिका निभाई है. इसके साथ ही कारोबार करने के तरीके, टैक्स व्यवस्था, डिजिटल भुगतान और बुनियादी ढांचे में भी बड़े बदलाव देखने को मिले हैं.
11 फीसदी नॉमिनल GDP ग्रोथ का अनुमान
केकेआर के मुताबिक, मौजूदा सुधार और आर्थिक बदलाव भारत को करीब 11 फीसदी नॉमिनल GDP ग्रोथ की राह पर बनाए रखने में मदद कर सकते हैं. अगर लंबे समय तक इस तरह की वृद्धि दर बनी रहती है तो अर्थव्यवस्था के आकार में तेज बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत में पहले लागू किए जा चुके कई सुधारों का पूरा लाभ अभी अर्थव्यवस्था को मिलना बाकी है. इसका मतलब है कि देश की ग्रोथ स्टोरी को अभी अंतिम चरण में नहीं माना जा सकता. आने वाले वर्षों में इन सुधारों का असर और व्यापक रूप से दिखाई दे सकता है.
औपचारिक अर्थव्यवस्था से निवेश का माहौल मजबूत
केकेआर ने भारत की औपचारिक अर्थव्यवस्था के विस्तार को भी महत्वपूर्ण बताया है. जैसे-जैसे ज्यादा कारोबार औपचारिक आर्थिक व्यवस्था का हिस्सा बन रहे हैं, भारतीय कंपनियों और उनके कैश फ्लो से जुड़े जोखिम प्रीमियम में कमी आ रही है. इससे लंबे समय के निवेश के लिए माहौल ज्यादा अनुकूल बन सकता है. औपचारिक अर्थव्यवस्था के विस्तार से कारोबारों की पारदर्शिता बढ़ने के साथ निवेशकों के लिए कंपनियों और उनके वित्तीय प्रदर्शन को समझना भी आसान होता है.
AI भारतीय IT सेक्टर के लिए बन सकता है बड़ा अवसर
रिपोर्ट में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI को लेकर भी भारत के लिए सकारात्मक संभावनाएं बताई गई हैं. केकेआर के मुताबिक, AI भारतीय IT सर्विस इंडस्ट्री के लिए केवल चुनौती नहीं है, बल्कि यह एक बड़ा अवसर भी बन सकता है. भारतीय IT कंपनियां अपनी सेवाओं में AI का इस्तेमाल बढ़ाकर उत्पादकता में सुधार कर सकती हैं. इसके साथ ही कंपनियों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ने और नई तरह की सेवाओं के विकास की संभावना भी बन सकती है.
GCC बन रहे हैं भारत की ग्रोथ के नए इंजन
भारत में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स यानी GCC का तेजी से विस्तार भी अर्थव्यवस्था के लिए अहम माना गया है. रिपोर्ट के मुताबिक, पारंपरिक IT सेवाओं के साथ GCC सेक्टर भी तेजी से आगे बढ़ रहा है. कई बहुराष्ट्रीय कंपनियां भारत में अपने ग्लोबल ऑपरेशंस और टेक्नोलॉजी से जुड़े केंद्र स्थापित कर रही हैं. इससे भारत में हाई-वैल्यू सेवाओं, तकनीकी काम और रोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं.
GDP ग्रोथ में सर्विस सेक्टर की बड़ी भूमिका
केकेआर के अनुसार, सर्विस सेक्टर पहले से ही भारत की रियल GDP ग्रोथ में आधे से ज्यादा योगदान दे रहा है. आने वाले वर्षों में इस सेक्टर की भूमिका और मजबूत होने की संभावना है. IT सेवाओं, GCC, डिजिटल सेवाओं और दूसरे आधुनिक सर्विस सेक्टर के विस्तार के साथ भारत की आर्थिक वृद्धि में सेवाओं का योगदान आगे भी महत्वपूर्ण बना रह सकता है.
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