India Economy: 2047 तक विकसित देश बनने की राह में भारत को मिलेगी नई ताकत, AI और FTA से GDP में 170 अरब डॉलर तक बढ़ोतरी की उम्मीद

Shivam
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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India Economy: दुनिया की अर्थव्यवस्था तेजी से बदल रही है. कहीं व्यापारिक रिश्तों में बदलाव हो रहा है, तो कहीं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों में निवेश बढ़ रहा है. इस बदलते वैश्विक माहौल में भारत के लिए आर्थिक विकास के नए अवसर बन रहे हैं. ब्लूमबर्ग इकोनॉमिक्स की सोमवार को जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत अपनी विकास संबंधी बाधाओं को कम करके बहुध्रुवीय दुनिया में एक प्रमुख आर्थिक केंद्र के रूप में उभर सकता है. रिपोर्ट में अनुमान जताया गया है कि भारत का बढ़ता मुक्त व्यापार समझौता नेटवर्क 2035 तक देश की GDP में 140 अरब से 170 अरब डॉलर तक का अतिरिक्त योगदान दे सकता है. वहीं, AI का बढ़ता इस्तेमाल भारत की आर्थिक वृद्धि दर में हर साल 0.9 प्रतिशत तक की अतिरिक्त बढ़ोतरी कर सकता है.

भारत की अर्थव्यवस्था के लिए क्यों अहम है बदलती वैश्विक व्यवस्था?

ब्लूमबर्ग इकोनॉमिक्स की रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक स्तर पर पूंजी प्रवाह, व्यापारिक संबंध और औद्योगिक गतिविधियों की संरचना में तेजी से बदलाव हो रहा है. देश अब व्यापार और निवेश के फैसले लेते समय आर्थिक लाभ के साथ-साथ भू-राजनीतिक संबंधों को भी महत्व दे रहे हैं. इसी बीच, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल बढ़ रहा है और मुक्त व्यापार समझौतों का विस्तार नए निर्यात अवसर पैदा कर रहा है.

दुनिया के कई हिस्सों में शहरीकरण की गति भी तेज हो रही है. रिपोर्ट का कहना है कि इन बदलावों के बीच भारत के पास अपनी आर्थिक क्षमता बढ़ाने और वैश्विक व्यापार में मजबूत भूमिका निभाने का अवसर है. ब्लूमबर्ग इकोनॉमिक्स के मुख्य अर्थशास्त्री टॉम ऑर्लिक के मुताबिक, भारत विकास के रास्ते में मौजूद कई बाधाओं को कम करते हुए बदलती वैश्विक अर्थव्यवस्था में अपनी स्थिति मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है.

मुक्त व्यापार समझौतों से GDP को कितना फायदा हो सकता है?

रिपोर्ट के मुताबिक, भारत का विस्तार होता मुक्त व्यापार समझौता (FTA) नेटवर्क 2035 तक देश की GDP में 140 अरब से 170 अरब डॉलर तक का अतिरिक्त योगदान दे सकता है. व्यापार समझौतों के जरिए भारतीय कंपनियों को विदेशी बाजारों तक पहुंच बनाने और निर्यात के नए अवसर हासिल करने में मदद मिल सकती है. हालांकि, इन अवसरों का पूरा लाभ उठाने के लिए घरेलू स्तर पर भी सुधार जरूरी होंगे. रिपोर्ट में विनिर्माण लागत कम करने और कृषि क्षेत्र से श्रमिकों को अधिक उत्पादक क्षेत्रों में स्थानांतरित करने जैसे कदमों को अहम बताया गया है. ऐसे सुधार भारत की उत्पादन क्षमता और प्रतिस्पर्धा को मजबूत कर सकते हैं.

वैश्विक निवेश के मामले में भारत के सामने क्या चुनौती है?

रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक पूंजी प्रवाह अब पहले के मुकाबले अधिक केंद्रित और राजनीतिक प्राथमिकताओं से प्रभावित हो रहा है. प्रतिद्वंद्वी देशों के बीच पूंजी निवेश, मित्र देशों के मुकाबले लगभग 40 प्रतिशत कम है. इसके साथ ही निवेश का बड़ा हिस्सा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सेमीकंडक्टर जैसे रणनीतिक क्षेत्रों की ओर बढ़ रहा है. भारत के सामने चुनौती यह है कि वह वैश्विक निवेश आकर्षित करने की अपनी क्षमता बनाए रखे. इसके लिए उसे अमेरिकी तकनीकी क्षेत्र की मजबूत मांग और अलग-अलग देशों की ओर से दिए जा रहे निवेश प्रोत्साहनों के बीच प्रतिस्पर्धा करनी होगी.

AI से भारत की आर्थिक वृद्धि को कैसे मिलेगी ताकत?

ब्लूमबर्ग इकोनॉमिक्स की रिपोर्ट के मुताबिक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस भारत की आर्थिक वृद्धि दर में हर साल 0.9 प्रतिशत तक की अतिरिक्त बढ़ोतरी कर सकता है. AI के बढ़ते इस्तेमाल से कंपनियों की उत्पादकता बढ़ाने, कामकाज को अधिक कुशल बनाने और उच्च मूल्य वाली सेवाओं के विस्तार के अवसर मिल सकते हैं. इससे भारत के 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य को हासिल करने में भी मदद मिल सकती है. हालांकि, रिपोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि AI से मिलने वाले लाभ इस बात पर निर्भर करेंगे कि देश में इसके इस्तेमाल के लिए जरूरी बुनियादी ढांचा कितना मजबूत है.

भारत का आईटी सेवा क्षेत्र इस बदलाव से नए अवसर और चुनौतियां दोनों का सामना करेगा. AI कंपनियों को अधिक उन्नत और उच्च मूल्य वाली सेवाएं देने में मदद कर सकता है. दूसरी ओर, स्वचालन के बढ़ते इस्तेमाल से कम लागत वाले श्रम पर आधारित कारोबारी मॉडल के सामने चुनौती खड़ी हो सकती है.

भारत का शहरीकरण कैसे बढ़ा सकता है उत्पादकता?

रिपोर्ट में भारत के तेजी से बढ़ते शहरीकरण को भी आर्थिक विकास की एक बड़ी ताकत बताया गया है. इसके अनुसार, करीब 82 करोड़ भारतीय शहरी वातावरण में रहते हैं. इतनी बड़ी आबादी बेहतर रोजगार, बुनियादी सुविधाओं और उत्पादक आर्थिक गतिविधियों के विस्तार के लिए महत्वपूर्ण अवसर पैदा कर सकती है. हालांकि, शहरीकरण का पूरा लाभ हासिल करने के लिए नगर प्रशासन, बुनियादी ढांचे और भूमि उपयोग की योजना को मजबूत करना जरूरी होगा. यदि इन क्षेत्रों में सुधार होता है, तो शहरी आबादी देश की उत्पादकता बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभा सकती है.

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