नियमों को आसान करके 2035 तक 1.3 ट्रिलियन डॉलर का निर्यात कर सकता है भारत: Report

Shivam
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत संरचनात्मक सुधारों और नियमों को सरल बनाकर वर्ष 2035 तक अपने निर्यात को करीब तीन गुना बढ़ाकर 1.3 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचाने की दिशा में काम कर रहा है. इसके लिए सरकार भारी सरकारी खर्च पर निर्भर रहने के बजाय मैन्युफैक्चरिंग आधारित विकास को प्राथमिकता दे रही है.

यह रणनीति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भारत को वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में स्थापित करने के तीसरे बड़े प्रयास के तौर पर देखी जा रही है, ताकि देश अंतरराष्ट्रीय व्यापार में अपनी भूमिका और मजबूत कर सके. रिपोर्ट के अनुसार, सरकार ने इसके लिए 15 प्रमुख मैन्युफैक्चरिंग सेक्टरों की पहचान की है.

प्राथमिक मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर और वैश्विक भूमिका

इन सेक्टरों में हाई-एंड सेमीकंडक्टर, धातु, इलेक्ट्रॉनिक्स और लेदर जैसे श्रम आधारित उद्योग शामिल हैं. सरकारी अधिकारियों का मानना है कि नियमों को सरल बनाने, कागजी कामकाज कम करने और व्यापार का माहौल बेहतर करने से कंपनियां अधिक उत्पादन कर पाएंगी, निवेश बढ़ेगा और भारतीय उत्पाद वैश्विक बाजार में बेहतर तरीके से प्रतिस्पर्धा कर सकेंगे. यह पहल ऐसे समय में की जा रही है जब वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता बनी हुई है. इसके बावजूद भारत को एक स्थिर ग्रोथ इंजन के रूप में देखा जा रहा है. दुनियाभर में सप्लाई चेन पर दबाव और भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारत खुद को एक भरोसेमंद वैकल्पिक मैन्युफैक्चरिंग देश के तौर पर पेश कर रहा है.

मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में सुधार के संकेत

हालिया आंकड़ों से संकेत मिलता है कि मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर सरकार की नीतियों और सुधारों का सकारात्मक असर दिखने लगा है. फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (एफआईसीसी) यानी फिक्की के ताजा सर्वे के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही में भारत का मैन्युफैक्चरिंग प्रदर्शन अब तक के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है, जिससे उद्योगों का भरोसा और मजबूत हुआ है. फिक्की की तिमाही मैन्युफैक्चरिंग सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक, 91% कंपनियों ने अपनी उत्पादन स्थिति को बेहतर या स्थिर बताया, जबकि पिछली तिमाही में यह आंकड़ा 87 प्रतिशत था.

उद्योगों का भरोसा और वित्तीय स्थिति

उद्योग जगत का भरोसा भी लगातार बढ़ता नजर आ रहा है. सर्वे में शामिल 86 प्रतिशत कंपनियों को उम्मीद है कि उनके ऑर्डर मौजूदा स्तर पर बने रहेंगे या उनमें और सुधार होगा. इसमें हाल ही में जीएसटी दरों में की गई कटौती का भी अहम योगदान माना जा रहा है. इस सर्वे में शामिल मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों का कुल सालाना कारोबार 3 लाख करोड़ रुपये से अधिक बताया गया है. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कंपनियों की वित्तीय स्थिति सहायक बनी हुई है.

रिपोर्ट के अनुसार, मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों के लिए औसत ब्याज दर 8.9 प्रतिशत रही. वहीं, करीब 87 प्रतिशत कंपनियों ने बताया कि उन्हें अपने रोजमर्रा के कामकाज और दीर्घकालिक जरूरतों के लिए बैंकों से पर्याप्त फंडिंग मिल रही है.

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