FY26 में भारत की आर्थिक वृद्धि दर NSO के अनुमान से ज्यादा रहने की उम्मीद: Report

Shivam
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

FY26 में भारत की आर्थिक विकास दर राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) के पहले अग्रिम अनुमान से अधिक मजबूत रह सकती है. एक रिपोर्ट के मुताबिक, मॉर्गन स्टेनली ने FY26 के लिए रियल जीडीपी ग्रोथ 7.6% रहने का अनुमान जताया है, जो NSO के 7.4% के अनुमान से ज्यादा है. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इस अवधि के लिए बाजार का औसत अनुमान 7.5% है, जबकि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की भविष्यवाणी 7.3% की है.

निवेशकों के भरोसे से बढ़ेगा कैपेक्स

रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकारी खर्च और मौद्रिक नीति के समर्थन, लोगों की खरीदारी की क्षमता में सुधार और रोजगार की बेहतर स्थिति के चलते उपभोग यानी खपत में बढ़ोतरी होगी, जिससे आर्थिक सुधार को और मजबूती मिलेगी. मॉर्गन स्टेनली के मुताबिक, निवेशकों के बढ़ते भरोसे से निजी क्षेत्र का निवेश और पूंजीगत खर्च तेजी पकड़ सकता है. ऐसे में भारत की आर्थिक रफ्तार का प्रमुख सहारा घरेलू मांग बनेगी, जबकि वैश्विक स्तर पर टैरिफ और भू-राजनीतिक तनाव के चलते बाहरी मांग पर दबाव बना रह सकता है.

FY27 में भारत की ग्रोथ 6.5% रहने का अनुमान

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि FY27 में आर्थिक वृद्धि करीब 6.5% रह सकती है. ब्रोकरेज फर्म का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2026 की दूसरी छमाही में जीडीपी ग्रोथ लगभग 6.9% तक सीमित रह सकती है, जबकि पहली छमाही में यह करीब 8 प्रतिशत थी. वहीं नॉमिनल जीडीपी वृद्धि FY25 के 9.7% से घटकर वित्त वर्ष 2026 में 8% रह सकती है. रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि चालू वित्त वर्ष की दूसरी छमाही के अनुमानित आंकड़ों से संकेत मिलता है कि पहली छमाही की तुलना में खपत में कमी आ सकती है, जबकि पूंजीगत व्यय (कैपिटल एक्सपेंडिचर) में वृद्धि की उम्मीद है.

FY27 में टैक्स कलेक्शन और GDP दोनों में उछाल

एचडीएफसी बैंक की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, 27 में कर संग्रह (टैक्स कलेक्शन) में तेज बढ़ोतरी हो सकती है, जिसमें कुल टैक्स उछाल FY26 में अनुमानित 0.64 से बढ़कर 1.1 हो जाएगा. रिपोर्ट में आगे बताया गया है कि वित्त वर्ष 2027 में नॉमिनल जीडीपी वृद्धि करीब 10.1% तक पहुंच सकती है, जो FY26 के अनुमानित 8.5% से अधिक होगी. इसके साथ ही पूंजीगत व्यय में करीब 10.5% की बढ़ोतरी होकर यह 11.5 से 12 लाख करोड़ रुपये तक जाने की संभावना है, जबकि राजस्व खर्च में लगभग 9.5% की वृद्धि हो सकती है.

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