India Industrial Growth: ग्लोबल इन्वेस्टमेंट बैंक जेफरीज का मानना है कि भारत की अगली औद्योगिक क्रांति में घरेलू बाजार की भूमिका बेहद अहम रहने वाली है. रिपोर्ट के मुताबिक, स्पेस, सेमीकंडक्टर, डेटा सेंटर, इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर मैन्युफैक्चरिंग और एयरोस्पेस जैसे सेक्टर आने वाले वर्षों में तेजी से आगे बढ़ सकते हैं. सरकारी नीतियों और प्रोत्साहन से इन क्षेत्रों में निजी कंपनियों की भागीदारी भी बढ़ने की उम्मीद है.
जेफरीज के अनुसार, भारत में घरेलू मांग के साथ-साथ निजी क्षेत्र का बढ़ता निवेश और सरकार का नीतिगत समर्थन नए उद्योगों के विस्तार का आधार बन रहा है. इससे देश की घरेलू मैन्युफैक्चरिंग क्षमता मजबूत होने के साथ वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ाने में भी मदद मिल सकती है.
सरकार की नीतियों से निजी निवेश को मिल रहा बढ़ावा
जेफरीज की रिपोर्ट में उन प्रमुख नीतिगत कदमों का भी जिक्र किया गया है, जो उभरते उद्योगों को आगे बढ़ाने में मदद कर रहे हैं. इनमें निजी कंपनियों के लिए स्पेस सेक्टर खोलना, डेटा सेंटरों को टैक्स में छूट, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स और सोलर मैन्युफैक्चरिंग के लिए इंसेंटिव स्कीम तथा लोकलाइजेशन को बढ़ावा देने जैसे कदम शामिल हैं. रिपोर्ट में सरकार की ओर से GPU की खरीद जैसे प्रयासों को भी टेक्नोलॉजी और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास से जोड़कर देखा गया है.
2030 तक 40-45 अरब डॉलर का हो सकता है स्पेस सेक्टर
जेफरीज के मुताबिक, भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल है, जिनके पास अंतरिक्ष क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने की क्षमता मौजूद है. भारत ने अपने स्पेस सेक्टर को तेजी से विस्तार देने का लक्ष्य रखा है. रिपोर्ट के अनुसार, भारत का लक्ष्य 2030 तक स्पेस सेक्टर को करीब 5 गुना बढ़ाकर 40-45 अरब डॉलर तक पहुंचाना है. निजी कंपनियां भी इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही हैं. स्काईरूट, पिक्सेल और अग्निकुल जैसी कंपनियां अपने कमर्शियल ऑपरेशंस को विस्तार देने की दिशा में काम कर रही हैं.
सेमीकंडक्टर में पॉलिसी से आगे बढ़ रहा काम
सेमीकंडक्टर सेक्टर में भारत की कोशिश अब सिर्फ नीतियां बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्राउंड लेवल पर प्रोजेक्ट्स को आगे बढ़ाया जा रहा है. जेफरीज की रिपोर्ट में करीब 20 अरब डॉलर के निवेश, एक चिप फैब के निर्माण और कई OSAT प्रोजेक्ट्स में उत्पादन शुरू होने का उल्लेख किया गया है. इसके अलावा करीब 13 अरब डॉलर के एक और इंसेंटिव प्लान से देश के सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को और मजबूत किए जाने की उम्मीद है.
डेटा सेंटर क्षमता पांच साल में 5 गुना बढ़ी
भारत का डेटा सेंटर सेक्टर भी तेजी से विस्तार कर रहा है. रिपोर्ट के अनुसार, देश की डेटा सेंटर क्षमता पिछले पांच वर्षों में करीब पांच गुना बढ़कर 2 गीगावाट हो गई है. अगले पांच वर्षों में इसके 10 गीगावाट तक पहुंचने का अनुमान है. इस विस्तार से पावर, कूलिंग, कंस्ट्रक्शन और नेटवर्किंग जैसे क्षेत्रों में करीब 45 अरब डॉलर के निवेश के अवसर पैदा हो सकते हैं.
इलेक्ट्रॉनिक्स में असेंबली से आगे बढ़ रहा भारत
इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग में भी भारत अब केवल असेंबली हब बने रहने के बजाय ज्यादा घरेलू वैल्यू एडिशन और कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग पर जोर दे रहा है. जेफरीज के अनुमान के मुताबिक, अगले छह वर्षों में मोबाइल कंपोनेंट्स में घरेलू वैल्यू एडिशन 20 प्रतिशत से कम से बढ़कर करीब 50 प्रतिशत तक पहुंच सकता है. इससे भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम को और मजबूती मिलने की उम्मीद है.
सोलर मैन्युफैक्चरिंग में भारत की बड़ी छलांग
सोलर सेक्टर में भी भारत ने अपनी मैन्युफैक्चरिंग क्षमता तेजी से बढ़ाई है. रिपोर्ट के अनुसार, भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोलर PV मैन्युफैक्चरर बन गया है. फिलहाल देश में करीब 35 गीगावाट सेल मैन्युफैक्चरिंग क्षमता चालू है, जबकि लगभग 100 गीगावाट क्षमता पर काम चल रहा है. जेफरीज का अनुमान है कि 2030 तक सोलर वैल्यू चेन का करीब 90 प्रतिशत हिस्सा स्थानीय स्तर पर तैयार होने लगेगा.
एयरोस्पेस में भी भारत के लिए बढ़ रहे अवसर
किफायती मैन्युफैक्चरिंग और कुशल इंजीनियरिंग टैलेंट के कारण भारत को वैश्विक एयरोस्पेस सेक्टर में मौजूद डिमांड-सप्लाई गैप का फायदा मिल रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक, Boeing और Airbus पहले से भारत से हर साल करीब 1.4-1.6 अरब डॉलर का सामान खरीद रहे हैं. इसके अलावा भारतीय कंपनियां ग्लोबल OEM और Tier-1 कंपनियों को भी अलग-अलग एयरोस्पेस कंपोनेंट्स और उत्पादों की सप्लाई कर रही हैं.
जेफरीज के आकलन के मुताबिक, इन उभरते सेक्टर्स में बढ़ता घरेलू बाजार, सरकारी सहयोग और निजी निवेश भारत की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को नई दिशा दे सकते हैं. इससे भारत के लिए घरेलू मांग को पूरा करने के साथ वैश्विक सप्लाई चेन में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने के अवसर भी मजबूत होंगे.
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