भारत में उभर रहे 30 नए औद्योगिक और वेयरहाउसिंग हॉटस्पॉट, 2035 तक मैन्युफैक्चरिंग बूम की तैयारी

Shivam
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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गुरुवार को जारी एक नई रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत के 30 शहर औद्योगिक और वेयरहाउसिंग (गोदाम) क्षेत्र में उच्च संभावनाओं वाले प्रमुख हॉटस्पॉट के रूप में तेजी से उभर रहे हैं. इन शहरों में बुनियादी ढांचे के विस्तार, मैन्युफैक्चरिंग गतिविधियों में बढ़ोतरी और सरकारी नीतियों के समर्थन के कारण तेज विकास की उम्मीद जताई जा रही है. कुल 30 शहरों में से 8 पहले से स्थापित औद्योगिक बाजार हैं, जबकि रियल एस्टेट कंसल्टेंसी कंपनी कोलियर्स ने 22 अन्य उभरते और नए केंद्रों की पहचान की है, जिनमें भविष्य में बड़े निवेश और विस्तार की संभावना है.

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किन मानकों पर चुने गए ये शहर

रिपोर्ट में इन शहरों की पहचान सरकार द्वारा घोषित औद्योगिक हब और कंपनी के आंतरिक विश्लेषण ढांचे के आधार पर की गई है, जो पांच प्रमुख मानकों और इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं पर आधारित है. इन मानकों में रणनीतिक औद्योगिक और माल ढुलाई गलियारों के साथ बेहतर कनेक्टिविटी, आने वाले इंडस्ट्रियल स्मार्ट सिटी, प्रस्तावित मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क, समुद्री और हवाई संपर्क का विस्तार तथा बड़े एकीकृत टेक्सटाइल हब का विकास शामिल है.

मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर से मिलेगा बड़ा सहारा

वर्तमान समय में भारत का मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर देश की जीडीपी में लगभग 17 प्रतिशत का योगदान देता है. अनुमान है कि 2035 तक यह हिस्सा बढ़कर करीब 2% तक पहुंच सकता है. इसी परिदृश्य में औद्योगिक और वेयरहाउसिंग सेक्टर तेजी से उभरता हुआ क्षेत्र बन गया है. आधुनिक, तकनीकी रूप से सक्षम और कुशल गोदामों की बढ़ती मांग के साथ-साथ संस्थागत निवेश में तेजी इस क्षेत्र की विकास गति को और मजबूत बना रही है.

इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं से आएगी नई रफ्तार

कोलियर्स इंडिया के इंडस्ट्रियल और लॉजिस्टिक्स सर्विसेज के प्रबंध निदेशक विजय गणेश ने कहा कि औद्योगिक और वेयरहाउसिंग क्षेत्र की अगली विकास लहर को औद्योगिक और माल ढुलाई गलियारों के विस्तार, मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क, स्मार्ट इंडस्ट्रियल सिटी और बड़े समुद्री व हवाई अड्डा विस्तार परियोजनाओं से बल मिलेगा. हालिया बजट में घरेलू मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को बढ़ाने पर जोर देते हुए आर्थिक विकास के संतुलित वितरण को प्राथमिकता दी गई है.

निवेश और नए उद्योगों को मिलेगा बढ़ावा

गणेश ने बताया कि सिटी इकोनॉमिक रीजन (सीईआर) के लिए प्रति क्षेत्र 5,000 करोड़ रुपए के आवंटन और लाइफ साइंसेज, इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर्स, केमिकल्स, रेयर अर्थ मिनरल्स और टेक्सटाइल जैसे प्रमुख क्षेत्रों में विशेष पहल से स्थापित बाजारों में दीर्घकालिक वेयरहाउसिंग विकास को बढ़ावा मिलेगा. साथ ही, उभरते और नए बाजारों में निवेश के नए अवसर भी खुलेंगे. इन 30 पहचाने गए हाई-पोटेंशियल हॉटस्पॉट का भौगोलिक फैलाव देश के उत्तर, दक्षिण, पश्चिम, पूर्व और मध्य क्षेत्रों में संतुलित विकास को दर्शाता है.

प्राइम हब में तेज मांग का अनुमान

रिपोर्ट के मुताबिक, 8 प्राइम हब ऐसे स्थापित मांग केंद्र हैं जो आने वाले समय में और अधिक परिपक्व होंगे. ये शहर अपनी मौजूदा बढ़त बनाए रखते हुए नई औद्योगिक और वेयरहाउसिंग क्षमता को तेजी से समाहित करने में सक्षम होंगे. अनुमान है कि 2030 तक इन शीर्ष 8 शहरों में औद्योगिक और गोदाम स्पेस की मांग 50 मिलियन वर्ग फुट से अधिक पहुंच सकती है. वहीं, 12 उभरते हब औद्योगिक गलियारों, लॉजिस्टिक्स पार्कों और मल्टी-मॉडल हब के विकास के साथ आने वाले वर्षों में तेज गति से आगे बढ़ेंगे.

नवोदित हब का विकास धीमी रफ्तार से

इसके अलावा, 10 नवोदित हब ऐसे शहर हैं जहां विकास अपेक्षाकृत धीमी गति से होगा. इन क्षेत्रों की प्रगति मुख्य रूप से बुनियादी ढांचे की उपलब्धता, सरकारी नीतिगत समर्थन और निवेशकों की रुचि व तैयारी पर निर्भर करेगी.

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