India Nuclear Energy Target 2047: भारत ने ऊर्जा क्षेत्र में एक बड़ा और दीर्घकालिक लक्ष्य तय किया है. केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण के चेयरपर्सन घनश्याम प्रसाद के अनुसार, देश 2047 तक 100 गीगावाट की न्यूक्लियर ऊर्जा क्षमता हासिल करना चाहता है, जबकि वर्तमान में यह क्षमता लगभग 8.8 गीगावाट है. इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य को हासिल करने के लिए सरकार ने एक विस्तृत रणनीति और रोडमैप तैयार किया है, जिसमें कई बड़े सुधार शामिल हैं.
तैयार हो चुका है रोडमैप
राष्ट्रीय राजधानी में एक कार्यक्रम के दौरान घनश्याम प्रसाद ने कहा कि 100 गीगावाट के लक्ष्य को हासिल करने के लिए आवश्यक कदमों की विस्तृत रूपरेखा तैयार की जा चुकी है. उन्होंने स्पष्ट किया कि इस रोडमैप में विधायी सुधार एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.
कानूनी सुधारों पर जोर
उन्होंने कहा, “100 गीगावाट के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए आवश्यक कदमों की रूपरेखा तैयार करते हुए एक विस्तृत रोडमैप पहले ही तैयार किया जा चुका है, जिसमें विधायी सुधार एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं.” उन्होंने यह भी बताया कि,
“प्रमुख उपलब्धियों में से एक – शांति अधिनियम का अधिनियमन – पहले ही पूरा हो चुका है.”
हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि इस ढांचे को पूरी तरह लागू करने के लिए अभी कई नियम, प्रक्रियाएं और दिशानिर्देश तैयार किए जाने बाकी हैं.
ईंधन, स्थान और मानव संसाधन अहम
घनश्याम प्रसाद ने कहा कि न्यूक्लियर ऊर्जा क्षमता के विस्तार के लिए ईंधन सुरक्षा, सही स्थान का चयन और कुशल मानव संसाधन का विकास बेहद जरूरी होगा. इन सभी पहलुओं पर ध्यान दिए बिना इस लक्ष्य को हासिल करना मुश्किल हो सकता है.
निजी कंपनियों की एंट्री की संभावना
उन्होंने संकेत दिया कि आने वाले वर्षों में इस सेक्टर में व्यापक भागीदारी देखने को मिल सकती है. अभी न्यूक्लियर ऊर्जा उत्पादन में एक ही कंपनी का वर्चस्व है, लेकिन भविष्य में 10 से 12 कंपनियां इस क्षेत्र में प्रवेश कर सकती हैं, जिससे उत्पादन क्षमता में तेजी से वृद्धि संभव होगी.
विश्वसनीय और स्थिर ऊर्जा स्रोत
परिचालन के स्तर पर उन्होंने न्यूक्लियर ऊर्जा की विश्वसनीयता पर जोर दिया. उन्होंने कहा, “न्यूक्लियर ऊर्जा बिजली उत्पादन के सबसे सुरक्षित और स्थिर रूपों में से एक बनी हुई है, जो लंबे समय तक लगातार बिजली उपलब्ध कराती है.”
SMR टेक्नोलॉजी पर नजर
उन्होंने स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर (SMR) जैसी नई तकनीकों को लेकर भी बात की. उन्होंने कहा कि यह तकनीक अभी वैश्विक स्तर पर विकास के चरण में है, लेकिन भविष्य में स्वच्छ ऊर्जा समाधान के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है. साथ ही, इसे एक अवसर और चुनौती दोनों के रूप में देखा जा रहा है.
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