India PMI August 2026: भारत के निजी क्षेत्र की कारोबारी गतिविधियों ने अगस्त में जुलाई के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन किया है. शुक्रवार को जारी एचएसबीसी फ्लैश इंडिया पीएमआई आंकड़ों के मुताबिक, सेवा क्षेत्र में गतिविधियों और नए ऑर्डरों में सुधार के साथ विनिर्माण क्षेत्र की वृद्धि जारी रहने से निजी क्षेत्र की कुल गतिविधियों में तेजी आई. आंकड़े संकेत दे रहे हैं कि घरेलू मांग और कारोबारी गतिविधियां फिलहाल मजबूत बनी हुई हैं.
54.6 पर पहुंचा Composite PMI
एचएसबीसी फ्लैश इंडिया कंपोजिट पीएमआई आउटपुट इंडेक्स जुलाई के 54.3 से बढ़कर अगस्त में 54.6 हो गया. यह लगातार निजी क्षेत्र के विस्तार का संकेत है और बताता है कि आर्थिक गतिविधियां वृद्धि के दायरे में बनी हुई हैं. अगस्त में इस सुधार का सबसे बड़ा आधार सेवा क्षेत्र रहा. जुलाई में 53 महीनों की सबसे कमजोर वृद्धि दर्ज करने के बाद अगस्त में सेवा क्षेत्र की कारोबारी गतिविधियों और नए ऑर्डरों में फिर तेजी देखने को मिली. इससे निजी क्षेत्र की कुल गतिविधियों को मजबूती मिली.
Manufacturing पीएमआई 52.9 पर रहा
विनिर्माण क्षेत्र में भी विस्तार जारी रहा, हालांकि इसकी रफ्तार कुछ धीमी हुई है. अगस्त में एचएसबीसी फ्लैश इंडिया मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई 52.9 दर्ज किया गया. यह आंकड़ा अभी भी विनिर्माण क्षेत्र में विस्तार का संकेत देता है, लेकिन रिपोर्ट के मुताबिक पिछले वर्षों की तुलना में इसकी गति नरम रही. एचएसबीसी की मुख्य भारत अर्थशास्त्री प्रांजुल भंडारी ने भी कहा कि अगस्त में विनिर्माण क्षेत्र की वृद्धि और कमजोर हुई और यह पिछले 5 वर्षों की सबसे धीमी सुधार दर रही. हालांकि उत्पादन और नए ऑर्डरों में बढ़ोतरी जारी रही, लेकिन दोनों की गति पहले के मुकाबले धीमी रही.
नए ऑर्डर और एक्सपोर्ट डिमांड में मजबूती
रिपोर्ट के अनुसार, अगस्त में भारतीय कंपनियों को नए ऑर्डरों में पहले की तुलना में कुछ ज्यादा बढ़ोतरी मिली. निर्यात ऑर्डरों में भी मजबूत वृद्धि बनी रही. कंपनियों ने अमेरिका, जर्मनी, चीन, सिंगापुर और जापान जैसे प्रमुख बाजारों से मांग मजबूत रहने की जानकारी दी. हालांकि, विनिर्माण और सेवा दोनों क्षेत्रों में निर्यात वृद्धि की रफ्तार जुलाई के मुकाबले कुछ धीमी रही. इसके बावजूद विदेशी मांग भारतीय कंपनियों के लिए महत्वपूर्ण सहारा बनी हुई है.
जून 2025 के बाद रोजगार सृजन सबसे तेज स्तर पर
रोजगार के मोर्चे पर अगस्त के आंकड़े सकारात्मक रहे. निजी क्षेत्र में नौकरी सृजन की गति जून 2025 के बाद संयुक्त रूप से सबसे तेज स्तर पर पहुंच गई. इसमें सेवा क्षेत्र की भूमिका सबसे बड़ी रही. बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए कंपनियों ने ज्यादा कर्मचारियों की नियुक्ति की, जिससे रोजगार के मोर्चे पर गतिविधियां मजबूत हुईं. एचएसबीसी की मुख्य भारत अर्थशास्त्री प्रांजुल भंडारी ने कहा कि कुल निजी क्षेत्र उत्पादन वृद्धि लगभग स्थिर बनी रही, जिसे सेवा क्षेत्र की बेहतर गतिविधियों से समर्थन मिला.
इनपुट लागत का दबाव हुआ कम
अगस्त में कंपनियों को लागत के मोर्चे पर भी कुछ राहत मिली. इनपुट लागत का दबाव कम हुआ और कुल लागत मुद्रास्फीति पिछले सात महीनों के निचले स्तर पर पहुंच गई. हालांकि, कई कंपनियों ने बढ़ी हुई लागत का कुछ हिस्सा ग्राहकों पर डालना जारी रखा. इसके चलते बिक्री कीमतों में बढ़ोतरी की दर अप्रैल के बाद के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई.
कंपनियों का कारोबारी भरोसा बढ़ा
आने वाले एक साल को लेकर कंपनियों का कारोबारी भरोसा भी जुलाई के मुकाबले बेहतर हुआ है. कंपनियों को उम्मीद है कि बाजार की परिस्थितियां मजबूत होंगी और मांग में सुधार जारी रहेगा. यह सकारात्मक धारणा विनिर्माण और सेवा, दोनों क्षेत्रों में देखने को मिली है. रिपोर्ट के मुताबिक, विनिर्माण क्षेत्र में खरीद गतिविधियों में भी बढ़ोतरी हुई, जो नए ऑर्डरों की बढ़ती मात्रा के अनुरूप रही. इससे संकेत मिलता है कि कंपनियां भविष्य की मांग को देखते हुए अपनी उत्पादन क्षमता बनाए रखने की तैयारी कर रही हैं.
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