भारत के रियल एस्टेट जमीन सौदों में 32% उछाल; 2025 में हुए 54,818 करोड़ रुपए के डील्स

Shivam
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

India Real Estate Land Deals 2025: भारत के रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश और विस्तार की रफ्तार लगातार तेज होती जा रही है. ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में जमीन अधिग्रहण में जबरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो डेवलपर्स के बढ़ते भरोसे और बाजार में बनी मजबूत मांग का संकेत देती है. रियल एस्टेट कंसल्टेंसी JLL की रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में जमीन अधिग्रहण में पिछले साल के मुकाबले 32 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई.

इस दौरान डेवलपर्स ने 149 सौदों के जरिए कुल 3,093 एकड़ जमीन खरीदी, जिसकी कुल कीमत 54,818 करोड़ रुपए रही. रिपोर्ट के मुताबिक, इस जमीन पर अगले 2 से 5 वर्षों में करीब 229 मिलियन स्क्वायर फीट निर्माण किया जा सकता है, जो रियल एस्टेट सेक्टर में दीर्घकालिक विकास की संभावनाओं को दर्शाता है.

टियर-1 और टियर-2 शहरों में असंतुलन

रिपोर्ट में निवेश के असंतुलन की ओर भी इशारा किया गया है. टियर-1 शहरों में कुल निवेश का 89 प्रतिशत हिस्सा गया, जबकि जमीन का हिस्सा केवल 52% रहा. इसके विपरीत, टियर-2 शहरों में 48% जमीन के सौदे हुए, लेकिन उन्हें सिर्फ 11% निवेश मिला. यह दर्शाता है कि टियर-2 शहरों में जमीन सस्ती है और वहां भविष्य में बड़े निवेश की संभावनाएं मौजूद हैं. जमीन खरीद की यह रफ्तार 2026 में भी बनी हुई है. साल की पहली तिमाही में ही प्रमुख बाजारों में करीब 900 एकड़ जमीन खरीदी गई, जिसकी कुल कीमत लगभग 18,000 करोड़ रुपए रही. मुंबई महानगर क्षेत्र में सबसे बड़ा सौदा हुआ, जहां 11 एकड़ जमीन 5,400 करोड़ रुपए में खरीदी गई.

भारी निवेश और फंडिंग की जरूरत

इन जमीनों पर निर्माण के लिए 92,000 करोड़ रुपए से ज्यादा के निवेश की जरूरत होगी. इसमें से 52,000 करोड़ रुपए से अधिक बाहरी फंडिंग की आवश्यकता पड़ सकती है. रिपोर्ट के अनुसार, इससे वैकल्पिक निवेश फंड (AIF), प्राइवेट क्रेडिट कंपनियों और बड़े निवेशकों की भागीदारी बढ़ सकती है.

बड़े शहरों में प्रोजेक्ट महंगे होने और प्रीमियम रियल एस्टेट की मांग अधिक होने के कारण, टियर-1 शहरों में आने वाले प्रोजेक्ट्स के लिए लगभग 89 प्रतिशत पूंजी की जरूरत होगी.

रिहायशी प्रोजेक्ट्स का दबदबा

रियल एस्टेट सेक्टर में रिहायशी प्रोजेक्ट्स सबसे बड़ी ताकत बने हुए हैं. कुल जमीन का 78 प्रतिशत हिस्सा इन्हीं के लिए इस्तेमाल हुआ, जबकि कुल फंडिंग का लगभग 76 प्रतिशत भी इसी सेगमेंट में गया. इन प्रोजेक्ट्स की निर्माण लागत 72,000 करोड़ रुपए से ज्यादा आंकी गई है, जो इस सेक्टर की मजबूत मांग को दर्शाता है.

ऑफिस प्रोजेक्ट्स के लिए करीब 8,700 करोड़ रुपए के निवेश की जरूरत का अनुमान है, जिससे यह साफ है कि ग्रेड-ए ऑफिस स्पेस की मांग अभी भी बनी हुई है. इसके अलावा डेवलपर्स अब डेटा सेंटर, लॉजिस्टिक्स पार्क और अन्य वैकल्पिक रियल एस्टेट सेक्टर में भी नए अवसर तलाश रहे हैं.

जमीन बेचने वालों का ट्रेंड

रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि ज्यादातर जमीन व्यक्तिगत मालिकों ने बेची, जिनका कुल सौदों में 65 प्रतिशत हिस्सा रहा. चेन्नई, मुंबई, बेंगलुरु और पुणे जैसे शहरों में व्यक्तिगत विक्रेता ज्यादा सक्रिय रहे, जबकि हैदराबाद में कॉरपोरेट कंपनियां आगे रहीं. दिल्ली-एनसीआर में ज्यादातर सौदे सरकारी संस्थाओं द्वारा किए गए.

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