India Seafood Export: FY26 में 72,000 करोड़ रुपए से अधिक रहा भारत का सीफूड निर्यात, फ्रोजन झींगों की मांग बढ़ी

Shivam
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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India Seafood Export FY26: भारत के समुद्री उत्पाद निर्यात क्षेत्र ने FY26 में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है. वैश्विक बाजार में बढ़ती मांग और विविध निर्यात रणनीति के चलते देश का सीफूड निर्यात रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है. ताजा आंकड़े बताते हैं कि भारत न केवल वॉल्यूम के मामले में मजबूत बना हुआ है, बल्कि वैल्यू के लिहाज से भी नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है.

रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा निर्यात

मरीन प्रोडक्ट्स एक्सपोर्ट डेवलपमेंट अथॉरिटी द्वारा जारी प्रोविजनल डेटा के अनुसार, FY26 में भारत का कुल सीफूड निर्यात बढ़कर 72,325.82 करोड़ रुपये यानी 8.28 अरब डॉलर पर पहुंच गया. वॉल्यूम के लिहाज से भी निर्यात 19.32 लाख मीट्रिक टन रहा, जो इस सेक्टर की लगातार बढ़ती क्षमता और वैश्विक मांग को दर्शाता है.

झींगा निर्यात का दबदबा कायम

भारत के सीफूड निर्यात में फ्रोजन झींगों की हिस्सेदारी सबसे अधिक रही. कुल निर्यात में झींगों का योगदान 47,973.13 करोड़ रुपये यानी 5.51 अरब डॉलर रहा. मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के अनुसार, झींगा निर्यात की वॉल्यूम में 4.6% और वैल्यू में 6.35% की वृद्धि हुई है. इससे यह साफ होता है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय झींगों की मांग लगातार मजबूत बनी हुई है.

निर्यात बाजारों का बदलता संतुलन

अमेरिका भारत का सबसे बड़ा निर्यात गंतव्य बना रहा, जहां 2.32 अरब डॉलर का निर्यात किया गया. हालांकि, यहां वॉल्यूम में 19.8% और वैल्यू में 14.5% की गिरावट दर्ज की गई, जिसका मुख्य कारण टैरिफ और व्यापारिक दबाव माना जा रहा है.

इसके विपरीत, अन्य बाजारों में जबरदस्त तेजी देखने को मिली.

  • चीन को निर्यात में वैल्यू 22.7 प्रतिशत और वॉल्यूम 20.1% बढ़ा.
  • यूरोपीय संघ में वैल्यू 37.9% और वॉल्यूम 35.2% की तेज वृद्धि दर्ज की गई.
  • दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों में वैल्यू 36.1% और वॉल्यूम 28.2% से अधिक बढ़ा.

जापान को निर्यात मूल्य में 6.55% की वृद्धि हुई, जबकि पश्चिम एशिया में 0.55 प्रतिशत की हल्की गिरावट देखी गई, जिसका कारण क्षेत्रीय अस्थिरता बताया गया है.

अन्य उत्पादों में भी तेजी

झींगों के अलावा फ्रोजन मछली, स्क्विड, कटलफिश, सूखे समुद्री उत्पाद और जीवित उत्पादों के निर्यात में भी सकारात्मक वृद्धि दर्ज की गई. सुरिमी, फिशमील और फिश ऑयल जैसे उत्पादों के निर्यात में भी सुधार देखने को मिला. हालांकि, कुछ ठंडे उत्पादों की श्रेणी में गिरावट दर्ज की गई है.

प्रमुख बंदरगाहों की अहम भूमिका

भारत के सीफूड निर्यात में शीर्ष पांच बंदरगाहों की महत्वपूर्ण भूमिका रही. विशाखापत्तनम, जेएनपीटी, कोच्चि, कोलकाता और चेन्नई बंदरगाहों का कुल निर्यात मूल्य में लगभग 64 प्रतिशत योगदान रहा. यह दर्शाता है कि देश की समुद्री निर्यात आपूर्ति श्रृंखला इन प्रमुख लॉजिस्टिक हब्स पर काफी हद तक निर्भर है.

सरकार की पहल और भविष्य की दिशा

सरकार ने मत्स्य पालन और जलीय कृषि क्षेत्र को मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए हैं. इनमें मूल्य श्रृंखला का आधुनिकीकरण, इंफ्रास्ट्रक्चर विकास और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए लक्षित योजनाएं शामिल हैं. इन प्रयासों का उद्देश्य भारत को वैश्विक सीफूड बाजार में और अधिक प्रतिस्पर्धी बनाना है.

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