FY27 में बढ़ेगा भारत का कर संग्रह, टैक्स उछाल 1.1 तक पहुंचने का अनुमान: HDFC Bank रिपोर्ट

Shivam
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

एक रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 27 में भारत का कर संग्रह बढ़ने की संभावना है, वहीं सकल कर उछाल (Tax Buoyancy) बढ़कर 1.1 तक पहुंच सकता है, जो FY26 में 0.64 रहा था. यह जानकारी बुधवार को जारी एक रिपोर्ट में सामने आई है. एचडीएफसी बैंक की रिपोर्ट में कहा गया है कि नॉमिनल जीडीपी ग्रोथ वित्त वर्ष 27 में 10.1% रहने का अनुमान है, जबकि वित्त वर्ष 26 में यह 8.5% रहने की संभावना जताई गई है.

रिपोर्ट में आगे बताया गया है कि सरकार का पूंजीगत खर्च (कैपेक्स) FY27 में 10.5% की बढ़ोतरी के साथ 11.5 से 12 लाख करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच सकता है, जबकि इसी अवधि में राजस्व खर्च करीब 9.5% बढ़कर 41.9 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है.

FY26 में 4.4% घाटा लक्ष्य हासिल करने की उम्मीद

सरकार वित्त वर्ष 26 के लिए निर्धारित 4.4% के राजकोषीय घाटे का लक्ष्य प्राप्त कर सकती है. घाटा लगभग 15.79 लाख करोड़ रुपए रहने का अनुमान है, जबकि बजट अनुमान 15.69 लाख करोड़ रुपए था. रिपोर्ट में कहा गया कि आने वाले केंद्रीय बजट 2026-27 में राजकोषीय समेकन जारी रहेगा, जिसमें FY27 के लिए 4.2 प्रतिशत का लक्ष्य रखा जा सकता है, जबकि FY26 में यह 4.4% था. रिपोर्ट में आने वाले बजट में डेट/जीडीपी रेश्यो 55.1% रहने का अनुमान है, जबकि वित्त वर्ष 26 के लिए जारी किए बजट अनुमान में यह 56.1% था.

FY27 में OMO खरीद बढ़ने और यील्ड ऊंची रहने का अनुमान

सरकारी बॉन्ड की अधिक आपूर्ति के चलते मांग और आपूर्ति के बीच असंतुलन बना रहने की संभावना है. इसके परिणामस्वरूप FY27 में करीब 4 से 4.5 लाख करोड़ रुपये तक की ओपन मार्केट ऑपरेशन (OMO) खरीदारी की गुंजाइश बन सकती है. वहीं, 10 साल की सरकारी बॉन्ड यील्ड के 6.5 से 6.7% के दायरे में ऊंचे स्तर पर बने रहने का अनुमान है. एक थिंक टैंक फोरम की हालिया रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि आगामी आम बजट में पीक डायरेक्ट टैक्स दरों को स्थिर रखने, तकनीक के माध्यम से डायरेक्ट टैक्स बेस का विस्तार करने, एमआरपी-आधारित टैक्सेशन से बचने और जीएसटी क्रेडिट चेन को पूरा करने को प्राथमिकता दी जानी चाहिए.

इसके साथ ही रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि टैक्स न्यूट्रैलिटी को बहाल करने और उद्योग जगत पर पड़ने वाली कैस्केडिंग लागत को कम करने के लिए पेट्रोलियम, बिजली और अन्य बाहर रखे गए इनपुट्स को जीएसटी के दायरे में लाने के लिए एक चरणबद्ध रोडमैप पेश किया जाना चाहिए.

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