भारतीय परिवार बन रहे निवेशक, बैंकों में जमा राशि में भारी बढ़ोतरी: SBI Report

Shivam
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

FY15 से 2025 के बीच भारतीय बैंकों की जमा राशि और कर्ज में करीब तीन गुना का इजाफा हुआ है. इससे साफ संकेत मिलता है कि देश का बैंकिंग सिस्टम पहले से कहीं अधिक मजबूत हुआ है और कर्ज देने की रफ्तार दोबारा तेज हुई है. यह जानकारी सोमवार को जारी SBI रिसर्च की एक रिपोर्ट में सामने आई है. रिपोर्ट के अनुसार, इस 10 साल की अवधि में बैंकों में जमा रकम 85.3 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 241.5 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई है. वहीं, बैंकों द्वारा दिया गया कुल कर्ज 67.4 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 191.2 लाख करोड़ रुपये हो गया है. इसके साथ ही बैंकों की कुल संपत्ति का अनुपात देश की जीडीपी के मुकाबले बढ़कर 94% हो गया है, जो पहले 77% के स्तर पर था.

भारत में बचत से निवेश की ओर रुझान

इससे पता चलता है कि देश की वित्तीय स्थिति और बैंकिंग प्रणाली मजबूत हुई है. रिपोर्ट के अनुसार, देश के कई राज्यों में अब परिवार सिर्फ बचत ही नहीं कर रहे, बल्कि निवेश की ओर भी रुख करने लगे हैं. गुजरात, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक जैसे राज्यों में बैंक में जमा राशि का एक हिस्सा तेजी से शेयर बाजार और अन्य वित्तीय बाजारों की ओर जा रहा है. लंबी अवधि को देखें तो वित्त वर्ष 2005 से 2025 के बीच भारतीय बैंकों की जमा राशि 18.4 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 241.5 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई है. इसी दौरान बैंकों द्वारा दिया गया कुल कर्ज भी 11.5 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 191.2 लाख करोड़ रुपये हो गया.

कर्ज देने में आगे निकले बैंक

यह आंकड़े बताते हैं कि देश की बैंकिंग प्रणाली का दायरा बीते दो दशकों में काफी बड़ा हो गया है. हालांकि, रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि कर्ज देने की रफ्तार, जमा की तुलना में ज्यादा तेज रही है. इसी वजह से कर्ज-जमा अनुपात वित्त वर्ष 2021 में 69% से बढ़कर FY25 में 79% के स्तर पर पहुंच गया है. रिपोर्ट के मुताबिक, सरकारी बैंक भी धीरे-धीरे फिर से ज्यादा कर्ज देने लगे हैं. पहले कुछ वर्षों में उनका हिस्सा कम हो गया था, लेकिन अब उनकी आर्थिक स्थिति सुधर रही है और वे ज्यादा कर्ज देने को तैयार हैं. FY26 की पहली छमाही में बैंकों में नई जमा राशि 8.6 लाख करोड़ रुपए से घटकर 8.1 लाख करोड़ रुपए रह गई, जबकि इस दौरान कर्ज बढ़कर 7.6 लाख करोड़ रुपए हो गया.

FY26 में सरकारी बैंकों का मुनाफा और बढ़ेगा

एक अन्य रिपोर्ट में बताया गया है कि सरकारी बैंकों का मुनाफा बढ़ने के पीछे ब्याज से होने वाली कमाई, सरकारी बॉन्ड से लाभ और खुदरा तथा छोटे कारोबारियों को दिए गए कर्ज की अहम भूमिका रही है. रिपोर्ट के मुताबिक FY26 की दूसरी छमाही में बैंकों की कमाई और मजबूत होने की उम्मीद है. त्योहारी सीजन के दौरान बढ़ी हुई मांग, कर्ज वितरण में तेजी, कम कैश रिजर्व रेशियो (CRR) की जरूरत से मिलने वाला फायदा और असुरक्षित व एमएफआई सेगमेंट में डिफॉल्ट मामलों का धीरे-धीरे सामान्य होना बैंकों के मुनाफे को सहारा देगा.

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