भारतीय निवेशकों के लिए जल्द ही वैश्विक शेयर बाजारों में निवेश करना और आसान होने वाला है. वे दुनिया के करीब 30 प्रमुख स्टॉक मार्केट में शेयरों की खरीद-फरोख्त कर सकेंगे और उनकी पहुंच अमेरिका, यूके, जापान और यूरोप जैसे विकसित बाजारों तक होगी. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) की सहयोगी कंपनी NSE इंटरनेशनल एक्सचेंज (IX) अपने हाल ही में शुरू किए गए ग्लोबल इन्वेस्टिंग प्लेटफॉर्म का अगले तीन से छह महीनों में विस्तार करने की तैयारी में है.
जी7 देशों के बाजार भी होंगे शामिल
एनएसई आईएक्स के प्रबंध निदेशक और सीईओ वी बालासुब्रमण्यम ने कहा कि एक्सचेंज वर्तमान में अमेरिकी शेयरों में ट्रेडिंग की अनुमति देता है और अधिक अंतरराष्ट्रीय बाजारों को जोड़ने के लिए काम कर रहा है. उन्होंने कहा कि यूरोप, जापान और यूनाइटेड किंगडम सहित कई जी7 देशों को शामिल करने के लिए बातचीत चल रही है. एनएसई आईएक्स ग्लोबल एक्सेस प्लेटफॉर्म भारतीय निवेशकों को पूरी तरह से डिजिटल ऑनबोर्डिंग प्रक्रिया के माध्यम से विदेशी शेयरों में निवेश करने में सक्षम बनाता है.
डीमैट की जरूरत नहीं, तेज सेटलमेंट
इस प्लेटफॉर्म पर ट्रेडिंग के लिए निवेशकों को डीमैट खाते की जरूरत नहीं होगी. एक्सचेंज टी+1 सेटलमेंट साइकिल का पालन करता है, यानी किसी भी लेनदेन का निपटान एक कारोबारी दिन के भीतर पूरा हो जाएगा. इसके साथ ही, एक्सचेंज ने कर और लागत से जुड़े कई लाभ भी बताए हैं. गैर-निवासियों के लिए शून्य स्टांप शुल्क, शून्य सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) और शून्य कैपिटल गेन टैक्स जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी.
डॉलर में ट्रेडिंग और लंबी ट्रेडिंग विंडो
इस प्लेटफॉर्म पर सभी ट्रेडिंग अमेरिकी डॉलर में होगी, यानी ट्रेड, मार्जिन और सेटलमेंट सभी USD में किए जाएंगे. इससे हर लेनदेन पर अलग-अलग करेंसी कन्वर्जन की जरूरत खत्म हो जाएगी. रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रेडिंग विंडो रोजाना दो सत्रों में कुल 21 घंटे तक खुली रहेगी, जिससे निवेशक एशिया, यूरोप और अमेरिका के बाजारों में चल रही गतिविधियों का पूरा लाभ उठा सकेंगे.
एक ही नियामक के तहत निगरानी
प्लेटफॉर्म पर सभी लेनदेन एक ही प्राधिकरण, अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र प्राधिकरण द्वारा विनियमित होंगे, जो भारत के अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्रों के संचालन की देखरेख करता है.