IT Stocks Crash: वैश्विक टेक्नोलॉजी सर्विसेज कंपनी एक्सेंचर द्वारा अपने राजस्व वृद्धि अनुमान में कटौती किए जाने और मांग में कमजोरी के संकेत मिलने के बाद शुक्रवार को भारतीय आईटी शेयरों में भारी बिकवाली देखने को मिली. इसका असर निफ्टी आईटी इंडेक्स पर साफ दिखाई दिया, जो शुरुआती कारोबार में 6 प्रतिशत से अधिक टूट गया. एक्सेंचर के कमजोर आउटलुक ने वैश्विक तकनीकी खर्च में सुधार की रफ्तार को लेकर निवेशकों की चिंताओं को फिर बढ़ा दिया है, जिसके चलते पूरे आईटी सेक्टर पर दबाव बन गया.
निफ्टी आईटी इंडेक्स में 6 फीसदी से ज्यादा की गिरावट
शुक्रवार के शुरुआती कारोबार में निफ्टी आईटी इंडेक्स 6.43 प्रतिशत यानी 1,831 अंक गिरकर 26,634.50 के दिन के निचले स्तर तक पहुंच गया. यह शुरुआती कारोबार में सबसे खराब प्रदर्शन करने वाला सेक्टोरल इंडेक्स रहा. हालांकि बाद में कुछ रिकवरी देखने को मिली, लेकिन खबर लिखे जाने तक इंडेक्स 5 प्रतिशत से अधिक यानी करीब 1,500 अंक टूटकर 26,956.90 के स्तर पर कारोबार कर रहा था.
इंफोसिस, TCS और टेक महिंद्रा में तेज गिरावट
आईटी शेयरों में बिकवाली का सबसे ज्यादा असर इंफोसिस पर देखने को मिला, जिसके शेयर 7.4 प्रतिशत तक टूट गए. इसके अलावा टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) में 5.9 प्रतिशत, टेक महिंद्रा में 4.5 प्रतिशत और एचसीएल टेक में 4 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई. वहीं अन्य आईटी कंपनियों के शेयर भी दबाव में रहे. पर्सिस्टेंट सिस्टम्स के शेयर करीब 5 प्रतिशत टूट गए, जबकि एलटीआईमाइंडट्री में 4 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई. कोफोर्ज लगभग 4 प्रतिशत और विप्रो 3 प्रतिशत से ज्यादा फिसल गया.
मिडकैप आईटी शेयरों पर भी पड़ा असर
बिकवाली का असर केवल बड़ी आईटी कंपनियों तक सीमित नहीं रहा. बीएसई मिडकैप इंडेक्स में शामिल केपीआईटी टेक्नोलॉजीज, टाटा एल्क्सी, हेक्सावेयर टेक्नोलॉजीज और एलएंडटी टेक्नोलॉजी सर्विसेज जैसे शेयर भी सबसे ज्यादा नुकसान उठाने वालों में शामिल रहे. इन कंपनियों के शेयरों में भी तेज गिरावट देखने को मिली.
एक्सेंचर के आउटलुक ने बढ़ाई चिंता
बाजार में कमजोरी की मुख्य वजह एक्सेंचर के शेयरों में रातोंरात आई भारी गिरावट रही. वैश्विक परामर्श और टेक्नोलॉजी सर्विसेज कंपनी एक्सेंचर ने वित्त वर्ष 2026 के लिए अपने राजस्व वृद्धि अनुमान को घटा दिया. इसके बाद भारतीय आईटी कंपनियों की अमेरिकी डिपॉजिटरी रसीदों (ADR) में भी बिकवाली बढ़ गई. एक्सेंचर के शेयर रातोंरात करीब 18 प्रतिशत टूट गए. वहीं इंफोसिस के ADR लगभग 10 प्रतिशत और विप्रो के ADR 3 प्रतिशत से अधिक गिर गए.
तीसरी तिमाही के नतीजों के बाद बढ़ा दबाव
कंपनी ने अपनी तीसरी तिमाही में 18.7 अरब डॉलर का राजस्व दर्ज किया. हालांकि ग्राहक खर्च में बनी हुई अनिश्चितता और पश्चिम एशिया की घटनाओं से जुड़े राजस्व दबाव के कारण कंपनी ने पूरे वर्ष के लिए अपने विकास अनुमान को कम कर दिया. इसके अलावा नई बुकिंग्स भी पिछले वर्ष की तुलना में कमजोर रहीं, जिससे निवेशकों की चिंता और बढ़ गई.
विशेषज्ञों ने क्या कहा?
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि एक्सेंचर के कमजोर अनुमान ने भारतीय आईटी कंपनियों के ADR में बिकवाली को बढ़ावा दिया है. हालांकि उनका मानना है कि मौजूदा गिरावट के बाद निचले स्तरों पर कुछ खरीदारी देखने को मिल सकती है क्योंकि कई आईटी शेयरों का मूल्यांकन अब पहले की तुलना में अधिक आकर्षक दिखाई दे रहा है. इसके बावजूद विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि आने वाले समय में कंपनियों के आय अनुमान लगातार घटते रहे तो आईटी सेक्टर पर दबाव बना रह सकता है. उनका यह भी कहना है कि हालिया गिरावट के बावजूद भारतीय आईटी कंपनियों का मूल्यांकन अभी भी एक्सेंचर की तुलना में अधिक बना हुआ है. एक्सेंचर फिलहाल अगले एक वर्ष की अनुमानित आय के लगभग नौ गुना मूल्यांकन पर कारोबार कर रहा है.
सेंसेक्स और निफ्टी पर भी दिखा असर
आईटी शेयरों में आई भारी बिकवाली का असर व्यापक बाजार पर भी देखने को मिला. सुबह के कारोबार में सेंसेक्स 700 अंकों से अधिक गिर गया, जबकि निफ्टी करीब 200 अंक टूटकर 24,000 के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे फिसल गया. गौरतलब है कि इस सप्ताह की शुरुआत में भी अमेरिकी फेडरल रिजर्व के संकेतों के बाद आईटी सेक्टर दबाव में था. फेड ने संकेत दिए थे कि ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रह सकती हैं, जिससे वैश्विक आईटी शेयरों को लेकर निवेशकों की धारणा कमजोर हुई थी. पिछले एक वर्ष में निफ्टी आईटी इंडेक्स 38,600 के स्तर से लगभग 30 प्रतिशत गिर चुका है.