मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच भारत के लिए राहत की खबर सामने आई है. कुकिंग गैस (LPG) लेकर आ रहे दो भारतीय जहाज सुरक्षित रूप से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजर रहे हैं और अगले कुछ दिनों में भारत पहुंचने की उम्मीद है. इन जहाजों के पहुंचने से देश में एलपीजी की सप्लाई को लेकर बनी चिंता कुछ हद तक कम हो सकती है.
कौन-कौन से जहाज आ रहे हैं?
शिप-ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक, ‘जग वसंत’ और ‘पाइन गैस’ नाम के दो भारतीय जहाज होर्मुज स्ट्रेट से गुजर रहे हैं. ये दोनों जहाज लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) लेकर आ रहे हैं, जिसका इस्तेमाल भारत में बड़े पैमाने पर खाना पकाने के लिए किया जाता है.
यूएई से शुरू हुई यात्रा
दोनों जहाजों ने सोमवार सुबह अपनी यात्रा शुरू की. ये यूएई तट से रवाना होकर ईरान के पास केशम और लारक द्वीपों के आसपास के इलाके तक पहुंच चुके हैं. सुरक्षा कारणों को देखते हुए जहाजों ने अपने ट्रैकिंग सिस्टम में भारतीय स्वामित्व का संकेत भी दिखाया है, ताकि संवेदनशील समुद्री रास्ते से गुजरने में आसानी हो सके.
14 घंटे में पार होता है होर्मुज स्ट्रेट
रिपोर्ट्स के मुताबिक, होर्मुज स्ट्रेट को पार करने में लगभग 14 घंटे का समय लगता है. यदि यात्रा बिना किसी बाधा के जारी रहती है, तो इन जहाजों के ओमान की खाड़ी तक पहुंचने की संभावना जताई गई है.
तनाव के बीच सीमित जहाजों को ही अनुमति
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे अहम तेल और गैस शिपमेंट मार्गों में से एक है. हालांकि, फरवरी के आखिर में अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद इस इलाके में तनाव काफी बढ़ गया है. इसके बाद ईरान ने समुद्री आवाजाही पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए थे. अब बातचीत के बाद भारत समेत कुछ चुनिंदा देशों के जहाजों को ही इस मार्ग से गुजरने की अनुमति दी जा रही है.
सुरक्षा के लिए बदला गया रूट
शिपिंग डेटा से यह भी सामने आया है कि ईरान जहाजों को अपने समुद्री तट के करीब से गुजरने का निर्देश दे रहा है, ताकि ट्रैफिक को नियंत्रित किया जा सके. वहीं, ओमान के पास वाले पारंपरिक मार्ग को जोखिम भरा माना जा रहा है. इस महीने की शुरुआत में वहां एक जहाज पर हमले की खबर भी सामने आई थी.
पहले भी पहुंच चुके हैं भारतीय जहाज
‘जग वसंत’ और ‘पाइन गैस’ दोनों ने फरवरी के अंत में ही फारस की खाड़ी में प्रवेश किया था, लेकिन बढ़ते तनाव के कारण वहीं फंस गए थे. ‘जग वसंत’ ने कुवैत से LPG लोड किया था, जबकि ‘पाइन गैस’ ने यूएई के रुवाइस से अपना माल उठाया था. इससे पहले भी इसी महीने दो अन्य भारतीय एलपीजी कैरियर सुरक्षित रूप से इस मार्ग को पार कर भारत पहुंच चुके हैं.
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