Makhana Market News: कभी तालाबों और जलाशयों तक सीमित मखाना अब देश-दुनिया के बाजार में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है. स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता, प्लांट-बेस्ड और क्लीन-लेबल फूड की बढ़ती मांग, बेहतर कीमतों और निर्यात में बढ़ोतरी ने भारत के मखाना कारोबार को नई रफ्तार दी है. केंद्र सरकार की आधिकारिक फैक्टशीट के अनुसार, मौजूदा रफ्तार बनी रही तो देश का मखाना बाजार 2029-30 तक 11,000 से 12,000 करोड़ रुपये के स्तर तक पहुंच सकता है.
मखाने की खासियत यह है कि इसकी मांग केवल घरेलू बाजार तक सीमित नहीं है. भारत में इसकी खपत लगातार बढ़ रही है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी इसे प्रीमियम स्नैक के तौर पर जगह मिल रही है. ऐसे में आने वाले वर्षों में उत्पादन, उत्पादकता और निर्यात बढ़ने से इस क्षेत्र के और विस्तार की उम्मीद है.
कम उत्पादन वृद्धि के बावजूद कीमतों में बड़ा उछाल
सरकारी फैक्टशीट के मुताबिक, FY21-22 से 2024-25 के बीच मखाना उत्पादन में करीब 4 से 5 प्रतिशत की वृद्धि हुई. हालांकि, इसी अवधि में मखाने की औसत कीमत में काफी बढ़ोतरी देखने को मिली. मखाने की औसत कीमत करीब 500 रुपये प्रति किलोग्राम से बढ़कर 1,250 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई. इसके पीछे स्वास्थ्यवर्धक खाद्य पदार्थों की बढ़ती मांग, प्रीमियम ब्रांडिंग और सीमित आपूर्ति वृद्धि को प्रमुख वजह माना गया है.
हेल्थ कॉन्शियस लोगों के बीच बढ़ी मांग
मखाना अब स्वास्थ्य के प्रति जागरूक उपभोक्ताओं के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है. कम वसा, उच्च पोषण और प्लांट-बेस्ड खाद्य पदार्थों की ओर बढ़ते रुझान ने इसकी मांग को मजबूत किया है. यही वजह है कि घरेलू बाजार के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी मखाने की खपत बढ़ रही है. क्लीन-लेबल और प्लांट-बेस्ड सुपरफूड्स की बढ़ती वैश्विक मांग भारत के मखाना कारोबार के लिए नए अवसर पैदा कर रही है.
2025-26 में उत्पादन 80,590 मीट्रिक टन पहुंचने का अनुमान
वर्ष 2024-25 में भारत का कुल मखाना उत्पादन 63,910 मीट्रिक टन रहा. इस दौरान औसत उत्पादकता 2.03 मीट्रिक टन प्रति हेक्टेयर दर्ज की गई. वहीं, वर्ष 2025-26 के दूसरे अग्रिम अनुमान के अनुसार मखाना उत्पादन बढ़कर 80,590 मीट्रिक टन तक पहुंच सकता है. इसी अवधि में औसत उत्पादकता भी बढ़कर 2.34 मीट्रिक टन प्रति हेक्टेयर होने का अनुमान है.
मखाना उत्पादन में बिहार सबसे आगे
देश में मखाना उत्पादन के मामले में बिहार सबसे आगे है. वर्ष 2025-26 में राज्य का मखाना उत्पादन करीब 60,000 मीट्रिक टन रहने का अनुमान है. बिहार में मखाने की औसत उत्पादकता करीब 2 मीट्रिक टन प्रति हेक्टेयर है. राज्य देश के कुल मखाना उत्पादन में सबसे बड़ा योगदान देता है.
आधुनिक तकनीक से बढ़ रही खेती की क्षमता
परंपरागत रूप से मखाने की खेती तालाबों और जलाशयों में की जाती रही है, लेकिन अब आधुनिक कृषि तकनीकों के इस्तेमाल से इसकी उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है. फील्ड सिस्टम खेती, स्वर्ण वैदेही और सबौर मखाना-1 जैसी उन्नत किस्मों के इस्तेमाल से किसानों को बेहतर पैदावार मिल रही है. सरकार के अनुसार, खेती का दायरा बढ़ने, उत्पादकता में सुधार और खेती से जुड़े जोखिम कम होने से मखाना क्षेत्र में लगातार प्रगति हो रही है.
40 फीसदी से ज्यादा उत्पादन का निर्यात
भारत हर साल 0.6 लाख मीट्रिक टन से अधिक मखाने का उत्पादन करता है. इसमें से करीब 40 प्रतिशत, यानी लगभग 23,000 से 25,000 मीट्रिक टन, मखाने का निर्यात किया जाता है. बाकी उत्पादन की खपत घरेलू बाजार में होती है. वैश्विक स्तर पर प्लांट-बेस्ड और क्लीन-लेबल सुपरफूड्स की मांग बढ़ने से भारत के लिए निर्यात के नए अवसर भी बन रहे हैं.
घरेलू मखाना बाजार की सालाना वृद्धि 17-18 फीसदी
सरकारी फैक्टशीट के अनुसार, घरेलू मखाना बाजार ने 2021-22 से 2024-25 के बीच करीब 17 से 18 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर दर्ज की है. मजबूत घरेलू मांग इस क्षेत्र के लिए एक अहम सहारा बनी हुई है. इससे मखाना कारोबार को वैश्विक बाजार में होने वाले उतार-चढ़ाव से भी काफी हद तक सुरक्षा मिलती है.
मखाना विकास के लिए सरकार की बड़ी योजना
मखाना क्षेत्र के बढ़ते महत्व को देखते हुए केंद्र सरकार ने केंद्रीय बजट 2025-26 में राष्ट्रीय मखाना बोर्ड की स्थापना की घोषणा की थी. इसके अलावा, वर्ष 2025-26 से 2030-31 की अवधि के लिए 476.03 करोड़ रुपये की लागत वाली मखाना विकास केंद्रीय क्षेत्र योजना को भी मंजूरी दी गई है. इस योजना के तहत मखाना क्षेत्र में अनुसंधान और नवाचार, गुणवत्तापूर्ण बीजों की उपलब्धता, किसानों के कौशल विकास और कटाई के बाद की व्यवस्था को बेहतर बनाने पर ध्यान दिया जाएगा.
इ सके साथ ही मूल्य संवर्धन, ब्रांडिंग, मार्केटिंग और निर्यात को बढ़ावा देने की दिशा में भी काम किया जाएगा. गुणवत्ता नियंत्रण व्यवस्था को मजबूत करने पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा. इससे मखाना उत्पादन से लेकर बाजार और निर्यात तक पूरी वैल्यू चेन को बेहतर बनाने की कोशिश की जाएगी.
2029-30 तक 12 हजार करोड़ के बाजार की उम्मीद
बढ़ती घरेलू मांग, बेहतर कीमतों, उत्पादन में संभावित बढ़ोतरी और निर्यात के नए अवसरों को देखते हुए भारत का मखाना क्षेत्र आने वाले वर्षों में तेजी से आगे बढ़ सकता है. सरकारी अनुमान के मुताबिक, 2029-30 तक देश का मखाना बाजार 11,000 से 12,000 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है. यानी मखाना अब सिर्फ पारंपरिक खाद्य पदार्थ नहीं रह गया है, बल्कि बढ़ती हेल्थ कॉन्शियस डिमांड और वैश्विक सुपरफूड बाजार के बीच भारत के लिए एक बड़े कारोबारी अवसर के रूप में भी उभर रहा है.
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