Manufacturing Sector: भारत का मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर तेजी से देश की आर्थिक वृद्धि के प्रमुख आधारों में शामिल हो रहा है. उत्पादन बढ़ाने, आत्मनिर्भरता को मजबूत करने और औद्योगिक विकास को गति देने के लिए सरकार की ओर से उठाए गए कदमों का असर अब उत्पादन, निर्यात और निवेश के आंकड़ों में भी दिखाई दे रहा है. शनिवार को जारी सरकारी फैक्टशीट के मुताबिक, रक्षा उत्पादन, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग और सेमीकंडक्टर जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में भारत ने हाल के वर्षों में उल्लेखनीय प्रगति की है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, देश के GDP में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की हिस्सेदारी फिलहाल करीब 16 से 17 प्रतिशत है. इस क्षेत्र से 2.7 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार मिला हुआ है. स्थिर कीमतों पर मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की ग्रॉस वैल्यू एडेड (GVA) वृद्धि दर का CAGR 10.88 प्रतिशत रहा है, जो इस क्षेत्र की मजबूत विकास क्षमता को दर्शाता है.
माल निर्यात में भी तेज बढ़ोतरी
भारत के मैन्युफैक्चरिंग और औद्योगिक क्षेत्र में बढ़ती गतिविधियों का असर माल निर्यात पर भी दिखाई दिया है. सरकारी फैक्टशीट के मुताबिक, जुलाई 2026 में भारत का मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट बढ़कर 44.24 अरब डॉलर हो गया. पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 36.98 अरब डॉलर था. वहीं, जून 2026 में देश के मैन्युफैक्चरिंग उत्पादन में 7.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई. यह बढ़ोतरी औद्योगिक गतिविधियों में लगातार सुधार की ओर इशारा करती है.
रक्षा उत्पादन ने बनाया नया रिकॉर्ड
भारत के रक्षा क्षेत्र में पिछले एक दशक के दौरान बड़ा बदलाव देखने को मिला है. आत्मनिर्भरता पर जोर, लक्षित निवेश और नीतिगत सुधारों के जरिए देश में स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ावा दिया गया है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का रक्षा उत्पादन रिकॉर्ड 1.78 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया. यह वित्त वर्ष 2024-25 के 1,54,071 करोड़ रुपये के मुकाबले 15.6 प्रतिशत अधिक है. अगर एक दशक पहले की स्थिति से तुलना करें तो वित्त वर्ष 2014-15 में देश का रक्षा उत्पादन सिर्फ 46,429 करोड़ रुपये था. इस तरह पिछले वर्षों में रक्षा विनिर्माण क्षमता में काफी विस्तार हुआ है.
इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग में भी बड़ी छलांग
इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र ने भी तेजी से विस्तार किया है. वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन बढ़कर 13.11 लाख करोड़ रुपये हो गया. वित्त वर्ष 2024-25 में यह 11.32 लाख करोड़ रुपये था. यानी एक साल में इसमें 15.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई. मोबाइल फोन के उत्पादन और निर्यात में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है. मोबाइल फोन का निर्यात बढ़कर 2.59 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है. इससे वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स सप्लाई चेन में भारत की स्थिति और मजबूत होने का संकेत मिलता है.
सेमीकंडक्टर सेक्टर में तेजी से बढ़ रहा भारत
भारत अब सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में भी अपनी मौजूदगी मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है. सरकार के मुताबिक, सेमीकॉन इंडिया प्रोग्राम 1.0 के तहत जुलाई 2026 तक 1.64 लाख करोड़ रुपये से अधिक के प्रस्तावित निवेश वाली 12 विनिर्माण इकाइयों को मंजूरी दी जा चुकी है. इन मंजूर इकाइयों में एक सिलिकॉन फैब, एक सिलिकॉन कार्बाइड फैब, एक इंटीग्रेटेड गैलियम नाइट्राइड माइक्रो-एलईडी डिस्प्ले फैब और नौ पैकेजिंग इकाइयां शामिल हैं. सरकार इन परियोजनाओं के जरिए देश में सेमीकंडक्टर निर्माण और इससे जुड़े पूरे इकोसिस्टम को विकसित करने पर जोर दे रही है.
PLI योजना से मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग को मिला बढ़ावा
बड़े पैमाने के इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग यानी LSEM के लिए लागू प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजना ने भी मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम में निवेश बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है. सरकार के अनुसार, इस योजना के तहत मोबाइल निर्माण इकोसिस्टम में करीब 96,000 करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित हुआ है. सरकार का मानना है कि ऐसी पहलों से भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स हब के रूप में स्थापित करने में मदद मिलेगी.
फार्मा सेक्टर में भी भारत की स्थिति मजबूत
मैन्युफैक्चरिंग के साथ फार्मास्यूटिकल्स सेक्टर में भी उत्पादन, नवाचार और निर्यात में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है. सरकारी फैक्टशीट के मुताबिक, इस क्षेत्र में हो रही प्रगति ने वैश्विक स्तर पर एक भरोसेमंद दवा आपूर्तिकर्ता के रूप में भारत की स्थिति को और मजबूत किया है. भारतीय दवा उद्योग वैश्विक स्वास्थ्य क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है. सरकार के अनुसार, आने वाले वर्षों में उत्पादन, नवाचार और निर्यात में आगे की वृद्धि के साथ इस क्षेत्र के और विस्तार की उम्मीद है.
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