Meta ने शुरू की हिंदी चैटबॉट्स के लिए हायरिंग, मिल रही है $55 प्रति घंटे की सैलरी

Shivam
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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मेटा (Meta) तेजी से उभरते बाजारों में अपनी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) उपस्थिति को मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है. इस कड़ी में कंपनी हिंदी भाषा में चैटबॉट्स के निर्माण पर ध्यान केंद्रित कर रही है और इसके लिए वह अमेरिका में कॉन्ट्रैक्टर्स की हायरिंग कर रही है, जिन्हें करीब $55 प्रति घंटे (लगभग ₹4,850) का भुगतान किया जा रहा है.

मेटा ने चैटबॉट्स के लिए शुरू की हायरिंग

बिजनेस इनसाइडर की एक रिपोर्ट के मुताबिक, यह भर्ती प्रक्रिया भारत, इंडोनेशिया और मैक्सिको जैसे विकासशील देशों में मेटा की AI रणनीति का हिस्सा है. हायरिंग मुख्य रूप से क्रिस्टल इक्वेशन और एक्वेंट टैलेंट जैसी स्टाफिंग एजेंसियों के माध्यम से की जा रही है. इन भूमिकाओं में उम्मीदवारों से इंस्टाग्राम, मैसेंजर और व्हाट्सएप जैसे प्लेटफॉर्म्स के लिए चैटबॉट कैरेक्टर्स के निर्माण और संवाद तैयार करने का काम लिया जाएगा.

इसके लिए आवश्यक योग्यता में हिंदी, इंडोनेशियाई, स्पेनिश या पुर्तगाली भाषा में धाराप्रवाह होना और कम से कम 6 वर्षों का अनुभव (कहानी लेखन, कैरेक्टर डेवलपमेंट और AI कंटेंट वर्कफ़्लो में) शामिल है. फिलहाल मेटा की ओर से इस हायरिंग को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है. रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि क्रिस्टल इक्वेशन द्वारा हिंदी और इंडोनेशियाई भाषाओं के लिए विज्ञापन जारी किया गया है. वहीं एक्वेंट टैलेंट ने मेटा के लिए स्पेनिश भाषा की भूमिकाओं के लिए भर्ती का विज्ञापन निकाला है.

आलोचना और चिंताएं भी आईं सामने 

साथ ही, मेटा के एआई चैटबॉट्स पर बढ़ते फोकस की आलोचना भी हुई है. पहले की रिपोर्टों से पता चलता है कि मेटा के कुछ बॉट्स नाबालिगों के साथ अनुचित रोमांटिक या यौन बातचीत में शामिल थे, भ्रामक चिकित्सा सलाह दे रहे थे, और यहां तक कि नस्लवादी प्रतिक्रियाएं भी दे रहे थे। साथ ही, इले लेकर गोपनीयता संबंधी चिंताएं भी उठाई गई हैं.

बिजनेस इनसाइडर की रिपोर्ट में पहले बताया गया था कि चैटबॉट बातचीत की समीक्षा करने वाले कॉन्ट्रैक्टर्स को अकसर नाम, फोन नंबर, ईमेल और सेल्फी जैसी संवेदनशील व्यक्तिगत जानकारी मिल जाती थी, जिससे इस तरह के डेटा के प्रबंधन को लेकर सवाल उठने लगे थे. इन रिपोर्टों के बाद, अमेरिकी सांसदों ने मेटा की एआई नीतियों की कड़ी निगरानी की मांग की है.

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