ITR Mutual Funds News: म्यूचुअल फंड में पैसा लगाया और ITR में नहीं बताया? जानिए कब होगी परेशानी और कैसे सुधारें गलती

Shivam
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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ITR Mutual Funds News: अगर आपने म्यूचुअल फंड में एकमुश्त निवेश किया है और ITR दाखिल करते समय इसकी जानकारी नहीं दी, तो हर स्थिति में घबराने की जरूरत नहीं है. असली सवाल यह है कि आपने सिर्फ म्यूचुअल फंड की यूनिट्स खरीदी हैं या उन्हें बेचकर मुनाफा या नुकसान भी कमाया है. टैक्स के लिहाज से दोनों स्थितियों के नियम अलग हैं. सिर्फ म्यूचुअल फंड में निवेश करने से आम तौर पर कैपिटल गेन टैक्स नहीं बनता. कैपिटल गेन की स्थिति तब आती है जब यूनिट्स को बेचा या रिडीम किया जाता है. वहीं, बड़े म्यूचुअल फंड लेनदेन की जानकारी टैक्स विभाग तक पहुंच सकती है, इसलिए ITR दाखिल करने से पहले AIS और TIS को जरूर जांच लेना चाहिए.

सिर्फ म्यूचुअल फंड खरीदने पर क्या ITR में बताना जरूरी है?

अगर आपने किसी वित्तीय वर्ष में म्यूचुअल फंड की यूनिट्स खरीदी हैं और उन्हें बेचा या रिडीम नहीं किया है, तो केवल निवेश करने से कैपिटल गेन नहीं बनता. इसलिए इसे कैपिटल गेन के तौर पर ITR में दिखाने का सवाल नहीं उठता. हालांकि, बड़े वित्तीय लेनदेन की जानकारी Statement of Financial Transactions यानी SFT के जरिए रिपोर्ट हो सकती है. आयकर विभाग के अनुसार, एक वित्तीय वर्ष में एक या अधिक म्यूचुअल फंड स्कीम की यूनिट्स खरीदने के लिए 10 लाख रुपये या उससे अधिक की राशि होने पर इसकी जानकारी SFT में रिपोर्ट की जाती है. इसलिए अगर आपने बड़ी रकम म्यूचुअल फंड में लगाई है, तो अपने AIS और TIS में उपलब्ध जानकारी जरूर जांचें.

यूनिट बेच दी तो ITR में देना होगा पूरा हिसाब

म्यूचुअल फंड की यूनिट्स बेचने या रिडीम करने के बाद स्थिति बदल जाती है. बिक्री से अगर मुनाफा हुआ है तो वह नियमों के अनुसार शॉर्ट टर्म या लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन हो सकता है. वहीं, अगर निवेश पर नुकसान हुआ है तो उसे भी सही तरीके से रिपोर्ट करना जरूरी है. पात्र नुकसान को रिपोर्ट करने पर नियमों के तहत उसे भविष्य के वर्षों में आगे ले जाने का लाभ मिल सकता है. इसलिए केवल निवेश करने और निवेश बेचने को एक जैसा नहीं माना जा सकता.

ITR में जानकारी छूट गई तो क्या रिफंड रुक जाएगा?

अगर टैक्सेबल कैपिटल गेन ITR में शामिल नहीं किया गया है, तो इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की प्रोसेसिंग के दौरान आपकी टैक्स देनदारी प्रभावित हो सकती है. ऐसी स्थिति में अतिरिक्त टैक्स बन सकता है और रिफंड की रकम भी कम हो सकती है. हालांकि, केवल AIS में म्यूचुअल फंड का लेनदेन दिखाई देने भर से हर व्यक्ति का रिफंड अपने आप नहीं रुकता. इसका असर इस बात पर निर्भर करता है कि वास्तव में कौन-सा लेनदेन हुआ और उससे टैक्सेबल आय बनी या नहीं.

गलती हो गई है तो सबसे पहले ये काम करें

अगर आपको लगता है कि म्यूचुअल फंड से जुड़ी जानकारी ITR में छूट गई है, तो सबसे पहले अपने ई-फाइलिंग अकाउंट में जाकर AIS और TIS चेक करें. इसके बाद अपने फंड हाउस, CAMS, KFintech या ब्रोकर से Consolidated Capital Gain Statement निकालें. इससे आपको यह पता चल जाएगा कि वित्तीय वर्ष में म्यूचुअल फंड की कितनी यूनिट्स बेची गईं, कितना मुनाफा या नुकसान हुआ और उसे ITR में कैसे रिपोर्ट किया जाना चाहिए.

Revised ITR से सुधारी जा सकती है गलती

अगर म्यूचुअल फंड की बिक्री से हुआ कैपिटल गेन या लॉस ITR में छूट गया है और संशोधित रिटर्न दाखिल करने की समय-सीमा बाकी है, तो Revised ITR के जरिए गलती सुधारी जा सकती है. AY 2026-27 के लिए आयकर विभाग के अनुसार Revised ITR 31 मार्च 2027 तक या असेसमेंट पूरा होने से पहले, जो भी पहले हो, दाखिल किया जा सकता है. 31 दिसंबर 2026 के बाद लेकिन 31 मार्च 2027 तक Revised ITR दाखिल करने पर Section 234-I के तहत अतिरिक्त फीस लागू होगी. आयकर विभाग के अनुसार यह फीस कुल आय के आधार पर ₹1,000 या ₹5,000 हो सकती है.

Revised ITR की समय-सीमा निकल गई तो?

अगर Revised ITR दाखिल करने की समय-सीमा निकल चुकी है, तो कुछ मामलों में ITR-U यानी Updated Return का विकल्प उपलब्ध हो सकता है. आयकर विभाग के मुताबिक Updated Return संबंधित अवधि के लिए निर्धारित शर्तों के अधीन 48 महीने तक दाखिल किया जा सकता है.

हालांकि ITR-U के साथ अतिरिक्त टैक्स का प्रावधान होता है. साथ ही Updated Return का इस्तेमाल रिफंड बढ़ाने या टैक्स देनदारी घटाने के लिए नहीं किया जा सकता. इसलिए म्यूचुअल फंड बेचने के बाद हुए कैपिटल गेन या लॉस को ITR में सही तरीके से दर्ज करना जरूरी है. अगर कोई जानकारी छूट गई है, तो पहले AIS, TIS और Consolidated Capital Gain Statement मिलाकर स्थिति साफ करें और लागू समय-सीमा के भीतर रिटर्न को सही करें.

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