New Delhi: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने उम्मीद जताई कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को वैश्विक व्यापार तथा दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों के हित में जल्द से जल्द अंतिम रूप दे दिया जाएगा. उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि हाल में भारतीय वाणिज्य मंत्री ने भी कहा है कि वे समझौते पर जल्द हस्ताक्षर होने की उम्मीद कर रहे हैं और ऐसा चाहते हैं. बातचीत जारी है. मुझे उम्मीद है कि वैश्विक व्यापार और दोनों साझेदारों, भारत तथा अमेरिका के बीच व्यापार के हित में इस समझौते को जल्द से जल्द पूरा कर लिया जाएगा.
लगातार लगी पाबंदियां प्रमुख चिंताएं
चीन के साथ व्यापार पर सीतारमण ने कहा कि चीन के साथ वर्षों से बातचीत के बावजूद बढ़ता व्यापार असंतुलन और भारतीय उत्पादों के लिए बाजार तक पहुंच पर लगातार लगी पाबंदियां प्रमुख चिंताएं बनी हुई हैं. उन्होंने कहा कि भारत ने चीन में जेनेरिक दवाओं, गोवंश का मांस, सब्जियों और अन्य जल्दी खराब होने वाले उत्पादों के लिए बाजार तक पहुंच हासिल करने की लगातार कोशिश की है लेकिन वर्षों से बातचीत के बावजूद बहुत कम प्रगति हुई है.
भारत और चीन के बीच व्यापार में गैर-शुल्क बाधाएं
सीतारमण ने यह बात थाईलैंड के बैंकॉक में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ)-विश्व बैंक की वार्षिक बैठकों के दौरान ‘अटलांटिक काउंसिल’ के साथ बातचीत में कही. उन्होंने कहा कि भारत और चीन के बीच व्यापार में गैर-शुल्क बाधाएं सबसे बड़ी रुकावट हैं. वित्त मंत्री ने कहा कि ऐसे मुद्दों को बातचीत और जांच के जरिये सुलझाने की संभावना के बावजूद चीन ने पादप-स्वास्थ्य संबंधी उपायों और अन्य गैर-शुल्क प्रतिबंधों का इस्तेमाल किया है.
व्यापारिक साझेदारों पर दंडात्मक शुल्क
उन्होंने कहा कि भारत ने बड़े व्यापार असंतुलन को दूर करने के लिए व्यापारिक साझेदारों पर दंडात्मक शुल्क लगाने का रास्ता नहीं अपनाया है. इसके बजाय उसने बातचीत को प्राथमिकता दी है, भले ही इस प्रक्रिया में अधिक समय लगता हो. ‘ब्रिक्स’ के बारे में सीतारमण ने कहा कि इस समूह को किसी देश या गुट का मुकाबला करने वाले मंच के बजाय अपने लोगों के बेहतर कल्याण के उद्देश्य से बनी साझेदारी के रूप में देखा जाना चाहिए.
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