देशभर में म्यूचुअल फंड की पहुंच बढ़ाने के उद्देश्य से नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने मंगलवार को डाक विभाग के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं. इस पहल के तहत देश के विशाल डाकघर नेटवर्क का उपयोग कर निवेश सेवाओं को आम लोगों तक पहुंचाया जाएगा. आधिकारिक बयान के अनुसार, इस समझौते के तहत डाक विभाग के चयनित कर्मचारियों को सर्टिफाइड म्यूचुअल फंड डिस्ट्रीब्यूटर के रूप में प्रशिक्षित किया जाएगा, ताकि वे नियामकीय मानकों का पालन करते हुए निवेशकों को म्यूचुअल फंड से जुड़ी सेवाएं प्रदान कर सकें.
प्रमाणन और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए सेवाएं
ये कर्मचारी अनिवार्य प्रमाणन और नियामक अनुपालन के अधीन, जिसमें एनआईएसएम प्रमाणन और ईयूआईएन पंजीकरण शामिल है, एनएसई के म्यूचुअल फंड प्लेटफॉर्म के माध्यम से म्यूचुअल फंड उत्पाद और संबंधित निवेशक सेवाएं प्रदान करेंगे. संचार मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया कि डाक विभाग, देश भर में फैले अपने 1.64 लाख से अधिक डाकघरों के विशाल नेटवर्क का उपयोग करते हुए, एनएसई के साथ मिलकर काम करेगा, जिसके पास म्यूचुअल फंड लेनदेन को संभालने के लिए एक मजबूत ऑनलाइन प्रणाली है.
ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों पर फोकस
इस पहल का मुख्य उद्देश्य म्यूचुअल फंड उत्पादों की अंतिम-मील पहुंच को खासकर ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों तक मजबूत करना है. एनएसई के मुख्य व्यापार विकास अधिकारी श्रीराम कृष्णन ने कहा कि इस साझेदारी के जरिए एक पारदर्शी, नियमों के अनुरूप और निवेशक-केंद्रित वितरण प्रणाली विकसित की जाएगी, जो देश के दूरदराज इलाकों तक नागरिकों को निवेश सेवाएं उपलब्ध कराएगी. यह सहयोग इंडिया पोस्ट की विश्वसनीयता, व्यापक पहुंच और सुलभता को एनएसई की बाजार संरचना और तकनीकी विशेषज्ञता के साथ जोड़कर वित्तीय समावेशन को और गति देने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है.
जागरूकता और वित्तीय समावेशन को बढ़ावा
इस पहल से पूंजी बाजार से जुड़े उत्पादों के प्रति जागरूकता, पारदर्शिता और निवेशकों की भागीदारी बढ़ने की उम्मीद है. डाक विभाग की महाप्रबंधक (सीसीएस और आरबी) मनीषा बंसल बादल ने कहा कि एनएसई के साथ यह साझेदारी इंडिया पोस्ट को आधुनिक निवेश समाधान उपलब्ध कराने में सक्षम बनाएगी, साथ ही निवेशक संरक्षण और नियामकीय अनुपालन के उच्च मानकों को सुनिश्चित करेगी. यह कार्यक्रम चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा और शुरुआत चुनिंदा स्थानों पर पायलट प्रोजेक्ट के रूप में की जाएगी.
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