दशहरा, दिवाली और फिर छठ पूजा. त्योहारों का मौसम करीब है, लेकिन इस बीच प्याज की बढ़ती कीमतों ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है. रोजाना इस्तेमाल होने वाली इस सब्जी के दाम पिछले साल के मुकाबले लगभग दोगुने हो चुके हैं. खुदरा बाजार में प्याज की औसत कीमत 52.99 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है. वहीं, थोक बाजार में भी कीमतों में सालाना आधार पर 123 फीसदी से ज्यादा की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. ऐसे में सवाल यह है कि त्योहारों के दौरान लोगों को महंगे प्याज से राहत मिलेगी या अभी जेब पर बोझ बना रहेगा?
कब तक सस्ता हो सकता है प्याज?
प्याज की कीमतों को लेकर राहत की उम्मीद इसलिए जताई जा रही है, क्योंकि आने वाले हफ्तों में नई खरीफ फसल की आवक बढ़ सकती है. इसके साथ ही बाजार में पुरानी फसल का स्टॉक भी मौजूद है. सप्लाई बढ़ने से कीमतों पर दबाव कम होने और खुदरा बाजार में प्याज के दाम नीचे आने की संभावना है. आमतौर पर खरीफ सीजन की प्याज सितंबर के आखिरी दिनों से नवंबर तक मंडियों में पहुंचने लगती है.
इसके बाद मंडियों से प्याज की सप्लाई खुदरा बाजारों तक बढ़ती है. ऐसे में आने वाले दिनों में फसल की आवक यह तय करने में अहम भूमिका निभाएगी कि ग्राहकों को कितनी राहत मिलती है. कारोबारियों को उम्मीद है कि महाराष्ट्र समेत प्याज उत्पादक राज्यों से आपूर्ति बढ़ने पर नवंबर तक बाजार में उपलब्धता बेहतर हो सकती है. हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, हॉर्टिकल्चर प्रोड्यूस एक्सपोर्टर एसोसिएशन के विकास सिंह ने बताया कि कई बाजारों में खरीफ फसल की आवक शुरू हो गई है.
उनके मुताबिक, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में पुरानी फसल का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है, जिससे नवंबर के तीसरे सप्ताह तक मांग पूरी करने में मदद मिल सकती है. वहीं, कर्नाटक, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश से नवंबर के आखिर तक सप्लाई जारी रहने की उम्मीद है. महाराष्ट्र की शुरुआती खरीफ फसल भी अक्टूबर के अंत तक सीमित मात्रा में बाजार में पहुंचनी शुरू हो सकती है.
अभी कितने रुपये किलो मिल रहा प्याज?
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 10 अक्टूबर को देश में प्याज की औसत खुदरा कीमत 52.99 रुपये प्रति किलोग्राम दर्ज की गई. एक महीने पहले यानी करीब 30 दिन पहले यह कीमत 53.10 रुपये प्रति किलो थी. यानी मासिक आधार पर कीमत में मामूली गिरावट आई है, लेकिन पिछले साल के मुकाबले प्याज अब भी काफी महंगा है. आंकड़ों के अनुसार, एक साल पहले प्याज की अखिल भारतीय औसत खुदरा कीमत 26.65 रुपये प्रति किलो थी. इस लिहाज से मौजूदा कीमत लगभग दोगुनी हो चुकी है.
इसका सीधा असर उन परिवारों के बजट पर पड़ रहा है, जिनकी रसोई में प्याज का इस्तेमाल रोजाना होता है. थोक बाजार में भी स्थिति अलग नहीं है. 10 अक्टूबर को प्याज की औसत थोक कीमत 4,591 रुपये प्रति क्विंटल रही. यह एक महीने पहले के मुकाबले 2.4 फीसदी और पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 123.3 फीसदी अधिक है. अब बाजार की नजर नई खरीफ फसल की आवक पर टिकी है.
अगर महाराष्ट्र और दूसरे प्रमुख उत्पादक राज्यों से सप्लाई उम्मीद के मुताबिक बढ़ती है, तो आने वाले हफ्तों में कीमतों में नरमी आ सकती है. हालांकि, प्याज सस्ता होने की रफ्तार इस बात पर निर्भर करेगी कि बाजार में कितनी मात्रा में नई फसल पहुंचती है और मांग के मुकाबले उपलब्धता कैसी रहती है.
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