Indian Banks: वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही (अक्टूबर–दिसंबर) में भारतीय बैंकों के मुनाफे में सालाना आधार पर बढ़ोतरी की संभावना जताई गई है, जबकि मार्जिन के स्थिर बने रहने का अनुमान है. यह बात सोमवार को जारी एक रिपोर्ट में कही गई है. सिस्टमैटिक्स इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज की रिपोर्ट के अनुसार, मजबूत लोन ग्रोथ, फीस आय में इजाफा और क्रेडिट लागत में कमी के चलते बैंकों की आय में सुधार देखने को मिल सकता है.
ब्रोकरेज का मानना है कि आगे भी ऋण वृद्धि की रफ्तार बनी रह सकती है, क्योंकि ब्याज दरों में नरमी और GST व आयकर में कटौती से कर्ज की मांग बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं.
Q4 में मार्जिन पर दबाव
इसके अलावा, रिपोर्ट में अनुमान लगाया कि चौथी तिमाही में शुद्ध ब्याज मार्जिन में गिरावट आएगी, लेकिन उसके बाद इसमें सुधार होगा क्योंकि मौजूदा बुक में फिर से वृद्धि और असुरक्षित लोन सेगमेंट में होने वाली स्लीपेज के सामान्यीकरण के साथ जमा की लागत में कमी आने की उम्मीद है, जिसके परिणामस्वरूप क्रेडिट लागत कम होगी. आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार, 12 दिसंबर 2025 तक बैंकिंग प्रणाली में एडवांस तिमाही आधार पर 4.5% और सालाना आधार पर 11.7% की वृद्धि दर्ज की गई है.
रिपोर्ट में बताया गया कि मार्जिन को बनाए रखने के उद्देश्य से अधिकांश बैंकों ने शुरुआती चरण में ही बचत खातों के साथ-साथ सावधि जमा पर ब्याज दरों में कटौती कर दी थी.
FD दरों में कटौती का असर दिखेगा
बचत खातों की ब्याज दरों में कटौती का असर फंड की लागत पर तुरंत पड़ा, लेकिन मौजूदा निश्चित ब्याज दर जमाओं के विलंबित पुनर्मूल्यांकन के कारण सावधि जमा की ब्याज दरों में कमी से होने वाले लाभ मौजूदा तिमाही से अधिक स्पष्ट होने की उम्मीद है. एक अन्य हालिया रिपोर्ट में बताया गया है कि मौसमी कृषि से जुड़े कुछ उतार-चढ़ाव को छोड़ दें तो अधिकांश बैंकों की परिसंपत्ति गुणवत्ता स्थिर बनी रहने की संभावना है.
ब्रोकरेज फर्म के मुताबिक, तीसरी तिमाही में सुधार के रुझान जारी रह सकते हैं, जिससे ऋण लागत के दबाव को कम करने में मदद मिलेगी.
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