MSP Hike 2027-28: रबी फसलों की खरीद और न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के तहत किसानों को किए जाने वाले भुगतान में पिछले दो दशकों के दौरान बढ़ोतरी दर्ज की गई है. वित्त वर्ष 2004-05 में छह रबी फसलों की खरीद 2,302 लाख मीट्रिक टन थी, जो 2025-26 में बढ़कर 3,921 लाख मीट्रिक टन हो गई. इसी अवधि में एमएसपी के तहत भुगतान भी 2.65 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 8.36 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया. गुरुवार को जारी सरकारी फैक्टशीट में यह जानकारी दी गई.
रबी सीजन 2027-28 के लिए MSP में बढ़ोतरी
सरकार ने 30 सितंबर को रबी विपणन सत्र (RMS) 2027-28 के लिए सभी निर्धारित रबी फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी को मंजूरी दी थी. इसके तहत करीब 324 लाख मीट्रिक टन उपज की खरीद के बदले किसानों को लगभग 90,962 करोड़ रुपये का भुगतान किए जाने का अनुमान है. सरकार के मुताबिक, एमएसपी में बढ़ोतरी का उद्देश्य किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाना और उन्हें फसल विविधीकरण के लिए प्रोत्साहित करना है.
कुसुम के MSP में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी
रबी विपणन सत्र 2027-28 के लिए कुसुम के न्यूनतम समर्थन मूल्य में सबसे अधिक 675 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की गई है. इसके बाद रेपसीड और सरसों के एमएसपी में 413 रुपये, मसूर में 390 रुपये और जौ में 136 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि की गई है. गेहूं और चना के एमएसपी में भी पिछले साल के मुकाबले इजाफा हुआ है.
गेहूं की उत्पादन लागत पर 106% रिटर्न का अनुमान
सरकारी फैक्टशीट के अनुसार, उत्पादन लागत के मुकाबले अनुमानित रिटर्न के मामले में गेहूं सबसे आगे है. गेहूं पर 106 प्रतिशत मार्जिन का अनुमान लगाया गया है. वहीं, रेपसीड और सरसों के लिए यह 96 प्रतिशत, मसूर के लिए 92 प्रतिशत और चना के लिए 59 प्रतिशत बताया गया है. इन आंकड़ों के आधार पर सरकार का कहना है कि एमएसपी किसानों को उत्पादन लागत के मुकाबले बेहतर मूल्य उपलब्ध कराने में भूमिका निभाता है.
22 प्रमुख फसलों के लिए MSP घोषित करती है सरकार
केंद्र सरकार हर साल 22 प्रमुख कृषि फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित करती है. ये दरें कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (CACP) की सिफारिशों के आधार पर तय की जाती हैं. एमएसपी का मकसद किसानों को बाजार में कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच उनकी उपज के लिए निर्धारित न्यूनतम मूल्य का सहारा देना है.
डिजिटल प्लेटफॉर्म से खरीद और भुगतान में तेजी
सरकार खरीद प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सुलभ बनाने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल बढ़ा रही है. फैक्टशीट के मुताबिक, 19 अक्टूबर 2026 तक ई-संयुक्त प्लेटफॉर्म के जरिए 43 लाख से अधिक किसानों से उपज खरीदी गई. इस माध्यम से 37.45 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा उपज की खरीद हुई और किसानों के खातों में 13,000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जमा की गई. वहीं, ई-समृद्धि प्लेटफॉर्म पर 1.37 करोड़ से अधिक किसान पंजीकृत हैं.
इसके जरिए 2.25 करोड़ यूनिट से ज्यादा उपज की खरीद की गई और किसानों को 81 लाख से अधिक बार भुगतान किया गया. सरकारी फैक्टशीट के अनुसार, एमएसपी में बढ़ोतरी, खरीद व्यवस्था के विस्तार और डिजिटल भुगतान से किसानों की बाजार तक पहुंच बेहतर बनाने पर जोर दिया जा रहा है.