Razorpay ने लॉन्च किया AI पेमेंट्स मॉडल ‘Vulcan’, पेमेंट फेलियर और फ्रॉड रोकने में मिलेगी मदद

Shivam
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

Razorpay Vulcan AI Model: भारत की प्रमुख फिनटेक कंपनी रेजरपे ने डिजिटल पेमेंट्स को ज्यादा सुरक्षित, भरोसेमंद और कुशल बनाने की दिशा में एक नई पहल की है. कंपनी ने AI-संचालित पेमेंट्स फाउंडेशन मॉडल ‘Razorpay Vulcan’ लॉन्च किया है. रेजरपे के मुताबिक, यह भारत का पहला ट्रांसफॉर्मर-आधारित AI फाउंडेशन मॉडल है, जिसे खास तौर पर पेमेंट्स इकोसिस्टम की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है.

कंपनी ने बताया कि Vulcan को NVIDIA और Amazon Web Services (AWS) की तकनीकी साझेदारी के साथ विकसित किया गया है. इसका मुख्य उद्देश्य पेमेंट फेलियर, डिजिटल फ्रॉड, ट्रांजैक्शन रूटिंग और चेकआउट के दौरान आने वाली दिक्कतों को कम करना है. तेजी से बढ़ते डिजिटल पेमेंट बाजार के बीच रेजरपे को उम्मीद है कि यह तकनीक ऑनलाइन ट्रांजैक्शन को अधिक विश्वसनीय और प्रभावी बनाने में मदद करेगी.

15 लाख उपभोक्ताओं और 51 हजार से ज्यादा कारोबारियों पर अध्ययन

रेजरपे के अनुसार, Vulcan विकसित करने से पहले कंपनी ने 15 लाख उपभोक्ताओं और 51,000 से अधिक कारोबारियों को शामिल करते हुए एक आंतरिक अध्ययन किया. इस अध्ययन में सामने आया कि डिजिटल पेमेंट से जुड़ी परेशानियां केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं हैं. छोटे शहरों और कस्बों में रहने वाले उपभोक्ताओं को भी भुगतान के दौरान ऐसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है. कंपनी ने बताया कि Vulcan के शुरुआती घटकों को उसके पेमेंट नेटवर्क पर मौजूद करीब 3 ट्रिलियन डेटा पॉइंट्स पर पहले ही लागू किया जा चुका है. इनका इस्तेमाल रीयल-टाइम ट्रांजैक्शन रूटिंग, जोखिम का आकलन और फ्रॉड की पहचान जैसे कामों में किया गया.

पेमेंट सक्सेस रेट में 10 फीसदी तक सुधार का दावा

रेजरपे का दावा है कि AI मॉडल के इस्तेमाल से पेमेंट सक्सेस रेट में 10 प्रतिशत तक सुधार हुआ है. इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय कार्ड फ्रॉड को पहचानने और रोकने की क्षमता में 8 गुना तक बढ़ोतरी हुई है. कंपनी के मुताबिक, मॉडल ने बिना अतिरिक्त अलर्ट बढ़ाए पहले की तुलना में 5 गुना ज्यादा संदिग्ध और विवादित ट्रांजैक्शन की पहचान करने में भी मदद की है.

Magic Checkout में भी बदलाव

रेजरपे ने बताया कि उसके Magic Checkout प्लेटफॉर्म पर अब 40 प्रतिशत ज्यादा उपभोक्ताओं को उनकी पसंद की UPI एप्लिकेशन दिखाई जा रही है. कंपनी के अनुसार, इससे हर महीने अतिरिक्त 1 से 2 लाख खरीदारी ट्रांजैक्शन संभव हो रहे हैं.

हर्षिल माथुर ने बताया क्या है मकसद

रेजरपे के सह-संस्थापक और CEO हर्षिल माथुर ने कहा कि इस पहल का मकसद उन लोगों का भरोसा बढ़ाना है, जो अभी भी कैश और डिजिटल पेमेंट के बीच चुनाव कर रहे हैं. उनके मुताबिक, अगर डिजिटल भुगतान का अनुभव ज्यादा भरोसेमंद और बिना रुकावट वाला बनाया जाता है, तो इससे लोगों के बीच डिजिटल लेनदेन को अपनाने की रफ्तार बढ़ सकती है.

NVIDIA और AWS ने भी बताई AI की भूमिका

NVIDIA में ग्लोबल इंडस्ट्री बिजनेस डेवलपमेंट एंड पेमेंट्स के प्रमुख पहल पटांगिया ने कहा कि भारत की तेजी से बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था पेमेंट सिस्टम को ज्यादा बुद्धिमान, सुरक्षित और कुशल बनाने का बड़ा अवसर दे रही है. वहीं, AWS India एवं South Asia के FSI और कॉन्ग्लोमेरेट्स प्रमुख किरण जगन्नाथ ने कहा कि Amazon SageMaker पर तैयार किया गया यह AI फाउंडेशन मॉडल अरबों ट्रांजैक्शन से मिलने वाली जानकारी को एक साथ जोड़ता है. उनके अनुसार, इससे ऐसा इंटेलिजेंट प्लेटफॉर्म तैयार होता है जो लगातार सीख सकता है और पारंपरिक मशीन लर्निंग मॉडल की सीमाओं से आगे काम कर सकता है.

अलग-अलग पेमेंट रूट में खुद चुनेगा बेहतर रास्ता

भारत का डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम UPI, कार्ड, नेट बैंकिंग, वॉलेट और कैश ऑन डिलीवरी जैसे कई माध्यमों पर निर्भर है. इन सेवाओं को सैकड़ों बैंक और पेमेंट गेटवे संचालित करते हैं. रेजरपे के मुताबिक, Vulcan रीयल-टाइम में उपलब्ध अलग-अलग पेमेंट रूट का विश्लेषण कर सबसे उपयुक्त विकल्प चुन सकता है. इससे ट्रांजैक्शन के फेल होने की संभावना को कम करने में मदद मिल सकती है.

आगे इन क्षेत्रों में भी होगा इस्तेमाल

कंपनी के अनुसार, Vulcan का इस्तेमाल भविष्य में सिर्फ पेमेंट रूटिंग तक सीमित नहीं रहेगा. इसे ऑथेंटिकेशन, फ्रॉड डिटेक्शन, रिस्क मैनेजमेंट और डिजिटल लेंडिंग जैसे क्षेत्रों में भी विस्तार देने की योजना है. रेजरपे का कहना है कि भारत का डिजिटल कॉमर्स बाजार जैसे-जैसे आगे बढ़ेगा, Vulcan जैसे AI आधारित प्लेटफॉर्म पेमेंट से जुड़े फैसलों को ज्यादा स्मार्ट और स्वचालित बनाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं.

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