RBI का बड़ा फैसला: अब नहीं मिलेंगे नए ‘मनी चेंजर’ लाइसेंस, नई मंजूरी के लिए तीन कैटेगरी में होंगे आवेदन

New Delhi: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने विदेशी मुद्रा यानी फॉरेन एक्सचेंज से जुड़े कारोबार के नियमों में बड़ा बदलाव किया है. बैंक ने साफ कर दिया है कि अब पूरी तरह मनी चेंजर के रूप में काम करने के लिए नए लाइसेंस जारी नहीं किए जाएंगे. ‘विदेशी मुद्रा प्रबंधन (अधिकृत व्यक्ति) विनियमन, 2026’ के तहत यह बदलाव  किया गया है. RBI का कहना है कि इसका उद्देश्य विदेशी मुद्रा सेवाओं को ज्यादा व्यवस्थित, सुरक्षित और आसान बनाना है.

संस्थानों को RBI की अनुमति लेना अनिवार्य

नए नियमों के मुताबिक अब विदेशी मुद्रा से जुड़े किसी भी प्रकार के लेनदेन के लिए संस्थानों को RBI की अनुमति लेना अनिवार्य होगा. यानी डॉलर, यूरो या अन्य विदेशी मुद्रा की खरीद-बिक्री करने वाली संस्थाओं को तय नियमों का पालन करना होगा. RBI ने कहा कि इससे विदेशी मुद्रा कारोबार में पारदर्शिता बढ़ेगी और ग्राहकों को बेहतर सेवाएं मिल सकेंगी.

अधिकृत डीलरों की श्रेणियों में भी बदलाव

इसके साथ ही बैंक ने विदेशी मुद्रा कारोबार करने वाले अधिकृत डीलरों की श्रेणियों और उनके नियमों में भी बदलाव किया है. अब आवेदन प्रक्रिया को नई श्रेणियों के आधार पर व्यवस्थित किया गया है. RBI ने नए ढांचे के तहत विदेशी मुद्रा कारोबार करने वाली संस्थाओं को तीन अलग-अलग श्रेणियों में बांटा है. पहली श्रेणी यानी ‘अधिकृत डीलर श्रेणी-1’ में बैंक शामिल होंगे.

नए नियमों का करना होगा पालन 

विदेशी मुद्रा कारोबार के लिए बैंकों को इसी श्रेणी के तहत आवेदन करना होगा. बैंक पहले की तरह विदेशी मुद्रा सेवाएं दे सकेंगे, लेकिन उन्हें नए नियमों और अनुपालन प्रक्रियाओं का पालन करना होगा. दूसरी श्रेणी यानी ‘अधिकृत डीलर श्रेणी-2’ में गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (एनबीएफसी) और विदेशी मुद्रा कारोबार से जुड़े कुछ अन्य संस्थान शामिल किए गए हैं. ऐसे संस्थान जो पूरी तरह मनी चेंजर का काम कर रहे हैं या कम से कम दो साल से कारोबार कर रहे हैं और पिछले दो वित्त वर्षों में औसतन 50 करोड़ रुपये का वार्षिक विदेशी मुद्रा कारोबार कर चुके हैं, वे इस श्रेणी में आवेदन कर सकेंगे.

इनोवेशन आधारित कंपनियों को शामिल

तीसरी श्रेणी यानी ‘अधिकृत डीलर श्रेणी-3’ उन संस्थाओं के लिए बनाई गई है जो विदेशी मुद्रा से जुड़े नए और तकनीक आधारित उत्पाद या सेवाएं उपलब्ध कराती हैं. इसमें फिनटेक और इनोवेशन आधारित कंपनियों को शामिल किया जा सकता है.

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