RBI MPC Meeting 2026: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने महंगाई और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए नीतिगत दरों में बदलाव किया है. केंद्रीय बैंक ने रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी करते हुए इसे 5.25 प्रतिशत से बढ़ाकर 5.50 प्रतिशत कर दिया है. फरवरी 2023 के बाद यह पहली बार है जब RBI ने रेपो रेट में इजाफा किया है.
यह फैसला RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता में हुई मौद्रिक नीति समिति (MPC) की तीन दिन की बैठक के बाद लिया गया. केंद्रीय बैंक का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बनी अनिश्चित परिस्थितियों और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के बीच आर्थिक स्थिरता बनाए रखना और महंगाई पर नजर रखना जरूरी है.
लोन लेने वालों पर पड़ सकता है असर
रेपो रेट बढ़ने का असर बैंकों की फंडिंग लागत पर पड़ सकता है. ऐसे में बैंक होम लोन, ऑटो लोन और पर्सनल लोन की ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकते हैं. यदि बैंकों की ब्याज दरें बढ़ती हैं तो नई लोन लेने वालों के साथ-साथ फ्लोटिंग रेट वाले मौजूदा कर्जदारों की EMI भी बढ़ने की संभावना रहती है. RBI ने रेपो रेट के अलावा अन्य संबंधित दरों में भी बदलाव किया है। स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी (SDF) को 5.25 प्रतिशत किया गया है. वहीं, मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी (MSF) और बैंक रेट अब 5.75 प्रतिशत पर हैं.
वैश्विक महंगाई को लेकर RBI सतर्क RBI MPC Meeting 2026
मौद्रिक नीति की घोषणा के दौरान RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने वैश्विक महंगाई को लेकर चिंता जताई. उनके मुताबिक, दुनिया में मुद्रास्फीति के फिर से बढ़ने का जोखिम बना हुआ है और कई बड़े केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को सख्त करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं. पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने भी चिंता बढ़ाई है। तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर रहने से आयात लागत बढ़ सकती है, जिसका असर घरेलू महंगाई पर भी पड़ने की आशंका है.
महंगाई के आंकड़ों पर भी नजर
देश में खुदरा महंगाई के आंकड़े भी हाल के महीनों में बढ़े हैं. अगस्त में CPI आधारित महंगाई दर 4.82 प्रतिशत दर्ज की गई, जबकि जुलाई में यह 4.45 प्रतिशत थी. इसके अलावा मौसम से जुड़े जोखिम भी बने हुए हैं. अल नीनो प्रभाव और कम बारिश की स्थिति का असर रबी फसलों के उत्पादन पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है.
इन परिस्थितियों को देखते हुए अर्थशास्त्रियों और बाजार विशेषज्ञों के एक वर्ग ने पहले ही रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी का अनुमान लगाया था. SBI Research ने भी महंगाई के संभावित दबाव, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, तरलता में बदलाव और बढ़ते जोखिमों को देखते हुए समय रहते नीतिगत कदम उठाने की जरूरत बताई थी. रेपो रेट में यह बदलाव आने वाले समय में बैंकिंग सेक्टर की ब्याज दरों, कर्ज की लागत और आम उपभोक्ताओं की EMI पर असर डाल सकता है.

