Retail Inflation January 2026: जनवरी में 2.75% रही खुदरा महंगाई दर; लहसुन, प्याज, आलू और दालों की कीमतें घटीं

Shivam
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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Retail Inflation India January 2026: भारत में अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) पर आधारित खुदरा महंगाई दर जनवरी 2026 में सालाना आधार पर 2.75% दर्ज की गई है. यह जानकारी सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने गुरुवार को जारी की. बेस ईयर में बदलाव के बाद यह महंगाई दर के पहले आधिकारिक आंकड़े हैं. सरकार ने CPI का बेस ईयर 2012 से बदलकर 2024 कर दिया है. इससे पहले दिसंबर में खुदरा महंगाई दर 1.33% थी, जो पुराने बेस ईयर 2012 के आधार पर गणना की गई थी.

ग्रामीण और शहरी महंगाई में मामूली अंतर

सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार ग्रामीण इलाकों में खुदरा महंगाई दर 2.73% रही, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 2.77% दर्ज की गई. खाद्य महंगाई दर जनवरी में 2.13% रही — ग्रामीण इलाकों में 1.96% और शहरी इलाकों में 2.44%. आंकड़ों के मुताबिक लहसुन 53.05%, प्याज 29.27%, आलू 28.98%, अरहर 24.90% और मटर 15.56% सस्ते हुए हैं.

कुछ वस्तुओं में तेज महंगाई

वहीं जनवरी में कुछ वस्तुओं की कीमतों में सालाना आधार पर तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई. चांदी की ज्वेलरी 159.67%, टमाटर 64.80%, कोपरा 47.18%, सोना/हीरा/प्लेटिनम ज्वेलरी 46.77% और नारियल तेल 40.44% महंगा हुआ है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार कपड़े और जूते 2.98%, स्वास्थ्य सेवाएं 2.19% और पान व तंबाकू उत्पाद 2.86% महंगे हुए. परिवहन लागत में 0.09% तथा आवास, पानी, बिजली और अन्य ईंधनों की कीमतों में 1.53% की वृद्धि दर्ज की गई.

किन राज्यों में सबसे ज्यादा महंगाई

देश में जिन पांच राज्यों में जनवरी में महंगाई दर सबसे अधिक रही, उनमें तेलंगाना (4.92%), केरल (3.67%), तमिलनाडु (3.36%), राजस्थान (3.17%) और कर्नाटक (2.99%) शामिल हैं. सरकार के अनुसार अब उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) बेस 2024=100 के साथ जारी किया जा रहा है. आइटम बास्केट और उसके भार घरेलू उपभोग व्यय सर्वेक्षण 2023-24 पर आधारित हैं.

नए आंकड़ों से बेहतर नीति निर्माण की उम्मीद

मुद्रास्फीति के आकलन के दायरे और प्रतिनिधित्व को बेहतर बनाने के उद्देश्य से यह बदलाव किया गया है. इस संशोधन से अधिक विस्तृत और अद्यतन डेटा उपलब्ध होगा, जिससे नीति निर्माताओं, वित्तीय संस्थानों, व्यवसायों और आम नागरिकों को सटीक तथा डेटा आधारित निर्णय लेने में मदद मिलेगी.

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