Rupee vs Dollar: भारतीय रुपये के लिए गुरुवार का कारोबारी सत्र मजबूती के साथ शुरू हुआ. अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 32 पैसे मजबूत होकर 94.85 के स्तर पर पहुंच गया. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के विदेशी मुद्रा बाजार से जुड़े कदमों और डॉलर में आई कमजोरी से घरेलू मुद्रा को समर्थन मिला है. वहीं, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और घरेलू शेयर बाजार में तेजी ने भी निवेशकों का ध्यान खींचा.
कारोबार की शुरुआत में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 94.91 के स्तर पर खुला था. इससे पहले पिछले कारोबारी सत्र में यह 19 पैसे मजबूत होकर 95.16 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था. लगातार मिल रही मजबूती के बीच अब बाजार की नजर इस बात पर है कि रुपया 94.80 के महत्वपूर्ण स्तर के नीचे टिक पाता है या नहीं. दूसरी ओर, सेंसेक्स और निफ्टी में भी 1 प्रतिशत से अधिक की तेजी दर्ज की गई.
RBI के कदमों से रुपये को कैसे मिला सहारा?
रुपये की मजबूती के पीछे भारतीय रिजर्व बैंक के विदेशी मुद्रा बाजार से जुड़े उपायों को अहम माना जा रहा है. RBI ने रुपये पर सट्टेबाजी को सीमित करने और विदेशी मुद्रा बाजार में स्थिरता बनाए रखने के लिए कुछ नियम सख्त किए हैं. इन कदमों से बाजार में डॉलर की लंबी पोजीशन कम करने का दबाव बना है. अक्टूबर की शुरुआत में RBI ने विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव्स कारोबार से जुड़े नियमों को और सख्त किया था.
इसके तहत बैंकों से कहा गया था कि 20 लाख डॉलर से अधिक की डॉलर खरीद पर 20 प्रतिशत का रिजर्व तैयार रखें. इसके अलावा, केंद्रीय बैंक ने रुपये से जुड़े विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव अनुबंधों को लेकर भी नियम स्पष्ट किए थे. नए निर्देशों के अनुसार, अधिकृत डीलर रद्द किए जा चुके ऐसे अनुबंधों को दोबारा बुक नहीं कर सकेंगे. ये नियम डिलीवेरेबल और नॉन-डिलीवेरेबल, दोनों तरह के अनुबंधों पर लागू होते हैं.
डॉलर इंडेक्स में गिरावट से भी मिली मदद
वैश्विक बाजार में डॉलर की कमजोरी का असर रुपये पर भी देखने को मिला. प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की मजबूती को मापने वाला डॉलर इंडेक्स गिरकर 101.99 पर आ गया. आमतौर पर डॉलर कमजोर होने पर रुपये जैसी अन्य मुद्राओं को मजबूती मिल सकती है. हालांकि, किसी मुद्रा की चाल पर वैश्विक ब्याज दरों, निवेशकों की धारणा और अंतरराष्ट्रीय व्यापार से जुड़े कई कारकों का असर पड़ता है.
इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड का भाव करीब 2 प्रतिशत गिरकर 104.30 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया. भारत कच्चे तेल का बड़ा आयातक है, इसलिए तेल की कीमतों में गिरावट से देश के आयात बिल पर दबाव कम हो सकता है. इससे रुपये को भी समर्थन मिलने की संभावना रहती है.
94.80 के स्तर पर बाजार की नजर
विशेषज्ञों के मुताबिक, रुपया पहले 95.50 से 95.00 के ट्रेडिंग दायरे में कारोबार कर रहा था, लेकिन अब इससे बाहर निकल चुका है. बाजार में अगला महत्वपूर्ण स्तर 94.80 के आसपास माना जा रहा है. यदि रुपया इस स्तर से नीचे टिकता है, तो इसमें आगे भी मजबूती की गुंजाइश बन सकती है. इसके अलावा, तेल विपणन कंपनियों की ओर से डॉलर की मांग में कमी और बाजार की बेहतर धारणा भी घरेलू मुद्रा को समर्थन दे सकती है. हालांकि, रुपये की आगे की दिशा वैश्विक बाजारों में होने वाले बदलावों, कच्चे तेल की कीमतों और डॉलर की चाल पर निर्भर करेगी.
2026 के अंत तक कहां पहुंच सकता है रुपया?
करेंसी विश्लेषकों के अनुमानों के मुताबिक, 2026 के अंत तक रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 95.60 से 97.50 के दायरे में कारोबार कर सकता है. अधिकांश अनुमान इसे 96 से 97 रुपये प्रति डॉलर के आसपास रखते हैं. ये बाजार आधारित अनुमान हैं, निश्चित भविष्यवाणी नहीं. अंतरराष्ट्रीय आर्थिक परिस्थितियों और घरेलू बाजार में बदलाव के कारण रुपये का वास्तविक स्तर इन अनुमानों से अलग भी हो सकता है.
शेयर बाजार में भी 1% से ज्यादा की तेजी
रुपये में मजबूती के बीच घरेलू शेयर बाजार में भी सकारात्मक रुख देखने को मिला. कारोबार के दौरान सेंसेक्स 1,000 अंकों से ज्यादा की तेजी के साथ 73,836.71 के स्तर पर पहुंच गया. वहीं, निफ्टी में 300 अंकों की बढ़त दर्ज की गई और यह 22,929.55 पर कारोबार करता दिखाई दिया. इस तरह विदेशी मुद्रा बाजार में रुपये की मजबूती, डॉलर इंडेक्स में गिरावट और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी के बीच भारतीय बाजार में सकारात्मक माहौल देखने को मिला.
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