ईंधन संकट के बीच भारत ने रूस को पहली बार भेजा लाखों बैरल पेट्रोल, यूक्रेनी हमलों से तेल रिफाइनरियां तबाह

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New Delhi: यूक्रेन के घातक ड्रोन हमलों से अपनी रिफाइनरियों को हुए भारी नुकसान के बाद दुनिया के सबसे बड़े तेल उत्पादकों में शुमार रूस को पेट्रोल आयात करने पर मजबूर होना पड़ा है. ऐसे मुश्किल वक्त में भारत ने आगे बढ़कर अपने दोस्त की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में ऐतिहासिक मदद की है. शिप-ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, भारत ने जून और जुलाई के दौरान रूस को 10 लाख बैरल से अधिक पेट्रोल की बड़ी खेप भेजी है.

व्यापारिक इतिहास में पहला मौका

दोनों देशों के व्यापारिक इतिहास में यह पहला मौका है जब रूस ने भारत से सीधे पेट्रोल का आयात किया है. यूरेशियाई पड़ोसी बेलारूस और कजाकिस्तान के साथ-साथ सात समंदर पार से भारत द्वारा दी गई यह पेट्रोलियम सप्लाई दर्शाती है कि नई दिल्ली हर कठिन परिस्थिति में मास्को के साथ अपनी गहरी कूटनीतिक और आर्थिक दोस्ती को पूरी शिद्दत से निभा रही है.

ट्रेंड जारी रहने की संभावना

अगस्त में भी यह ट्रेंड जारी रहने की संभावना है, हालांकि अभी इसके आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं. नयारा एनर्जी की वाडिनार रिफाइनरी– जिसमें रूस की बड़ी हिस्सेदारी है– भारत की मुख्य सप्लायर है. इस बीच नयारा एनर्जी की फैसिलिटी समेत भारतीय रिफाइनरियों के लिए बड़ी मात्रा में रूसी कच्चा तेल भारत आ रहा है. इसका मतलब है कि रूस को सप्लाई किया जा रहा कुछ गैसोलीन, भारत में रिफाइन किए गए उसी के तेल से तैयार किया जा रहा है.

एनर्जी से जुड़े रिश्तों में बदलाव

यह मॉस्को और नई दिल्ली के बीच एनर्जी से जुड़े रिश्तों में बदलाव को दिखाता है. पिछले लगभग चार सालों से भारत रूसी कच्चे तेल के टॉप दो खरीदारों में से एक रहा है, जबकि दूसरा खरीदार चीन है. यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद पश्चिमी देशों की पाबंदियों से मॉस्को के पारंपरिक यूरोपीय बाज़ार प्रभावित हुए थे, जिसके बाद रूसी तेल अक्सर आकर्षक कीमतों पर बेचा जाता रहा है. अब भारत के कच्चे तेल के इंपोर्ट बास्केट में रूसी तेल की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा है.

दिक्कतों ने बढ़ा दी मॉस्को की मुश्किलें 

रूस की तेल रिफाइनरियों पर बार-बार हो रहे यूक्रेनी ड्रोन हमलों, रिफाइनरी की रेगुलर मेंटेनेंस, गर्मियों में ज्यादा मांग और लॉजिस्टिक्स से जुड़ी दिक्कतों ने मॉस्को की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. पेट्रोल और डीजल, दोनों की घरेलू सप्लाई पर असर पड़ा है, लेकिन डीजल के मामले में देश की स्थिति अभी भी ठीक-ठाक है क्योंकि उसका रिफाइनिंग सिस्टम खपत से कहीं ज्यादा डीजल बनाने के लिए तैयार है.

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