Smart TV Market: 2025 में शिपमेंट रही स्थिर, साल के अंत में 10% की तेजी, 2026 में ग्रोथ की उम्मीद

Shivam
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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Smart TV Market India 2025: भारत का स्मार्ट टीवी बाजार 2025 में कुल मिलाकर स्थिर रहा, हालांकि साल के आखिरी महीनों में इसमें सुधार देखने को मिला. काउंटरपॉइंट रिसर्च की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, पूरे साल स्मार्ट टीवी शिपमेंट लगभग सपाट रही, लेकिन चौथी तिमाही में जीएसटी कटौती के बाद सालाना आधार पर करीब 10 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई.

पहली छमाही में कमजोर रही मांग

रिपोर्ट के अनुसार, साल की पहली छमाही में उपभोक्ता मांग कमजोर रही. इसकी वजह उपभोक्ताओं की सतर्कता और विवेकाधीन खर्च में कमी थी. लोग नए टीवी खरीदने या अपग्रेड करने के फैसले को टाल रहे थे, साथ ही मजबूत प्रमोशनल ऑफर्स की कमी भी बाजार पर असर डाल रही थी.

मिड-रेंज और बड़े स्क्रीन वाले टीवी की बढ़ी मांग

2025 में 40,000 से 50,000 रुपए की कीमत वाले टीवी सेगमेंट ने बेहतर प्रदर्शन किया. उपभोक्ता अब बेहतर फीचर्स और बड़े स्क्रीन वाले टीवी को प्राथमिकता दे रहे हैं. 43 इंच के टीवी की बिक्री सबसे ज्यादा रही, जबकि 55 इंच और उससे बड़े स्क्रीन वाले टीवी की मांग में भी लगातार बढ़ोतरी देखी गई.

QLED और MiniLED की तेजी से बढ़ती लोकप्रियता

रिपोर्ट में बताया गया है कि QLED टीवी की शिपमेंट में सालाना आधार पर लगभग दोगुनी वृद्धि हुई है. वहीं MiniLED सेगमेंट ने कम आधार से सबसे तेज वृद्धि दर्ज की है. इन तकनीकों की बढ़ती उपलब्धता और मिड-रेंज सेगमेंट में मजबूत पकड़ ने इनके विस्तार में अहम भूमिका निभाई है.

दूसरी छमाही में बाजार में आई रिकवरी

त्योहारी ऑफर्स, बेहतर फाइनेंसिंग स्कीम और बड़े स्क्रीन टीवी की बढ़ती पहुंच के कारण साल की दूसरी छमाही में बाजार में सुधार हुआ. इसके अलावा, 32 इंच और उससे बड़े टीवी पर जीएसटी दर में कटौती ने भी बिक्री को बढ़ावा दिया.

2026 में स्थिर ग्रोथ की उम्मीद

काउंटरपॉइंट रिसर्च की एनालिस्ट अंशिका जैन के अनुसार, 2026 में स्मार्ट टीवी बाजार में स्थिर वृद्धि देखने को मिल सकती है. महामारी के दौरान खरीदे गए टीवी के लिए अब रिप्लेसमेंट साइकिल शुरू होने की उम्मीद है, जिससे मांग बढ़ सकती है.

लागत बढ़ने से कीमतों पर पड़ सकता है असर

हालांकि, रिपोर्ट में यह भी चेतावनी दी गई है कि DRAM और NAND की कीमतों में संभावित बढ़ोतरी से फीचर-रिच टीवी की लागत बढ़ सकती है. इससे कंपनियों के मार्जिन पर दबाव आएगा और आने वाले समय में आक्रामक प्राइसिंग की गुंजाइश कम हो सकती है.

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